नयी दिल्ली। रिलायंस जियो का सितारा इस समय काफी बुलंद है। कंपनी का हर कदम एक सटीक और फिट बैठ रहा है। जियो, जिसने 2016 में शुरुआत के बाद बेहद कम समय में देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बनने का सफर तय किया है, के लिए निवेश के लिहाज से गोल्डन पीरियड है। जियो इससे सिर्फ अपने ही नहीं बल्कि अपनी पैरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए भी ग्रोथ और कामयाबी की सीढ़ी तैयार कर ही है। बता दें कि फेसबुक के रिलायंस इंडस्ट्रीज के जियो प्लेटफॉर्म में निवेश की घोषणा करने के दो सप्ताह बाद ही निजी इक्विटी फर्म सिल्वर लेक पार्टनर्स ने इसमें लगभग 75 करोड़ डॉलर (करीब 5,655.75 करोड़ रुपये) के निवेश के लिए सौदा कर लिया। सिल्वर लेक डील के तहत 1 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी है। ये दोनों जियो की वो डील हैं जो रिलायंस इंडस्ट्रीज को अपना कर्ज शून्य करने में काफी मदद करेंगी।
फेसबुक-रिलायंस डील का जियो कनेक्शन
पिछले महीने फेसबुक ने जियो प्लेटफॉर्म में 10 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए रिलायंस के साथ 43574 करोड़ रुपये का सौदा किया। जियो प्लेटफॉर्म रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडरी (सहायक) कंपनी है, जिसमें इसका टेलीकॉम डिविजन रिलायंस जियो इन्फोकॉम और डिजिटल सेवाएं शामिल हैं। जियो प्लेटफॉर्म में 4.90 लाख करोड़ रुपये की इक्विटी वैल्यू है, जो फेसबुक के वैल्यूएशन का 12.5 फीसदी प्रीमियम है। वहीं सिल्वर लेक डील पर रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा था कि सिल्वर लेक का वैश्विक स्तर पर प्रमुख तकनीकी कंपनियों के लिए एक शानदार पार्टनर होने का बेहतरीन रिकॉर्ड है। सिल्वर लेक की एयूएम (एसेट अंडर मैनेजमेंट) 40 बिलियन डॉलर की है, और इसके पोर्टफोलियो में सोशल मीडिया फर्म ट्विटर और कंप्यूटर हार्डवेयर निर्माता डेल टेक्नोलॉजीज शामिल हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज से बेहतर जियो का प्रदर्शन
जहां तक इनकम की बात है तो जनवरी-मार्च में जहां कोरोनावायरस और लॉकडाउन के कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज का मुनाफा 39 फीसदी घट कर 6348 करोड़ रुपये रह गया वहीं जियो का मुनाफा दिसंबर तिमाही के मुकाबले 77 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 2331 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की जनवरी-मार्च तिमाही के मुकाबले जियो के मुनाफे में 177.5 फीसदी की और भी धमाकेदार बढ़ोतरी हुई। जानकार बताते हैं कि अपने 38.75 करोड़ ग्राहकों और अपने शानदार कंटेंट की पेशकश के वादे के साथ आगे जियो का फ्यूचर और भी सुनहरा है।
रिलायंस को मिल रहा भरपूर फायदा
जियो के जरिए रिलायंस और मुकेश अंबानी को काफी फायदा हो रहा है। एक रेटिंग एजेंसी के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष के अंत तक अपने लोन को शून्य तक कम करने के लिए डिजिटल सेवाओं के कारोबार में हिस्सा बेचना रिलायंस की क्षमता और इच्छा को दर्शाता है। यानी रिलायंस ने जियो प्लेटफॉर्म के लिए हाल में किए सौदे इसका कर्ज घटाने में मदद करेंगे। 31 मार्च तक रिलायंस पर 3.36 लाख करोड़ रुपये का बकाया कर्ज था, जिसमें शुद्ध कर्ज 1.6 लाख करोड़ रुपये का है। फेसबुक और सिल्वर लेक के बाद रिलायंस सऊदी अरामको के साथ भी सौदा करने के लिए बातचीत कर रही है।
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