नई दिल्ली, फरवरी 17। यदि आप शेयरों में निवेश करते हैं तो आपको पता होगा कि स्टॉक कैसे खरीदे जाते हैं। यदि आप शेयरों के साथ साथ क्रिप्टोकरेंसी में भी निवेश करते हैं तो आपको मालूम होगा कि ऐप का उपयोग करके शेयर की ही तरह क्रिप्टो को भी आसानी से खरीदा जा सकता है। मगर क्या आपने कभी गौर किया कि शेयरों और क्रिप्टो की निवेश प्रोसेस में एक बड़ा अंतर होता है। यहां हम आपके सामने उसी अंतर की जानकारी रखेंगे। ये जानकारी आपकी क्रिप्टो होल्डिंग्स से जुड़ी हुई है।
कहां आते हैं शेयर
जब कोई निवेशक ऐप के जरिए स्टॉक खरीदता है, तो वो ब्रोकिंग कंपनी, जहां उसका डीमैट खाता खुला हुआ है, उसकी तरफ से बीएसई या एनएसई को ऑर्डर देती है। फिर एक्सचेंज आपके ऑर्डर के समान एक मैच ढूंढता है। इसके बाद एक्सचेंज ही डिपॉजिटरी को ट्रांजेक्शन की डिटेल देता है। ये डिपॉजिटरी सीडीएसएल या एनएसडीएल हो सकते हैं। फिर डिपॉजिटरी दो कारोबारी दिवसों में आपके डीमैट खाते में शेयरों के असल ट्रांसफर की प्रोसेस को पूरा करते हैं। यानी शेयर आपके डीमैट खाते में आ जाते हैं। यही आपकी शेयरहोल्डिंग होती है। मगर क्रिप्टो की होल्डिंग अलग तरह से होती है।
क्रिप्टो के लिए क्या है प्रोसेस
कोई निवेशक जब क्रिप्टो खरीदता है, तो वो एक्सचेंज, जहां उसका खाता हो, बाजार में निवेशक के ऑर्डर के लिए एक मैच ढूंढता और विक्रेता से क्रिप्टो की डिलीवरी लेता है। आखिर में वहीं निवेशक की तरफ से क्रिप्टो को स्टोर करता है। ये शेयरहोल्डिंग से अलग है। वर्चुअल करेंसी में निवेश करने के लिए किसी क्रिप्टो एक्सचेंज पर खाता खोलें और केवाईसी डिटेल दर्ज करें। फिर जो अकाउंट आपने क्रिप्टो एक्सचेंज पर ट्रेड करने के लिए जोड़ा है उसमें पैसा डालें और क्रिप्टो खरीदें। इन प्लेटफॉर्म से कैश निकालना भी एक इंस्टैंट और आसान प्रोसेस होती है।
क्रिप्टो एक्सचेंज पर तीन जिम्मेदारियां
स्टॉक एक्सचेंजों के उलट क्रिप्टो एक्सचेंज निवेशकों के लिए एक्सचेंज, डिपॉजिटरी और ब्रोकर यानी तीन तीन भूमिका निभाते हैं। एक और बड़ा अंतर यह भी है कि क्रिप्टो एक्सचेंज फिलहाल अनरेगुलेटेड एंटीटीज हैं। शेयर एक्सचेंजों आदि पर सेबी की नजर रहती है, मगर क्रिप्टो एक्सचेंज पर कोई रेगुलेटर नहीं है। पर एक बात है कि डीमैट खाता खुलवाने में आपको 2-3 दिन लग सकते हैं और ये एक लंबा प्रोसेस होता है। जबकि क्रिप्टो एक्सचेंज में इतना झमेला नहीं होता। ऐप डाउनलोड, ऑनलाइन केवाईसी करो और निवेश शुरू।
कई क्रिप्टो एक्सचेंज निवेश के लिए उपलब्ध
क्रिप्टोकरेंसी में जोखिम शेयर बाजार से अधिक माना जाता है। मगर भारत में इनकी मांग बढ़ी है। इसी मांग को पूरा करने के लिए भारत में कई क्रिप्टो एक्सचेंज आ चुके हैं। मगर इन एक्सचेंजों के पास क्रिप्टो को सोर्स करने या लिक्विडिटी जोखिम को मैनेज करने के लिए कोई एक जैसा तरीका नहीं है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एक ही प्लेटफॉर्म पर क्रिप्टो एक्सचेंज खरीदार/विक्रेता को खोजने की कोशिश करता है। वरना एक्सचेंज क्रिप्टो को बड़े एक्सचेंजों से सोर्स करते हैं यानी उससे लेते या खरीदते हैं।
क्या होती है प्राइवेट की
आमतौर पर एक 'प्राइवेट की (चाबी)' का पोजेशन उस क्रिप्टो संपत्ति का स्वामित्व दिलाता है। मगर भारत में एक्सचेंज 'सेंट्रालाइज्ड' हैं। इसका मतलब है कि वे निवेशक की ओर से ये 'की' रखते हैं।
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