नई दिल्ली। कोरोना के कहर से तेल बाजार पस्त हो चुका है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बुधवार को कच्चे तेल का भाव 18 साल के निचले स्तर पर आ गया जबकि भारतीय वायदा बाजार में कच्चे तेल का भाव 1,672 रुपये प्रति बैरल यानी 10.51 रुपये प्रति लीटर तक टूटा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर रात 10.03 बजे कच्चे तेल के मार्च अनुबंध में पिछले सत्र से 400 रुपये यानी 190.9 फीसदी की गिरावट के साथ 1,695 रुपये प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था जबकि इससे पहले भाव 1,672 रुपये प्रति बैरल तक गिरा। एक बैरल में 159 लीटर कच्चा तेल होता है। इस प्रकार एक लीटर कच्चे तेल का दाम में देश में 10.51 रुपये होगा।
जानकारों की राय
बाजार के जानकारों ने बताया कि कोरोनावायरस के प्रकोप से कच्चे तेल की मांग घटने और तेल बाजार की हिस्सेदारी को लेकर छिड़ी कीमत जंग के कारण कच्चे तेल के दाम में गिरावट आई है।
2003 के बाद सबसे निचला स्तर
इंटरकांटिनेंल एक्सचेंज (आईसीई) पर ब्रेंट क्रूड के मई अनुबंध में पिछले सत्र से 3.21 डॉलर यानी 11.17 फीसदी की गिरावट के साथ 25.52 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ था जबकि इससे पहले ब्रेंट का भाव 25.33 डॉलर प्रति बैरल तक गिरा जो 2003 के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं, न्यूयार्क मर्केटाइल एक्सचेंज (नायमैक्स) पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का भाव 4.47 डॉलर यानी 16.36 फीसदी की गिरावट के साथ 22.86 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ था जबकि इससे पर डब्ल्यूटीआई का भाव 22.59 डॉलर प्रति बैरल तक गिरा।
अभी और घटेगी मांग
गोल्डमैन सैक्स ने अनुमान लगाया है कि तेजी से फैलते कोरोनावायरस के कारण तेल की मांग में भारी गिरावट आ सकती है। गोल्डमैन सैक्स ने कहा है कि दूसरी तिमाही में ब्रेंट क्रूड की कीमत में 20 डॉलर तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जो 2002 की शुरुआत के बाद सबसे कम होगा। बैंक के अनुसार मार्च के अंत तक तेल की मांग में प्रति दिन 8 मिलियन बैरल (बीपीडी) की गिरावट की संभावना है।
सऊदी अरब और रूस का प्राइस वॉर
तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के पीछे एक और बड़ा कारण सऊदी अरब और रूस के बीच प्राइस वॉर। मगर रूस ने बुधवार को कहा कि वे तेल की कीमत मौजूदा स्तरों से अधिक देखना चाहेगा। लेकिन सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि उसने राष्ट्रीय तेल कंपनी अरामको को आने वाले महीनों में रिकॉर्ड 12.3 मिलियन बीपीडी कच्चे तेल की आपूर्ति जारी रखने का निर्देश दिया है। सऊदी अरब और रूस के बीच शुरू हुए प्राइस वॉर के कारण हाल ही में कच्चे तेल की कीमतों में 1991 के बाद एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गयी थी।
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