नई दिल्ली, दिसंबर 19। एसआईपी अब म्यूचुअल फंड निवेश का पर्यायवाची बन गया है हैं। इस बात को बहुत अधिक लोग मानते हैं कि सिर्फ एसआईपी ही म्यूचुअल फंड में निवेश करने का सही तरीका है। ये बात कम ही लोग जानते होंगे कि यही म्यूचुअल फंड में निवेश का एकमात्र तरीका नहीं है। क्योंकि आप चाहें तो कई अन्य तरीकों से भी म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। म्युचुअल फंड अब कई तरह के निवेश ऑप्शनों की सुविधा देते हैं। इनमें अलग अलग एसेट क्लास, टैक्स बेनेफिट और रिटर्न भी भिन्न होते हैं। आम तौर पर आप म्यूचुअल फंड में एक साथ या एसआईपी के माध्यम से निवेश कर सकते हैं। हालांकि एसआईपी हर म्यूचुअल फंड निवेश के लिए सही हो ऐसा भी जरूरी नहीं क्योंकि कुछ ऐसी स्थितियां भी हैं जब एसआईपी के माध्यम से निवेश फायदेमंद साबित नहीं हो सकता है। वहीं कुछ चीजें ऐसी हैं जिनका ध्यान न रखने पर आप एसआईपी के जरिए निवेश करने पर उलटा नुकसान उठा सकते हैं। यदि आप नये साल 2022 में एसआईपी के जरिए निवेश करने की शुरुआत करने जा रहे हैं तो आगे बताई जाने वाली गलतियों से जरूर बचें।
फाइनेंशियल टार्गेट हो क्लियर
अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश करने की शुरुआत करने जा रहे हैं तो पहले ये देखें कि वित्तीय लक्ष्य यानी फाइनेंशियल टार्गेट क्या हैं। यानी आप क्यों म्यूचुअल फंड में एसआईपी की शुरुआत करने जा रहे हैं। क्योंकि अगर आपने ऐसा न किया तो आप जल्दबाजी में कोई गलत फंड चुन सकते हैं। जबकि आपको फंड ऐसा चुनना है जो आपके टार्गेट को पूरा करने में मददगार हो।
ग्रोथ प्लान चुनें
हमेशा ग्रोथ प्लान के बजाय डिविडेंड प्लान को चुनना ठीक नहीं है। ग्रोथ प्लान चुनें क्योंकि यहां अधिक रिटर्न मिल सकता है। दरअसल निवेशक सोचते हैं कि म्यूचुअल फंड डिविडेंड की घोषणा पर उन्हें मोटा मुनाफा मिलेगा। मगर क्या आप जानते हैं कि म्यूचुअल फंड असेट्स अंडर मैनेजमेंट से ही डिविडेंड देते हैं। इससे होता यह है कि फंड की एनएवी घट जाती है और डिविडेंड फंड की फेस वल्यू पर निकाला जाता, एनएवी पर नहीं। आप ग्रोथ प्लान में टैक्स छूट का ज्यादा फायदा ले सकते हैं।
बाजार नीचे आए तो निवेश जारी रखें
जब बाजार गिरता है तो निवेशक घबरा जाते हैं और या तो एसआईपी रोक देते हैं या बाहर निकल जाते हैं। मगर ये सबसे बड़ी गलती है। बाजार गिरने पर तो मौका होता है महंगी चीज को सस्ते दामों पर खरीदने का। बस आपको बाजार की चाल पर ध्यान देनी। गिरने पर खरीदारी बढ़ा दें।
पोर्टफोलियो में कम बदलाव करें
न तो किसी दूसरे को देख कर फंड में बदलाव करें और न ही खरीदारी करें। बल्कि रिसर्च बेस पर फंड चुनें। एक बार पोर्टफोलियो बन जाए तो उस पर नजर रखें मगर जल्दी जल्दी बदलाव न करें। इससे आपको फायदा नहीं होगा।
रिटर्न कैसा हो
अहम बात यह है कि जब एसआईपी शुरू करने के लिए फंड चुनें तो सिर्फ 1-2 साल का रिटर्न न देखें, बल्कि लंबे समय का रिटर्न देखें। क्योंकि उसी से किसी फंड के बारे में सही अंदाजा लगा सकते हैं।


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