EPF रेट घटने से बढ़ सकता है Income Tax का बोझ, जानिए बचने का तरीका

नयी दिल्ली। सैलेरी पाने वाली कर्मचारियों के हाथ में ज्यादा पैसे देने और एम्प्लोयर्स (कंपनियों) पर बोझ कम करने के लिए 13 मई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैधानिक पीएफ योगदान नियमों में ढील देने का ऐलान किया। 6,750 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी सहायता प्रदान करने के लिए कर्मचारियों के साथ ही कंपनियों के वैधानिक पीएफ योगदान को अगले 3 महीनों के लिए 12 फीसदी से घटा कर 10 फीसदी कर दिया जाएगा। ये फैसला ईपीएफओ द्वारा कवर किए जाने वाले सभी तरह के सेक्टरों के लिए लागू होगा। हालांकि ये नियम राज्य या केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए नहीं है। इसका मतलब है कि केंद्रीय और राज्य सरकारी कंपनियां 12 फीसदी योगदान करती रहेंगी।

इन कंपनियों में सरकार देगी योगदान

इन कंपनियों में सरकार देगी योगदान

वे कंपनियां जिनमें कर्मचारियों की संख्या 100 तक है और उनमें से 90 फीसदी का मासिक वेतन 15000 रु से कम है ऐसी कंपनियों के लिए सरकार ने पीएम गरीब कल्याण पैकेज के तहत मार्च से मई के लिए ईपीएफ सहायता की घोषणा की थी, जिसमें सरकार कंपनियों और कर्मचारियों की तरफ से ईपीएफ योगदान देगी। इस सहायता को जून, जुलाई और अगस्त 2020 3 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है। इससे 3.67 लाख कंपनियों को लिक्विडिटी में राहत मिलेगी। इसके अलावा वे प्राइवेट कंपनियां जिन्हें पीएम गरीब कल्याण पैकेज के तहत सरकारी 24 फीसदी ईपीएफ सहायता नहीं मिलेगी उनमें 3 महीने के लिए ईपीएफ योगदान 10 फीसदी तक कम किया जा सकता है।

इनकम टैक्स का फंसेगा पेंच

इनकम टैक्स का फंसेगा पेंच

नया टैक्स सिस्टम
पीएफ योगदान में इन बदलावों से आपके इनकम टैक्स में एक पेंच फंसेगा। ध्यान रहे कि अब दो टैक्स सिस्टम हैं। नए टैक्स सिस्टम में सेक्शन 80सी के तहत आपको टैक्स बेनेफिट नहीं मिलेगा, मगर आप कम टैक्स रेट का फायदा ले सकते हैं। इसलिए, भले ही आर्थिक पैकेज के अनुसार आपका ईपीएफ योगदान 12% से कम होकर 10% हो, इससे आप पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

पुरानी टैक्स व्यवस्था
अगर आप पुराने टैक्स में बरकरार रहना चाहते हैं तो वित्त मंत्री की पीएफ योगदान कम करने की घोषणा से 2020-21 के लिए सेक्शन 80सी के तहत आपकी निवेश राशि कम हो जाएगी। इसका मतलब है कि आपकी टैक्स देनदारी बढ़ेगी।

ये है बचने का तरीका

ये है बचने का तरीका

अगर आपको इस एक्स्ट्रा कैश की फौरन जरूरत नहीं है तो आप वीपीएफ (Voluntary Provident Fund) का रास्ता चुन कर अपनी निवेश राशि बढ़ा सकते हैं। इससे पुराने टैक्स सिस्टम के तहत आपका ज्यादा टैक्स बचेगा। वीपीएफ पर ईपीएफ के बराबर ही ब्याज मिलता है। आप अपनी कंपनी के एचआर से बात करते वीपीएफ के जरिए अपना योगदान बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा अगर आपका रिटायरमेंट दूर है तो आप ईएलएसएस (इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम) या पीपीएफ (पब्लिक प्रॉविडेंट फंड) योजना में निवेश कर सकते हैं। दोनों ही ऑप्शन में आपको सेक्शन 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की लिमिट पर टैक्स छूट मिलेगी।

ये भी है ऑप्शन

ये भी है ऑप्शन

यदि आपकी चिंता रिटायरमेंट सेविंग है, तो आप एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम), सरकार समर्थित पेंशन योजना, में निवेश कर सकते हैं। इसमें भी आपको आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत टैक्स कटौती का फायदा मिलेगा।

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