समझदारी : लॉकडाउन जैसे हालात में बच्चों को सिखाएं प्लास्टिक मनी का इस्तेमाल

देश में कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन कर दिया है। लॉकडाउन लगने से देशवासियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

नई द‍िल्‍ली: देश में कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन कर दिया है। लॉकडाउन लगने से देशवासियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सभी लोग घर पर ही रह रहे है। सही मायने में लॉकडाउन में लोग अपने पर‍िवार के साथ सयम बीता रहे है। तो क्‍यों न इस लॉकडाउन में कुछ अच्‍छा किया जाए। इस वक्‍त आप अपने बच्चों को प्लास्टिक मनी का इस्तेमाल करना सिखा सकते है। ज्यादातर भारतीय परिवारों में बच्चों को अभी भी पॉकेट मनी कैश के रूप में मिलती है। ई-कॉमर्स और डिजिटल मनी के बड़े पैमाने पर फैलने से भारत में लोगों के शॉपिंग और खर्च करने के तौर-तरीकों में बदलाव आया है। लेकिन, बच्चे अभी भी अपने मोबाइल फोन रीचार्ज करने और फूड ऑर्डर करने जैसे आम ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस के लिए अपने पैरेंट्स पर निर्भर होते हैं।

बच्‍चों में दें वित्तीय व्यवहार की सीख

बच्‍चों में दें वित्तीय व्यवहार की सीख

  • बच्चों को भी प्लास्टिक मनी का इस्तेमाल सीखना चाहिए। बच्चों को प्लास्टिक मनी से रूबरू कराने से उन्हें यह जानकारी मिलती है कि ये चीजें कैसे काम करती हैं। इसके जरिए बच्चों को भविष्य में इन उत्पादों के सही तरीके से और जिम्मेदारी भरे वित्तीय व्यवहार की सीख दी जा सकती है।
  • बच्चों को खर्च करने की इजाजत देना या वित्तीय आजादी देना पहली नजर में जोखिम भरा लग सकता है। ऐसी उम्र में जबकि बच्चों में समझ कम होती है और उनमें जल्दबाजी में फैसले लेने की प्रवृत्ति होती है, उनके हाथ में स्वाइप करने के लिए कार्ड दे दिया जाए तो उसके अनियंत्रित इस्तेमाल का खतरा ज्यादा होता है। इसी वजह से पैरेंट्स को एक रेगुलेटरी संस्था के तौर पर काम करना चाहिए। पैरेंट्स को अपने बच्चों को प्लास्टिक मनी के बारे में जानकारी देनी चाहिए।
इन बातों से अपने बच्‍चों को अवगत कराएं

इन बातों से अपने बच्‍चों को अवगत कराएं

  • बच्‍चों को इस बात से भी अवगत कराना जरूरी है कि क्रेडिट कार्ड कंपनी हर महीने के अंत में एक बिल भेजती है और अगर आप बिल नहीं चुकाते तो भारी-भरकम ब्याज और दूसरे चार्जेज आपको चुकाने पड़ते हैं।
  • आप उस कार्ड पर एक कम लिमिट (मिसाल के तौर पर, दो से तीन हजार रुपये) तय कर सकते हैं।
  • शुरुआत में बच्चे को केवल छोटी मासिक खरीदारी करने की इजाजत दीजिए।
  • इनमें फूड, बाइक में पेट्रोल डलाने और अपने मोबाइल बिल को चुकाने जैसी चीजें हो सकती हैं।
  • एक बार जब बच्चे आसानी से ये काम करने लगते हैं तो उन्हें ज्यादा बड़ी खरीदारी करने की इजाजत दी जा सकती है। एक पैरेंट के तौर पर आपको अपने बच्चे के लिए कुछ रूल्स साफतौर पर तय कर देने चाहिए।
  • आपको अपने बच्चे को बता देना चाहिए कि हर महीने आप कार्ड का बिल खुद मॉनिटर करेंगे और देखेंगे उसने किन चीजों पर और कितना पैसा खर्च किया है।
  • सबसे अहम बात यह है कि पैरेंट्स को शुरुआत में ही बच्चों को फ्रॉड करने वालों की हरकतों से बचने के तरीकों को बताना चाहिए।
  • उन्हें अपनी प्राइवेसी बचाने और डेटा के गलत इस्तेमाल से बचने के तरीके बिलकुल शुरू में ही बता दिए जाने चाहिए। बच्चों की यह आदत हो जानी चाहिए कि वे हर बार कार्ड स्वाइप करते वक्त कार्ड इश्यू करने वाले बैंक से अनिवार्य रूप से आने वाले अलर्ट एसएमएस को चेक करें और पढ़ें।
बच्‍चों में डालें क्रेडिट व्यवहार के सबक

बच्‍चों में डालें क्रेडिट व्यवहार के सबक

  • आपको अपने बच्चे को यह भी समझाना चाहिए कि किस तरह के उसका क्रेडिट व्यवहार और आदतें उसके वित्तीय भविष्य पर असर डालती हैं।
  • बच्चे को बताया जाना चाहिए कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल उसकी एक क्रेडिट हिस्ट्री बनाती है।
  • बच्चे के दिमाग में एक बड़े परिदृश्य की समझ आपको डालनी चाहिए। कि कैसे एक अच्छा क्रेडिट स्कोर भविष्य में लोन में हासिल करने में मददगार साबित होता है।
  • इस बात से भी अवगत करानी चाह‍िए कि अच्छे क्रेडिट स्कोर से कम ब्याज दर, आसानी से एप्रूवल, ज्यादा लोन अमाउंट जैसे फायदे मिलते हैं।
  • अगर आपका बच्चा समझदारी से क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करता है तो वह अपने जीवन के शुरुआती वक्त में ही एक ट्रैक रिकॉर्ड स्थापित कर लेता है और घर या ऑटो लोन लेने की अवस्था में पहुंचने तक उसका एक बढ़िया क्रेडिट स्कोर हो सकता है।

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