नई दिल्ली, मार्च 22। एक सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) खाता अपने या किसी नाबालिग बच्चे के नाम पर खोला जा सकता है। ऐसे दोनों खातों में (या अगर एक खाता हो तो उसमें) कुल योगदान एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये हो सकता है। पीपीएफ नियमों के अनुसार इस खाते की मैच्योरिटी अवधि 15 साल होती है। यानी पीपीएफ खाता 15 साल बाद मैच्योर होता है और आपको निवेश और ब्याज का पैसा बतौर मैच्योरिटी दे दिया जाएगा। मगर पीपीएफ खाते की मैच्योरिटी पर आपको कुल 3 विकल्प मिलेंगे। आपको जो बेहतर लगे आप उस ऑप्शन को चुन सकते हैं। आगे जानिए तीनों ऑप्शनों की डिटेल।
आसान तरीके से बंद करें खाता
सिम्पल तरीका यह है कि आप आराम से अपना खाता बंद कर सकते हैं। यानी मैच्योरिटी पर सारा पैसा ले लें। इसके लिए मैच्योरिटी के पैसे को अपने बचत खाते में ट्रांसफर करना होगा। इसके लिए बैंक या पोस्ट ऑफिस में फॉर्म सबमिट करें, जिसमें पीपीएफ और सेविंग्स अकाउंट है। ध्यान रहे कि आपको फॉर्म के अलावा असली पासबुक और रद्द किया हुआ चेक भी जमा करना होगा।
जारी रखें निवेश
इस ऑप्शन में आप निवेश जारी रख सकते हैं और पीपीएफ की खाते मैच्योरिटी अवधि को आगे बढ़ा सकते हैं। ये विकल्प तब बेहतर है, जब आपको तुरंत पैसों की जरूरत न हो। पीपीएफ में निवेश करना जारी रख कर आप आगे भी टैक्स बचा सकेंगे। मैच्योरिटी से एक वर्ष पहले आपको पोस्ट ऑफिस या बैंक में इसके लिए आवेदन करना होगा। फिर आपके पीपीएफ खाते की मैच्योरिटी राशि पांच साल के लिए बढ़ा दी जाएगी।
ये है तीसरा ऑप्शन
ये एक ऐसा विकल्प है जो अपने आप लागू हो जाता है। यानी ये एक डिफ़ॉल्ट ऑप्शन है। अगर आप बैंक या पोस्ट ऑफिस को खाता बंद करने या उसकी मैच्योरिटी अवधि को आगे बढ़ाने के लिए नहीं कहते हैं तो वो मैच्योरिटी पर अपने आप यही नियम लागू कर देगा। ये नियम है बिना नये निवेश के पीपीएफ खाते की अवधि आगे बढ़ाना। आपको बैलेंस पर ब्याज मिलता रहेगा।
जानिए एक और जरूरी नियम
यदि आपने एक से अधिक पीपीएफ खाते खोले हैं, तो उन्हें मर्ज करने की आवश्यकता है। पीपीएफ विलय के नियमों के अनुसार, ऐसा कोई भी विलय पीपीएफ खाता खोलने की तारीख के हिसाब से होगा। यदि कोई एक या सभी पीपीएफ खाते 12 दिसंबर, 2019 को या उसके बाद खोले गए हैं, तो उन्हें बिना किसी ब्याज राशि के बंद करना होगा और खातों के विलय की अनुमति नहीं दी जाएगी।
दिसंबर 2019 से पहले
यदि पीपीएफ खाते 12 दिसंबर, 2019 से पहले खोले गए हैं तो उनका विलय किया जा सकता है यदि दोनों खातों में जमा राशि निर्धारित जमा सीमा (1.5 लाख रु) के भीतर हो। इस स्थिति में विलय के लिए, खाताधारक को अपनी पसंद के खाते को बनाए रखने का विकल्प दिया जाएगा। जहां एक साथ दोनों खातों में योगदान की गई कुल राशि 1.5 लाख रुपये की अनिवार्य सीमा से अधिक है, तो इस सीमा का उल्लंघन करने वाली अतिरिक्त राशि ग्राहक को बिना किसी ब्याज के विलय करने के लिए खाते से वापस कर दी जाती है।
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