नई दिल्ली, मार्च 7। आज सुबह शेयर बाजारों में 3.25 प्रतिशत तक की गिरावट आई और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 76.96 पर आ गया। आज कारोबार के आखिर में सेंसेक्स 2.4 फीसदी और निफ्टी 2.35 फीसदी की गिरावट आई। उधर कच्चे तेल की कीमतें रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच 14 साल के उच्च स्तर 138 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गईं। सोमवार की सुबह तेल की कीमतें 8.50% उछल गईं। दरअसल अमेरिका रूसी तेल आयात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रहा है। इस दौरान ईरान परमाणु समझौता लगभग समाप्त हो चुका है। ये सभी वे फैक्टर हैं, जिनके चलते तेल उछल रहा है और शेयर बाजार और डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आ रही है। शेयर बाजार में गिरावट से सोने की चमक तेज हो रही है।
कितना गिरा शेयर बाजार
24 फरवरी को यूक्रेन पर रूसी आक्रमण शुरू होने के बाद से सेंसेक्स अब 7.66 प्रतिशत गिर चुका है। ब्रेंट क्रूड कुछ समय के लिए 138.00 डॉलर पर कारोबार कर रहा था लेकिन वर्तमान में इसकी कीमतें 128.00 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं। जानकारों ने कहा कि भारत, जो तेल की अपनी आवश्यकताओं का लगभग 80 प्रतिशत आयात करता है, के लिए यह स्थिति बहुत कठिन होगी।
डॉलर के मुकाबले रुपया
रुपया 76.96 को छूने के बाद 76.92 पर कारोबार कर रहा था। ये (76.96) इसका अब तक का सबसे कमजोर स्तर है। शुक्रवार को यह 76.16 पर बंद हुआ था। आखिर में यह 80 पैसे गिर कर 76.96 पर ही बंद हुआ। दरअसल तेल की बढ़ती कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ेगा और मुद्रास्फीति बढ़ेगी। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर होने और 77 के स्तर को पार करने की उम्मीद है। संभावना है कि कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी से मुद्रास्फीति बढ़ेगी।
सोने के रेट
आज 24 कैरेट वाले सोने का रेट प्रति 10 ग्राम 53234 रु पर आ गया। यह 2020 के 56200 रु के रिकॉर्ड स्तर से इस समय काफी करीब है। चांदी की कीमतों की बात करें तो ये प्रति किलोग्राम 69920 रु पर आ गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट के अनुसार कल शाम के रेट की तुलना में आज 23 कैरेट वाला सोना प्रति 10 ग्राम 53021 रु पर आ गया। इसके अलावा 18 कैरेट वाले सोने का दाम प्रति 10 ग्राम 39926 रु और 14 कैरेट वाला सोना प्रति 10 ग्राम 31142 रु पर आ गया।
निवेशकों को कितना हुआ नुकसान
7 मार्च को शेयर बाजार में गिरावट आई। इससे फरवरी की शुरुआत से अब तक निवेशकों की लगभग 29 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति का सफाया हो गया है। यूक्रेन पर रूसी हमला न केवल मास्को के लिए बल्कि वैश्विक विकास के लिए भी गंभीर होता जा रहा है। साथ ही इस बात की बढ़ती संभावना के साथ कि अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी वैश्विक आपूर्ति को नुकसान पहुंचाए बिना रूसी तेल और प्राकृतिक गैस पर प्रतिबंध लगा सकते हैं।
निवेशक क्या करें
विश्लेषकों ने कहा कि अगर निवेशकों के पास लंबी अवधि की निवेश योजना है तो उन्हें निवेशित रहना चाहिए और म्यूचुअल फंड निवेशकों को निवेश को तोड़े बिना अपनी एसआईपी योजनाओं को जारी रखना चाहिए। दूसरी ओर एक बड़ी गिरावट निवेशकों को आकर्षक स्तरों पर अच्छी क्वालिटी वाले शेयरों को खरीदने का मौका देगा। सलाह है कि सभी निवेशकों को वेट एंड वॉच की रणनीति का पालन करना चाहिए और मौजूदा समय में किसी भी नई खरीदारी से बचना चाहिए।


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