आप इस बात से बखूबी अवगत होंगे कि मोदी सरकार ने देश के युवाओं को स्वरोजगार के लिए स्टार्टअप शुरू करने की अपील की है। इसके बाद कई लोगों द्वारा स्टार्टअप शुरू किए गए हैं।
नई दिल्ली: आप इस बात से बखूबी अवगत होंगे कि मोदी सरकार ने देश के युवाओं को स्वरोजगार के लिए स्टार्टअप शुरू करने की अपील की है। इसके बाद कई लोगों द्वारा स्टार्टअप शुरू किए गए हैं। इसी कड़ी में मुंबई के एक 18 साल के युवा उद्यमी अर्जुन देशपांडे ने भी स्टार्टअप की शुरुआत की थी। अब इस स्टार्टअप का सालाना रेवेन्यू 6 करोड़ तक पहुंच गया है। महज 16 साल की उम्र में अपना स्टार्टअप शुरू करने वाले इस लड़के की कंपनी में देश के दिग्गज दानवीरों में से एक रतन टाटा ने गुरुवार को दवा कारोबार से जुड़े एक फर्म 'जेनरिक आधार' में एक अघोषित रकम निवेश किया है। इससे पहले भी कई बार रतन टाटा ने इस तरह के स्टार्ट में निवेश किया है। बता दें कि सोशल मीडिया पर उनके कंपनी में निवेश की खबर वायरल हुई तो उन्होंने भी ट्वीट कर इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

स्टार्टअप का समर्थन करने में खुशी हुई : रतन टाटा
रतन टाटा ने अपने शुक्रवार को ट्वीट करते हुए लिखा, 'मैं उतना ही खुश हूं जितना मुझे इस स्टार्टअप का समर्थन करने में खुशी हुई थी। यह बहुत छोटा निवेश है, 50 फीसदी या भिन्न प्रकार से मैंने कंपनी में कोई हिस्सेदारी नहीं खरीदी है। अपने इस ट्वीट में उद्योगपति रतन टाटा ने इस स्टार्टअप में कितना निवेश किया, इसको लेकर फिलहाल खुलासा नहीं किया गया है। हालांकि उनके ट्वीट पर कई यूजर्स की प्रतिक्रियाएं आईं हैं जिसमें लोगों ने रतन टाटा की खूब प्रशंसा की है।
जानिए क्या है स्टार्टअप का कॉन्सेप्ट
- जेनेरिक आधार यूनिक फॉर्मेसी एग्रीगेटर बिजनेस मॉडल पर आधारित है, जेनेरिक आधार, जेनेरिक दवाईयों को सीधे मैन्यूफेक्चर्स से लेता है और विभिन्न शहरों में मौजूद फॉर्मेसीज को उपलब्ध कराता है।
- कंपनी दवाईयों को मार्केट प्राइज से सस्ते में उपलब्ध कराती है क्योंकि वह 16-20 प्रतिशत होलसेलर के मार्जिन को कम कर देती है।
- स्टार्टअप का दावा है कि अब तक कंपनी का रेवेन्यू सालाना 6 करोड़ तक पहुंच गया है।
- वहीं देशपांडे अगले तीन सालों में इस रेवेन्यू को 150 से 200 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
- जेनरिक आधार का लक्ष्य लोगों तक वहन कर सकने वाली कीमत में दवाओं को पहुंचाना है।
- बता दें कि कंपनी अब तक मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और ओडिशा के 30 रिटेलर्स से प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल के आधार पर जुड़ चुकी है। कंपनी में फिलहाल 55 कर्मचारी हैं। इसमें फॉर्मासिस्ट, आईटी इंजीनियर और मार्केटिंग प्रोफेशनल्स शामिल हैं।
- वहीं कंपनी द्वारा फिलहाल डायबिटिक और हायपरटेंशन की दवाएं ही मुख्य तौर पर सप्लाई की जाती हैं लेकिन कंपनी जल्द ही कैंसर की दवाओं को भी मार्केट प्राइज से सस्ती कीमत में उपलब्ध कराएगी।
- ऑनलाइन फार्मेसी की तुलना में जेनेरिक आधार अपनी दवाएं बाजार मूल्य से काफी सस्ती कीमतों पर बेचती है।
वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनभोगियों को मदद पहुंचाना
देशपांडे की मानें तो उनका कहना है कि हमारा मिशन वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनभोगियों को वह सेवा देना है, जिसके वो हकदार है, इसके पीछे आइडिया ये है कि उन तक वो सस्ती दवाइयां पहुंचाई जाएं, जिसकी उन्हें रोजाना जरूरत है। जेनरिक आधार की खासियत ये है कि वह सीधे विश्व स्वास्थ्य संगठन-जीएमपी प्रमाणित फैक्ट्रियों से ही दवाइयां खरीदता जिससे उसकी गुणवत्ता पर भी कोई सवाल नहीं हो सकता। एक सर्वे से पता चला है कि 60 फीसदी भारतीय इसलिए पूरी दवा नहीं ले पाते हैं, क्योंकि बाजार में उसकी कीमत बहुत ही ज्यादा होती है। जेनरिक आधार का लक्ष्य 1000 फार्मेसियों के साथ फ्रेंचाइजी-बेस्ड मॉडल पर पार्टनरशिप करना है और अपना बाजार गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, नई दिल्ली, गोवा, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में बढ़ाना है। बता दें कि अर्जुन देशपांडे ने अपने स्टार्टअप की शुरुआत दो साल पहले ही की थी, उस वक्त वे सिर्फ 16 साल के थे। जेनरिक आधार के बिजनेस मॉडल में 16 से 20 फीसदी का मार्जिन बचता है, जिसका लाभ आगे उपभोक्ताओं को मिल पाता है।
कई और स्टार्टअप से जुड़ चुके हैं रतन टाटा
जानकारी के मुताबिक रतन टाटा ने देशपांडे का प्रस्ताव कुछ महीने पहले ही सुना था। रतन टाटा ने इस कंपनी में निजी तौर पर निवेश किया है। ये टाटा ग्रुप से जुड़ा नहीं है। उन्हें उनके बिजनेस मॉडल में दिलचस्पी थी और गुरुवार को देशपांडे के लिए वह सपना साकार हो गया। रतना टाटा ने इसमें निजी हैसियत से निवेश किया है और वो इससे पहले भी ओला, पेटीएम, स्नैपडील, लेंसकार्ट जैसे स्टार्टअप में सहयोग कर चुके हैं। जानकारी के मुताबिक जेनरिक आधार स्टार्टअप जब शुरू हुआ था तो उसमें सिर्फ 15 लाख रुपये का निवेश हुआ था, लेकिन आज उसके साथ रतन टाटा जैसे उद्योगपति जुड़ चुके हैं।


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