PPF : मैच्योर होने पर आपके सामने होते हैं 3 ऑप्शन, जानिए किसमें है फायदा

नयी दिल्ली। रिटायरमेंट के लिए पैसा जमा करने पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) भारत में सबसे पसंदीदा ऑप्शंस में से एक है। ये ऐसा ऑप्शन है, जहां टैक्स बेनेफिट भी मिलता है। किसी भी वित्त वर्ष में पीपीएफ में 1.5 लाख रु तक का निवेश धारा 80 सी के तहत टैक्स कटौती के लिए पात्र होता है। साथ आपको इस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि भी टैक्स फ्री होती है। इस तरह ये एक ऐसा निवेश ऑप्शन है जिसे ईईई (छूट-छूट-छूट) का दर्जा प्राप्त है। इसके अलावा पीपीएफ पर रिटर्न की गारंटी और जोखिम भी नहीं है। मगर पीपीएफ की मैच्योरिटी अवधि 15 साल होती है। मैच्योरिटी पर आपके सामने 3 ऑप्शन होंगे। यहां हम उन तीनों ऑप्शंस के बारे में बताएंगे।

क्या होते हैं 3 ऑप्शन

क्या होते हैं 3 ऑप्शन

पीपीएफ की मैच्योरिटी पर आपके सामने जो 3 ऑप्शन होते हैं उनमें पहला है पैसा निकाल कर खाता बंद करा देना। दूसरा ऑप्शन है ताजा योगदान के बिना पीपीएफ अकाउंट का विस्तार। आखिर में तीसरा ऑप्शन होता है ताजा योगदान के साथ पीपीएफ खाते का विस्तार। पहला ऑप्शन बेहद आसान और सरल है। 15 वर्ष पूरे होने पर पीपीएफ खाताधारक जमा राशि और अर्जित ब्याज स्वतंत्र रूप से (फॉर्म सी जमा करके) निकाल सकता है और खाता बंद करा सकता है। मगर बाकी 2 ऑप्शन क्या हैं। आइए जानते हैं।

नए योगदान के बिना पीपीएफ अकाउंट का विस्तार

नए योगदान के बिना पीपीएफ अकाउंट का विस्तार

पीपीएफ खाते की लॉक-इन अवधि 15 साल है लेकिन बहुत से लोग इस बात से अनजान हैं कि मैच्योर अवधि के बाद आप इसे 5-5 साल करके बढ़ा सकते हैं। इसके लिए आप चाहें तो नया योगदान करें या न चाहें तो न करें। यदि आप किसी नए योगदान के बिना मैच्योरिटी के बाद अपने पीपीएफ खाते को बनाए रखना चाहते हैं तो आपको कोई भी फॉर्म जमा करके डाकघर या बैंक को सूचित करने की आवश्यकता नहीं है। जब तक आप इसे बंद नहीं करेंगे तब तक खाते पर ब्याज मिलता रहेगा।

नए योगदान के साथ पीपीएफ खाते का विस्तार

नए योगदान के साथ पीपीएफ खाते का विस्तार

इस मामले में खाताधारक को डाकघर या बैंक को सूचित करना होता है और इसके लिए फॉर्म एच जमा करना होगा। यदि खाताधारक फॉर्म एच जमा न करे तो पीपीएफ खाते को अनियमित माना जाएगा और आपके नए योगदान पर कोई ब्याज नहीं दिया जाएगा। यदि फॉर्म जमा न किया गया और ऐसे ही योगदान किया गया है तो खाताधारक को धारा 80 सी (आयकर अधिनियम की) के तहत कोई टैक्स लाभ भी नहीं मिलेगा।

क्या है आपके लिए फायदेमंद

क्या है आपके लिए फायदेमंद

यदि आपका रिटायरमेंट दूर है तो आप पीपीएफ खाते को नए योगदान के साथ जारी रखने का विकल्प चुन सकते हैं। इससे आपको टैक्स बेनेफिट मिलता रहेगा और आपके रिटायरमेंट फंड में बढ़ोतरी जा रहेगी। दूसरी बात आपको लंबे समय तक ब्याज पर ब्याज मिलता रहेगा, जो आखिर में एक बड़ी राशि में बदल जाएगा। फॉर्म एच जमा करके पांच साल के लिए खाते का विस्तार करना बेहतर है। वैसे पीपीएफ खाते को एक्टिव रखने के लिए हर साल सिर्फ 500 रुपये का न्यूनतम योगदान करना पड़ता है। साथ ही आपका 40% पैसा ही अगले पांच साल तक लॉक-इन रहता है। बाकी पैसा आप निकाल सकते हैं।

ऐसे बनिए करोड़पति

ऐसे बनिए करोड़पति

बहुत कम लोग जानते हैं कि पीपीएफ आपको करोड़पति भी बना सकता है। 7.1 फीसदी की मौजूदा पीपीएफ ब्याज दर को पूरी अवधि के लिए माना जाए तो 12,500 रुपये प्रति महीने के निवेश से पीपीएफ खाते में 15 वर्षों बाद 40,68,209 रु मैच्योरिटी राशि होगी। मगर यदि लंबे समय तक पैसा जमा किया जाए और पीपीएफ खाते में निवेश जारी रखा जाए तो 15 वर्षों में आपने जो पैसा जमा किया उस पर ब्याज सहित आपकी पीपीएफ मैच्योरिटी राशि 30 वर्षों बाद 1,54,50,911 रुपये या 1.54 करोड़ रुपये होगी।

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