RBI MPC: रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक (एमपीसी) कल से शुरू होने जा रही है। महंगाई लगातार ऊपर बनी हुई है, और डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है। लेकिन इसके बीच भी जानकारों को उम्मीद है कि शायद आरबीआई इस बार भी रेपो रेट को न बढ़ाए। अगर ऐसा होता है तो जहां लोन की किस्त बढ़ने की आशंका कम होगी, वहीं एफडी पर ज्यादा ब्याज मिलता रहेगा। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो एफडी या ईएमआई में से किसी पर असर पड़ सकता है।
आरबीआई की मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक (एमपीसी) की बैठक कल से शुरू होकर 6 अक्टूबर तक चलेगी। 6 अक्टूबर को आरबीआई अपनी पॉलिसी की घोषणा करेगा। उसी दिन पता चलेगा कि तमाम कारणों पर विचार के बाद आरबीआई क्या फैसला लेता है। अभी रेपो रेट 6.5 फीसदी है।

जानिए रेपो रेट में कब से बदलाव नहीं हुआ
- 10 अगस्त 23 को 6.50 फीसदी
- 8 जून 23 को 6.50 फीसदी
- 4 अप्रैल 23 को 6.50 फीसदी
- 8 फरवरी 23 को 6.50 फीसदी
- 7 दिसंबर 22 को 6.25 फीसदी
बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस के अनुसार इस बार की मॉनेटरी पॉलिसी में मौजूदा दर संरचना के साथ ही नीतिगत रुख के जारी रहने की संभावना है। इसलिए रेपो रेट 6.5 फीसदी पर बरकरार रखी जा सकती है। रिटेल महंगाई अब भी 6.8 फीसदी के उच्च स्तर पर है, और सितंबर और अक्टूबर में इसमें कमी आने की उम्मीद है, लेकिन खरीफ प्रोडक्शन को लेकर कुछ आशंकाएं हैं, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं।
वहीं इक्रा लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और ग्रुप हेड (फाइनेंशियल सेक्टर रेटिंग) कार्तिक श्रीनिवासन को भी उम्मीद है कि एमपीसी नीतिगत दर को स्थिर रख सकता है। उन्होंने कहा कि सितंबर के दूसरे पखवाड़े में नकदी में जो सख्ती देखी गई, वह जारी रहने की संभावना नहीं है।


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