नयी दिल्ली। जो लोग नौकरी करते हैं उनके पास रिटायरमेंट के लिए बचत करने का एक शानदार ऑप्शन होता है। ये ऑप्शन है ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि)। ये पैसा आपकी बेसिक सैलेरी में से कटता है। जितना योगदान आपकी सैलेरी में से पीएफ फंड में जाता है उतना ही पैसा आपकी कंपनी भी आपके ईपीएफ खाते में डालती है। ये पैसा हर महीने जमा होता रहता है, जिस पर ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) ब्याज देता है। इस तरह रिटायरमेंट तक आप अच्छा खासा पैसा जमा कर सकते हैं। वैसे अब ईपीएफ में से जरूरत के समय पैसा निकालना आसान हो गया है। मगर बेहतर यही है कि इस पैसे को आप भूल जाएं और रिटायरमेंट के बाद के लिए ही बचा कर रखें। मगर ईपीएफ का एक और बेनेफिट है, जिसके बारे में अधिकतर लोग नहीं जानते। इस बेनेफिट में 7 लाख रु मिलते हैं। आइए जानते हैं पूरी डिटेल।
फ्री मिलता है 7 लाख रु का बीमा
बहुत कम लोग जानते हैं कि ईपीएफ खाताधारकों को 7 लाख रु का फ्री इंश्योरेंस मिलता है। यह लाइफ इंश्योरेंस की तरह है, जिसमें यदि खाताधारक की मृत्यु हो जाए तो उसके परिवार को 7 लाख रु की राशि दी जाती है। बता दें कि पहले यह बीमा राशि 6 लाख रु तक थी, मगर अब इसे बढ़ा कर 7 लाख रु कर दिया गया है। यदि किसी भी ईपीएफ खाताधारक की नौकरी अवधि में मौत हो जाए तो उसके नॉमिनी को 7 लाख रु तक मिलेंगे। ये पैसा एक बार में ही दिया जाता है।
कम भी हो सकती है बीमा राशि
हालांकि सभी को 7 लाख रु नहीं दिए जाते। इसकी अलग-अलग तरीके से कैल्कुलेशन की जाती है। कर्मचारी डिपोजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम के तहत ईपीएफ खाताधारकों को फ्री बीमा दिया जाता है। बीमा का पैसा कर्मचारी की नौकरी की अवधि दौरान मृत्यु पर दिया जाता है। इस पैसे के परिवार को आर्थिक मदद मिलती है। ध्यान रहे कि ये रकम केवल कर्मचारी के एक्टिव (नौकरी करते हुए) रहते हुए ही मिलती है।
ऐसे होती है कैल्कुलेशन
बीमा स्कीम के तहत ईपीएफ खाताधारक के नॉमिनी को पिछले 12 महीनों में मिली मासिक सैलेरी के 30 गुना पैसे मिलते हैं। मगर ये अधिकतम 7 लाख रु होते हैं। परिवार को यह पैसा दुर्घटना या सामान्य मृत्यु के मामले में भी मिलता है। मगर इसके लिए नॉमिनी को कई दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं। दस्तावेज जमा करने के बाद ही क्लेम का पैसा मिलता है।
ये है जरूरी बातें
क्लेम के लिए नॉमिनी के आवेदन को एम्प्लोयर की तरफ से वेरिफाई होना जरूरी है। एम्प्लोयर यदि क्लेम वेरिफाई न कर पाए तो गैजेटेड ऑफिसर, मजिस्ट्रेट, ग्राम पंचायत अध्यक्ष, नगरपालिका या जिला स्थानीय बोर्ड के अध्यक्ष / सचिव / सदस्य, सांसद या विधायक उसे वेरिफाई कर सकते हैं।
फंस गया ब्याज का पैसा
सॉफ्टवेयर की दिक्कत के कारण 50 लाख लोगों को ईपीएफ पर ब्याज का पैसा नहीं मिला है। तकनीकी दिक्कत के चलते इन लोगों के खातों में ब्याज का पैसा नहीं पहुंच सका है। कहा जा रहा है कि ऐसे लोगों को आगामी 15-20 दिनों में ईपीएफ ब्याज का पैसा दे दिया जाएगा। असल में यदि किसी कंपनी के एक व्यक्ति के ईपीएफ खाते में कोई गड़बड़ी है तो इसके चलते कंपनी के सभी लोगों के खातों में ब्याज का पैसा क्रेडिट नहीं हो रहा है।


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