RBI MPC Meeting: केंद्रीय बैंक यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) मौद्रिक समीक्षा कमिटी की मीटिंग आज 5 जून से शुरू हो गई है. 6 सदस्यों वाली इस कमिटी में ब्याज दरों पर फैसला लिया जाएगा. मौजूदा महंगाई को लेकर भी निर्णय होगा. मीटिंग के बाद कमिटी के अध्यक्ष गवर्नर शक्तिकांत दास शुक्रवार यानी 7 जून को फैसले की जानकारी देंगे. बता दें कि मौजूदा रेपो रेट 6.50% है. नए फाइनेंशियर ईयर (FY25) की ये दूसरी MPC मीटिंग है.
महंगाई घटाने पर हो सकता है फोकस
रिजर्व बैंक का फोकस इस बार की पॉलिसी मीटिंग में महंगाई को घटाने पर हो सकता है. रिटेल महंगाई दर अप्रैल में 4.8% रही, जोकि RBI के टारगेट 4% से ऊपर है. हालांकि, ये रिजर्व बैंक के दायरे में है. ऐसे में पॉलिसी मीटिंग में रेपो रेट के स्थिर रखा जा सकता है. क्योंकि आर्थिक ग्रोथ की रफ्तार अच्छी रहने से सपोर्ट मिल सकता है. FY24 में GDP ग्रोथ रेट 8.2% रही थी.
हर दो महीने में होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग इस बार 5 से 7 जून होता है. इससे पहले फरवरी में पॉलिसी मीटिंग में रेपो रेट में बदलाव किया गया था. उसके बाद अप्रैल में दरों को स्थिर रखने का फैसला किया गया. FY23 में 6 बार पॉलिसी मीटिंग हुई थी.
RBI क्यों घटाता या बढ़ाता है रेपो रेट?
बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन के चलते दुनियाभर के सेंट्रल बैंक ने महंगाई पर काबू पाने के लिए दरों में इजाफा किया. इसमें भारत का केंद्रीय बैंक यानी RBI भी शामिल है. सेंट्रल बैंक के पास रेपो रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक मजबूत हथियार है. ऐसे में जब भी महंगाई काबू से बाहर निकल जाती है या फिर निकलने लगती है तब RBI रेपो रेट में बदलाव करता है.

इससे अर्थव्यस्था में लिक्विडिटी फ्लो को कम करने की कोशिश की जाती है. यानी रेपो रेट हाई होगा तो बैंकों को RBI से मिलने वाला लोन महंगा मिलेगा. इसके चलते बैंक ग्राहकों को ज्यादा ब्याज दरों पर लोन बांटेंगे. नतीजनत, इकोनॉमी में लिक्विटी का फ्लो गिर जाएगा. और जब मनी फ्लो गिरेगा तो महंगाई घट जाएगी.
इसके ठीक उलट जब इकोनॉमी में लिक्विडिटी का फ्लो बढ़ाना होता है तब रिजर्व बैंक रेपो रेट को कम कर देती है. रेपो रेट कम होने से बैंकों को कम ब्याज पर RBI से लोन मिलता है. इससे ग्राहकों को भी लोन ब्याज दरों पर सस्ते में मिलता है. नतीजनत, इकोनॉमी की रफ्तार को जोश मिलता है. इसे उदाहरण से समझते हैं....कोरोना महामारी के समय आर्थिक संकट में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट घटाकर आर्थिक ग्रोथ में जोश भरने का काम किया.
रिवर्स रेपो रेट में बदलाव से कितना पड़ता है असर?
MPC पॉलिसी में रेपो रेट के साथ रिवर्स रेपो रेट का भी ऐलान किया जाता है. रिवर्स रेपो रेट उसे कहते है जिस रेट पर रिजर्व बैंक बैंकों को पैसा रखने पर ब्याज देता है. रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी कर RBI बाजार में नकदी को कम करता है. वहीं, बैंक RBI के पास अपनी होल्डिंग के लिए ब्याज लेकर इसका फायदा उठाते हैं. सेंट्रल बैंक इकोनॉमी में महंगाई बढ़ने के दौरान रिवर्स रेपो रेट बढ़ाता है, जिससे बैंकों के पास ग्राहकों को लोन देने के लिए फंड कम हो जाता है.
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