जल्द ही 100 रुपये के नोट में बड़ा बदलाव होने वाला है। जिसके लिए मोदी सरकार ने भी इसकी मंजूरी दे दी है। बता दें कि आरबीआई इस बदलाव के लिए पहले से तैयार था। बस सरकार की मंजूरी की देरी थी।
नई दिल्ली: जल्द ही 100 रुपये के नोट में बड़ा बदलाव होने वाला है। जिसके लिए मोदी सरकार ने भी इसकी मंजूरी दे दी है। बता दें कि आरबीआई इस बदलाव के लिए पहले से तैयार था। बस सरकार की मंजूरी की देरी थी। लेकिन अब इस मामले में सरकार ने भी मंजूरी दे दी है। शुरुआत में इन नोटों को 5 केंद्रों में प्रयोग के तौर पर जारी किया जाएगा। वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने 100 रुपये के नोटों को लेकर राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। वहीं उन्होंने कहा कि सरकार ने आरबीआई की ओर से शिमला, जयपुर, भुवनेश्वर, मैसूर और कोच्चि में प्रायोगिक परीक्षण आधार पर 100 रुपये मूल्य के एक अरब वार्निश लगे बैंक नोटों की शुरूआत करने को मंजूरी दी है। RBI : 1000 रुपये के नए नोट की क्या है सच्चाई, जानिए यहां
वार्निश नोट की खासियत
वार्निश लगे नोटों की आयु लंबी होगी और ये जल्दी खराब नहीं होगे। हालांकि इससे नोटों को तैयार करने की लागत में इजाफा हो जाएगा। वार्निश का अर्थ नोट पर एक और लेयर चढ़ाए जाने से है, जो एक तरह प्लास्टिक कोटिंग होती है। इससे नोट पर पानी पड़ने का असर नहीं होता। वार्निश नोट पर एक विशेष परत चढ़ी होती है। यह परत नोट को जल्द नहीं फटने देती है। इसके अलावा नोट आसानी से गंदे भी नहीं होते हैं। दुनिया भर के कई देशों में ऐसे नोटों का इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन भारत में अपने आप में यह पहला प्रयोग है। अब भारत में भी वार्निश नोटों का प्रयोग कर मौजूदा नोटों के जल्दी गंदे होने और कट-फट जाने की समस्या से निपटा जा सकेगा।
अब तीन तरह के हो जाएंगे 100 के नोट
गौरतलब है कि मार्केट में अब भी दो तरह के 100 रुपये के नोट चल रहे हैं। एक नोट वह है, जो पहले से चला आ रहा है और दूसरा नया नोट वह है, जिसे नोटबंदी के बाद जारी किया गया है। इस तरह वार्निश किए हुए नोटों के प्रचलन में आने के बाद कुल 3 तरह के 100 रुपये के नोट हो जाएंगे। 100 रुपये के नोटों को ट्रांजेक्शन के लिए बेहद अहम माना जाता है। हालांकि बीते कुछ महीनों में एटीएम से 100 रुपये निकलने कम हो गए हैं क्योंकि दो तरह के नोटों के चलते मशीनों में कैसेट की सेटिंग में समस्या आ रही है।
जानिए क्यों उठाया जा रहा है ये कदम
- सबसे पहली बात है कि मौजूदा नोट जल्दी खराब हो जाते हैं।
- ये जल्दी कट-फट जाते हैं या मैले हो जाते हैं।
- रिजर्व बैंक को हर साल लाखों करोड़ रुपये के गंदे या कटे-फटे नोट रीप्लेस करने पड़ते हैं।
- आमतौर पर हर पांच में से एक नोट हर साल हटाना पड़ता है।
- इन पर एक बड़ी राशि खर्च होती है।
- नोटों के कटने, फटने और गलने की स्थिति में बैंकों को अकसर उन्हें बदलना पड़ता है।
- इस पर आरबीआई को काफी पैसा खर्च करना पड़ता है।
- ऐसे में आरबीआई ने टिकाऊ नोटों का प्लान तैयार किया है ताकि आम लेनदेन में नोटों को कोई नुकसान न हो और वे लंबे समय तक चल सकें।
- इस समस्या से निजात पाने के लिए दुनिया के कई देश प्लास्टिक नोटों का इस्तेमाल करते हैं।
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