Budget 2024: बजट 2024 जल्द ही पेश होने वाला है. केंद्रीय वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमन 23 जुलाई को संसद में आम बजट पेश करने वाली है. इस बजट में सभी की निगाहें टिकी हुई है. आम जनता से लेकर किसानों तक, सभी को बजट 2024 से खास उम्मीदें है. बजट में अकसर कई ऐसे टर्म का इस्तेमाल होते हैं, जो आसानी से समझ नहीं आते. जैसे मैक्रो और माइक्रो इकोनॉमी. आइए आज इन दोनों टर्म को आसान भाषा में समझने का प्रयास करते हैं.

क्या है माइक्रो इकोनॉमी?
माइक्रो इकोनॉमी, इकोनॉमी के छोटे भागों पर ध्यान देता है. इनमें घर, व्यक्ति और कंपनियों से जुड़े अर्थव्यवस्था शामिल है. इसके अलावा प्राइस, प्रोडेक्ट या रिसोर्स की वजह से किसी वयक्ति या संस्थान के मांग और आपूर्ति मेें जो भी अतंर होता है, वो माइक्रो इकोनॉमी के अंतर्गत आता है. किसी व्यक्ति या संस्थान की मांग और आपूर्ति सरकार के निर्णयों पर भी निर्भर करती है. जैसे टैक्स पॉलिसी, फिस्कल पॉलिसी, इंटरेस्ट रेट और सब्सिडी में होने वाले बदलाव भी माइक्रो इकोनॉमी के अंतर्गत आते हैं.
क्या है मैक्रो इकोनॉमी?
मैक्रो इकोनॉमी, इकोनॉमी का वह भाग है, जो बड़े पैमाने पर पूरी अर्थव्यवस्था का अध्यनन करते हैं. इसमे किसी राष्ट्र, राज्य या क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नियंत्रण करने का काम किया जाता है. सरकार फिस्कल और मॉनेटरी पॉलिसी की मदद से अर्थव्यवस्था में पैसों की मांग और आपूर्ति को नियंत्रित करके रखते हैं.
इन दोनों पॉलिसी की मदद से सरकार बढ़ती और घटती महंगाई को नियंत्रित करके रखता है. वहीं रुपयों की मांग और आपूर्ति को भी नियंत्रित करता है.
मैक्रो और माइक्रो इकोनॉमी क्या है अंतर?
मैक्रो इकोनॉमी बड़े पैमाने पर इकोनॉमी का अध्यन्न करता है. वहीं माइक्रो इकोनॉमी की अंतर्गत अर्थव्यवस्था के छोटे भागों का अध्यन्न किया जाता है. इन दोनों इकोनॉमी में सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों का काफी प्रभाव पड़ता है. सरकार इन दोनों की इकोनॉमी को टैक्स पॉलिसी, फिस्कल पॉलिसी, इंटरेस्ट रेट और सब्सिडी, मॉनेटरी पॉलिसी की मदद से नियंत्रित करके रखती है. वहीं अगर बात करें बजट 2024 की तो इस में लिए गए निर्णयों का भी इन दोनों इकोनॉमी में प्रभाव पडे़गा


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