SIP Investment: मार्केट में पैसे जितने जल्दी बढ़ते हैं उतना ही अधिक जोखिम भी इसमें होता है। आजकल ज्यादातर लोग म्यूचुअल फंड में भी निवेश करते हैं।
म्यूचुअल फंड के एसआईपी में निवेश करने पर तगड़ा रिटर्न मिलता है, लेकिन अक्सर लोग बिना सोचे समझे SIP में निवेश कर देते हैं और बाद में उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
अगर आप SIP में निवेश करने जा रहे हैं तो आपको इससे जुड़े हुए रिस्क फैक्टर्स के बारे में पता होना चाहिए। चलिए एसआईपी से जुड़े हुए रिस्क फैक्टर्स आपको बताते हैं।

1.सही फंड को चुनना है जरूरी
अगर आप एसआईपी में निवेश करने जा रहे हैं तो आपको सही फंड में इंवेस्टमेंट करना चाहिए। लार्जकैप या ब्लूचिप फंड्स में पैसा लगाने पर जोखिम कम हो सकता है, लेकिन बेहतर रिटर्न की संभावना के साथ स्मॉलकैप फंड्स में पैसे लगा रहे हैं तो ध्यान रहे कि मार्केट की गिरावट में इसमें नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।
2. जोखिम पूरी तरह नहीं होता है खत्म
मार्केट में अनिश्चितता की स्थिति में भी म्यूचुअल फंड में जोखिम कम माना जाता है और इसके पीछे का कारण है है कि म्यूचुअल फंड का पैसा फंड मैनेजर के अनुभव के आधार पर पैसों का निवेश किया जाता है।
इस निवेश पर बेहतर रिटर्न के चांसेस हो जाते हैं। सीधे स्टॉक में निवेश करने के मुकाबले रिस्क काफी कम हो जाता है, लेकिन ये जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता।
एसआईपी को भले ही कम रकम के साथ शुरू करें, लेकिन अगर आप इसे लंबे समय तक अनुशासन के साथ जारी रखते हैं तो काफी तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं।
बेहतर तरह से निवेश करने के लिए आप कम रकम से एसआईपी को शुरू कर सकते हैं और उसमें हर साल थोड़ा पैसा बढ़ाते सकते हैं।
अगर आप लंबे समय के लिए SIP शुरू कर रहे हैं, तो बहुत ज्यादा बड़े अमाउंट के साथ इसे शुरू न करें क्योंकि अक्सर लोग बड़े अमाउंट को लगातार जारी नहीं रख पाते हैं।
3. कई तरह की स्कीम में कर सकते हैं निवेश
आप कई तरह की म्यूचुअल फंड्स में निवेश कर सकते हैं। आपको यह देखना होगा कि किसमें आपको अच्छा मुनाफा मिलेगा। जिस स्कीम में आप निवेश करने जा रहे हैं और वो स्कीम पहले से काफी अच्छे रिटर्न दे रही हो तो उस पर तेजी से बढ़ रही महंगाई का खास असर नहीं होगा और आप फायदे में भी रहेंगे।
वहीं, जिस स्कीम में आपने निवेश किया है अगर उसमें रिटर्न कम है तो महंगाई की वजह से उनका वास्तविक मूल्य कम हो जाता है। इसलिए हमेशा अलग-अलग जोखिम और रिटर्न के आधार पर अलग अलग स्कीम में निवेश करना चाहिए।
4. बेस्ट म्यूचुअल फंड में निवेश
डेट म्यूचुअल फंड की बात करें तो इसमें ब्याज दरों में बदलाव का भी जोखिम होता है। अक्सर डेट फंड तब बेहतर प्रदर्शन करते हैं जब ब्याज दरें गिरती हैं। बेस्ट म्यूचुअल फंड को चुनने के लिए आपको एक लिस्ट बनानी चाहिए और उनकी तुलना करना चाहिए।
हिस्ट्री, एक्सपेंस रेश्यो, फंड मैनेजर हिस्ट्री आदि की तुलना भी करें और अपनी जरूरत के हिसाब से बेस्ट SIP का चुनाव करें। इसके अलावा फाइनेंशियल एक्सपर्ट से बात करें और उनके सुझाव के साथ सही एसआईपी को चुनें।
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