नई दिल्ली, मई 11। क्या आप खेती करते हैं? अगर करते हैं तो बहुत अच्छी बात है और नहीं करते तो भी कोई बात नहीं। दरअसल हम आपको यहां बताएंगे कि कैसे आप मेंथा उगा कर उससे मालामाल हो सकते हैं। अब अगर आप पहले से खेती करते हैं तो आपके लिए मेंथा की खेती कोई बड़ी बात नहीं होगी। मगर यदि आप पहले से खेती नहीं करते तो बता दें कि भारत में ऐसे बहुत से शिक्षित लोग भी हैं, जिन्होंने खेती में एक्सपेरीमेंट करके मोटी कमाई की है। आप भी जानकारी लेकर ऐसे ही लोगों की लिस्ट में शामिल हो सकते हैं। आइए जानते हैं मेंथा की खेती की पूरी डिटेल।
ये हैं मेंथी की विशेषताएं
मेंथा एक औषधीय पौधा है। इसकी खेती में लागत बहुत कम आएगी। इसकी फसल सिर्फ 100 दिन में तैयार हो जाएगी। इससे होगा यह कि आपके पास मुनाफा बहुत जल्द आ जाएगा। आप नयी खेती की तैयारी कर सकते हैं। या फिर दोबारा मेंथा उगा सकते हैं। मेंथा आपको बहुत जल्द मालामाल बना सकता है। इसके तेल की कीमत 1000 रु प्रति लीटर से भी अधिक होती है।
कैसे करें खेती
मेंथा की खेती दो तरीकों से की जाती है। इनमें या तो आप स्वतंत्र रूप से मेंथा की खेती करें या फिर किसी कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट आधार पर। जानकार मानते हैं कि इनमें स्वतंत्र रूप से खेती करना अधिक फायदेमंद है। आप करें ये कि मेंथा के पत्ते को नहीं बल्कि उसका तेल निकाल कर बेचें। इससे आपको ज्यादा मुनाफा होगा। जैसा कि हमने बताया मेंथा तेल की कीमत प्रति लीटर 1000 रु से अभी अधिक है। अगर कंपनियों से अच्छी कीमत मिले तो आप कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग भी कर सकते हैं।
कैसी मिट्टी की होती है जरूरत
अगर आपका इरादा मेंथा की खेती करने का है, तो जान लीजिए कि इसके लिए जमीन बढ़िया होनी चाहिए। दूसरे खेत में से पानी की निकासी का बेहतर इंतजाम होना चाहिए। एक्सपर्ट्स के अनुसार बलुई दोमट और चिकनी मिट्टी में मेंथा अच्छा उगता है। आप रोपाई से पहले मिट्टी की जांच जरूर कराएँ। इसके लिए मिट्टी का पीएच 6.5-7 होना चाहिए। अगर आपके खेत की मिट्टी हल्की ढीली या भारी है वहां मेंथा न उगाएँ।
समय पर करें कटाई
मेंथा की कटाई समय पर जरूरी है। अगर आपने जल्दी कटाई की तो उसमें मेंन्थॉल की मात्रा कम हो जाएगी। वहीं देर से कटाई की जाए तो उसकी पत्तियों से कम तेल निकलेगा। मेंथा की पहली कटाई आप अधिकतम 120 दिन बाद करें। इसके बाद दूसरी कटाई के लिए 60-70 दिन का समय ठीक माना जाता है।
कहां होता है इस्तेमाल
मेंथा एक यूरोपीय पौधा है। पर बीते सालों में भारत में इसकी पैदावार बड़े पैमाने पर होती है। इसकी मांग पूरी दुनिया में बहुत अधिक है। मांग बढ़ने से किसानों के लिए मेंथा एक फायदे का सौदा बन गया है। मेंथा का इस्तेमाल ठंडी चीजों में होता है। पिपरमिंट, दर्द-निरोधी दवा और मलहम आदि तैयार करने में मेंथा का इस्तेमाल होता है। आयुर्वेदिक दवाइयों में भी मेंथा का भरपूर इस्तेमाल होता है।
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