नई दिल्ली, जुलाई 28। इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने का सीजन शुरू हो गया है। केंद्र सरकार ने कुछ समय पहले ही कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर और करदाताओं के सामने आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए आकलन वर्ष 2021-22 के लिए आईटीआर दाखिल करने की समय सीमा 31 जुलाई से बढ़ा कर 30 सितंबर, 2021 कर दिया था। अब आपके पास टैक्स रिटर्न दाखिल करने के लिए अधिक समय है, ऐसे में आपको टैक्स छूट वाले ऑप्शनों के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। यहां हम आपको ऐसे ऑप्शनों की जानकारी देंगे, जिनमें पैसा लगाने से आपका टैक्स भी बचेगा और बुढ़ापे/रिटायरमेंट की तैयारी भी होगी।
ईपीएफ
कर्मचारी भविष्य निधि, जिसे ईपीएफ भी कहा जाता है, वेतनभोगी (सैलेरी पाने वाले) लोगों के लिए सबसे आसान टैक्स बचत विकल्पों में से एक है। इसे कर्मचारी भविष्य निधि और विविध अधिनियम 1952 के तहत पेश किया गया था और इसका प्रबंधन केंद्रीय न्यासी बोर्ड द्वारा किया जाता है। ईपीएफ के तहत वेतनभोगी कर्मचारियों की टैक्स सेविंग टैक्स छूट के रूप में होती है। कर्मचारी के पीएफ खाते में मिलने वाला ब्याज (2.5 लाख रु तक) टैक्स फ्री रहता है।
पीपीएफ
पब्लिक प्रोविडेंट फंड या पीपीएफ एक टैक्स सेविंग ऑप्शन है। पीपीएफ निवेश ईईई या छूट-छूट-छूट कैटेगरी में आता है। इसका मतलब है कि पीपीएफ खाते में निवेश की गई राशि धारा 80 सी के तहत टैक्स-कटौती योग्य होती है और इस प्रकार, वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए ये इनकम टैक्स प्लानिंग में मदद करता है। पीपीएफ में जमा राशि, ब्याज और मैच्योरिटी राशि सबस टैक्स फ्री होती है।
इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस)
इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम या में निवेश पर आपको धारा 80सी के तहत टैक्स कटौती का फायदा मिलेगा। आपको यह भी पता होना चाहिए कि टैक्स कटौती के चलते ये स्कीम इसे अन्य सभी म्यूचुअल फंड योजनाओं से अलग बनाती है। ईएलएसएस अपने दोहरे लाभ के कारण वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए अन्य कर बचत विकल्पों से बेहतर है।
नेशनल पेंशन स्कीम
पीपीएफ और सावधि जमा (एफडी) की तुलना में, एनपीएस निवेश पर ज्यादा रिटर्न दिला सकता है। इस पर धारा 80सीसीई के तहत 1.5 लाख की सीमा तक टैक्स छूट मिल सकती है। यह ऑप्शन भी वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए आयकर योजना बनाने में मदद करता है। एनपीएस भारत में वेतनभोगी लोगों के लिए लंबी अवधि के लिए टैक्स सेविंग विकल्पों में से एक है। यह एक बढ़िया निवेश योजना भी है जो पीएफआरडीए और केंद्र सरकार के दायरे में आती है। जो लोग जल्दी रिटायर होने की योजना बनाना चाहते हैं और कम जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं वे एनपीएस में निवेश कर सकते हैं।
टैक्स सेविंग एफडी
टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट या एफडी भी वेतनभोगियों के लिए टैक्स बचाने का अच्छा ऑप्शन है। यह ऐसी एफडी है, जिसमें आप 1.5 लाख रु तक पर टैक्स बचा सकते हैं। हालांकि टैक्स सेविंग एफडी में 5 साल की लॉक-इन अवधि होती है। मगर ये वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए टैक्स बचाने के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है। एक और बात कि टैक्स सेविंग एफडी का रिटर्न टैक्सेबल होता है।
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