नयी दिल्ली। एसबीआई की वार्षिकी जमा योजना उन लोगों के लिए बेहतर है जो मासिक निश्चित इनकम प्राप्त करना चाहते हैं। यदि आप मासिक इनकम के लिए इस योजना में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो ये आपके लिए बेहतर ऑप्शन साबित होगा। निवेशकों को इस योजना में एक बार में निवेश करने और मासिक इनकम मिलती है। इस मासिक इनकम में आपको पैसा जमा करने पर समान किस्त (ईएमआई) मिलेगी। मासिक किस्तों में मूल राशि और ब्याज शामिल होगा। लेकिन इस योजना को चुनने से पहले आपको कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत है।
निवेश के लिए है जरूरी
निवेश के लिए कुछ जरूरी नियम तय किए गए हैं। पहली बात कि निवेशक का भारतीय होना जरूरी है। इसमें व्यस्क होने की शर्त नहीं है। योजना में कई निवेशक अकेले और किसी के साथ मिल कर जॉइंट खाता भी खुलवा सकता है। एनआरई (अनिवासी विदेशी) और एनआरओ (नॉन रेजिडेंट ऑर्डिनरी) इस योजना में निवेश के लिए पात्र नहीं है।
ये हैं एसबीआई वार्षिकी जमा योजना के मुख्य फीचर्स
यह योजना भारत में सभी शाखाओं (विशेष क्रेडिट इंटेसिंव शाखाओं को छोड़कर) में उपलब्ध है। इस योजना में न्यूनतम राशि 1000 रुपये है। इस योजना में न्यूनतम 25000 रुपये से कम की राशि जमा की जा सकती है। ब्याज दर आपको बैंक की सावधि जमा के बराबर ही मिलेगी। हालांकि एसबीआई कर्मचारियों और एसबीआई पेंशनरों के लिए ब्याज दर 1.00% अधिक दी जाएगी। 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दर 0.50% अधिक मिलेगी। यूनिवर्सल पासबुक निवेशक की ओर से जारी की जाती है जो आसानी से एसबीआई शाखाओं के बीच ट्रांसफर की जा सकती है।
योजना के विशेष लाभ
इस योजना में आप 3, 5, 7 या 10 साल की कोई मैच्योरिटी अवधि चुन सकते हैं। ध्यान रहे कि निवेश की गई पूरी राशि की प्रीपेमेंट पर केवल जमाकर्ता की आकस्मिक मृत्यु के मामले में विचार किया जाएगा। आपको इमरजेंसी के समय बैलेंस के 75 फीसदी तक लोन मिल सकता है। इस योजना पर ब्याज दर बैंक की सावधि / सावधि जमा के बराबर है। एसबीआई की मौजूदा एफडी दरों के अनुसार 1 से 10 वर्षों के भीतर मैच्योर होने वाली जमा पर 5.9 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। दूसरी तरफ वरिष्ठ नागरिकों को 1 वर्ष से 10 वर्ष की अवधि के लिए 6.4 प्रतिशत की ब्याज दर मिलेगी।
नियम और शर्तें
जैसा कि एफडी के मामले में होता है कि समय से पहले पैसा निकालने पर आपको जुर्माना देना होगा। ऐसा ही इस योजना में भी। समय से पहले अधिकतम भुगतान 15 लाख रुपये तक किया जाएगा। हालांकि निवेशक की मृत्यु के मामले में समय से पहले छूट दी जाती है।


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