नई दिल्ली, अक्टूबर 31। जब भी शेयर बाजार में तेजी के कारण निवेश पर अच्छा रिटर्न मिलता है, तो निवेशक सोचने लगते हैं कि क्या अब उन्हें प्रोफिट बुकिंग (मुनाफा निकालना) शुरू कर देना चाहिए और बाजार से बाहर निकल जाना चाहिए? ऐसे उदाहरण देखे गए हैं, जब कुछ निवेशक नुकसान को कम करने के लिए बाजार में गिरावट होने पर म्यूचुअल फंड को रिमीड कर लेते हैं। मगर म्यूचुअल फंड निवेशकों के सामने सवाल यह रहता है कि निवेश को कब पैसा निकालना चाहिए? इसका सही समय क्या है? यहां हम आपको उन चीजों के बारे में बताएंगे, जिन पर आपको म्यूचुअल फंड से पैसा निकालने से पहले विचार करना चाहिए।
कारण क्या है
देखा जाए तो निवेश किसी लक्ष्य के लिए होता है। अगर आपका वित्तीय लक्ष्य (रिटायरमेंट, बच्चों की उच्च शिक्षा, विदेश यात्रा आदि) जैसा कुछ है और वो लक्ष्य पूरा हो जाए तो आप म्यूचुअल फंड से निकल सकते हैं। आपका फोकस तय किए गए निवेश लक्ष्य पर होना चाहिए। आपको म्यूचुअल फंड में पैसा वित्तीय लक्ष्यों के पूरा होने तक रखना चाहिए।
बाजार को समय दें या नहीं
जब स्टॉक और कमोडिटी बाजार अत्यधिक अस्थिर होते हैं तो कभी-कभी निवेशक पैसा निकालने को मजबूर हो जाते हैं। निवेशक के रूप में, आपको तब मुनाफा बुक करना चाहिए जब बाजार चढ़ रहा हो और स्टॉक की कीमतों में गिरावट आने पर अधिक निवेश करना चाहिए। ऐसे में बाजार को समय देना तो जरूरी है, मगर इस रणनीति को जरूर ध्यान में रखें।
एक को छोड़ कर दूसरे फंड में लगाएं या नहीं
निवेश 'करें और इसे भूल जाएं' जैसी नहीं हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेश में लंबी अवधि के लिए निवेश किया जाना चाहिए, मगर फिर भी आपको किसी वित्तीय सलाहकार की मदद से नियमित रूप से फंड के प्रदर्शन की समीक्षा करनी होगी। सलाहकार की सिफारिश के आधार पर, आप किसी बेकार या कमजोर फंड से बाहर निकल सकते हैं और उद्देश्य को पूरा करने वाले अन्य फंड्स में जा सकते हैं।
वित्तीय लक्ष्य तक पहुंचने में कितना समय है
इक्विटी निवेश को हमेशा जोखिम भरा माना जाता है। आम तौर पर निवेशक इस बात से चिंतित रहते हैं कि वित्तीय लक्ष्य के लिए बने इक्विटी फंडों से पैसा निकालने से ठीक पहले शेयर बाजार में गिरावट आ सकती है। ऐसी परिस्थिति में एक निवेशक चरणबद्ध तरीके से इक्विटी निवेश से बाहर निकलने पर विचार कर सकता है और डेब्ट फंड्स में प्रवेश कर सकता है, जिन्हें अपेक्षाकृत कम जोखिम भरा माना जाता है।
क्या है निष्कर्ष
अंत में ये कह सकते हैं कि आदर्श रूप से किसी को पैसा निकालने पर तभी विचार करना चाहिए जब वित्तीय लक्ष्य प्राप्त हो जाएं। कोर पोर्टफोलियो में निवेश किए गए फंड को वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने तक रखना जरूरी है। मगर प्रदर्शन का आकलन करने के लिए नियमित समीक्षा की जाती है और कमजोर प्रदर्शन पर फंड से निकल जाएं। वहीं यदि कोई निवेशक बाजार की बदलती चाल का लाभ उठाना चाहता है, तो बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप फंड के प्रकार को बदलने के लिए सैटेलाइट पोर्टफोलियो का इस्तेमाल करे।
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