नई दिल्ली, सितंबर 16। आप चाहे सिंगल हों, जॉइंट फैमिली में रहते हों या फिर ऐसा शादीशुदा कपल जो अकेले रहता है, आपको फाइनेंशियल प्लानिंग की जरूरत पड़ेगी ही। एक कपल के लिए फाइनेंशियल टार्गेट बनाना भी बहुत जरूरी है। बिना टार्गेट फाइनेंशियल प्लानिंग के आपको बच्चों के फ्यूचर (जिसमें उनकी शिक्षा और शादी शामिल) के खर्चों को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। अपने जीवन के लिए भी फाइनेंशियल प्लानिंग बहुत जरूरी है। खर्चे, निवेश, बीमा और इमरजेंसी फंड सभी पर ध्यान देना जरूरी है। यहां हम शादीशुदा कपल के लिए बेस्ट फाइनेंशियल टिप्स लेकर आए हैं, जो जीवन भर उनके काम आएंगे।
बिना बजट के प्लानिंग नामुमकिन
बिना बजट के प्लानिंग नामुमकिन है। चाहे आप अविवाहित हों, जल्द ही-विवाहित होने वाले हैं या फिर शादीशुदा हैं मासिक बजट तय करना आपकी फाइनेंशियल लाइफ के लिए जरूरी है। दोनों कमाने वाले विवाहित कपल के लिए यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। आपको यह देखना होता है कि हर महीने इनकम कितनी है और आप इस पैसे का उपयोग कैसे करने जा रहे हैं। बजट में मासिक खर्च, निवेश, इमरजेंसी बचत और बीमा प्रीमियम आदि शामिल हो सकते हैं।
नेट इनकम और जरूरी खर्चे
वित्तीय लक्ष्य तय करने के बाद, एक कपल के रूप में अपनी मासिक इनकम का हिसाब करें। यहां हिसाब में आपको किराया, टैक्स, लोन, क्रेडिट कार्ड बिल, के बाद बचत के लिए बची हुई राशि तय करने में मदद मिलेगी। दरअसल खर्चे भी दो तरह के होते हैं। एक वो जिन्हें आप टाल सकते हैं और दूसरे वो जिन्हें आप नहीं टाल सकते। जो खर्चे टाल सकते हैं उनके लिए अतिरिक्त बचत में से खर्च करें।
कैसे करें बचत
मासिक खर्चों का हिसाब लगाने के बाद वित्तीय लक्ष्यों के लिए आपको जो बचत करनी है, उसका हिसाब रखें। कुछ वित्तीय योजनाकार अनिवार्य खर्च के लिए अकाउंटिंग से पहले ही बचत की राशि अलग करने की सलाह देते हैं। मगर यह कपल अपनी वित्तीय स्थिति के आधार पर तय कर सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी के पास पहले से इमरजेंसी फंड नहीं है तो बचत और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
अलग-अलग रखें खाते
आपको इस चीज पर बहुत ध्यान देना है। यानी अपने बैंक खाते अलग-अलग रहें। आप ये भी कर सकते हैं खर्चे बांट लें। इससे आपको अकाउंटिंग और टैक्स में आसानी होगी। इनकम के आधार पर खर्चे बांट कर आपको काफी आसानी होगी। जॉइंट खाते से बचना इसलिए भी बेहतर है क्योंकि यह वित्तीय स्वतंत्रता की भावना प्रदान करता है।
जो जरूरी खर्चे
हमने ऊपर दो चीजों का जिक्र किया है, जिनमें इमरजेंसी फंड और बीमा प्रीमियम शामिल हैं। कोविड-19 महामारी कई परिवारों के लिए एक कठोर अनुभव लेकर आया। इसलिए आपके पास स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी होना जरूरी है। भारत में स्वास्थ्य देखभाल की लागत परिवारों के गरीबी रेखा से नीचे खिसकने का प्राथमिक कारण बन गयी है। नौकरी छूटने जैसे अप्रत्याशित झटकों को कम करने के लिए कम से कम 3 महीने का इमरजेंसी फंड रखें। तीन महीने के मासिक खर्च को बैंक खाते में सुरक्षित रूप से रखने से वित्तीय संकटों से बचा जा सकता है।
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