Impact of RBI Credit Policy: आरबीआई ने आज क्रेडिट पॉलिसी का ऐलान कर दिया है। इसमें रेपो रेट को बिना बदलाव के 6.50 फीसदी पर यथावत रखा गया है। सभी को लग रहा है कि जब कुछ बदला नहीं गया तो असर भी कुछ नहीं होगा। लेकिन यह सच नहीं है। आज पर्दे के पीछे काफी कुछ बदला गया है। आइये जानते हैं कि इसका कैसे असर पड़ेगा।
आज सुबह रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने क्रेडिट पॉलिसी पेश की। इसमें देश की आर्थिक स्थिति की काफी अच्छी तस्वीर पेश की गई। लेकिन वहीं कुछ ऐसा भी बताया गया, जो पहली नजर में नहीं दिख रहा है। अगर सब कुछ ठीक है तो जीडीपी का अनुमान क्यों नहीं बढ़ा। शायद इसका कारण बढ़ती महंगाई हो। क्योंकि आरबीआई ने खुद ही बताया है कि चालू वित्तीय वर्ष के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान 5.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.4 प्रतिशत किया गया है। यानी महंगाई काबू से बाहर है, हालांकि बेकाबू नहीं है।

जहां तक सब्जियों की महंगाई की बात है, तो आरबीआई ने बताया है कि इनके दाम जल्द ही कम हो जाएंगे। हालांकि यह नई बात नहीं है, क्योंकि सब्जियों की महंगाई की साइकिल एक से लेकर 2 माह तक की ही होती है। ऐसे में यह सभी को पता है, लेकिन आरबीआई ने बोला है, तो चर्चा ज्यादा हो रही है।
आरबीआई ने रेपो रेट नहीं बढ़ाया है, लेकिन इंक्रीमेंटल सीआरआर बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया है। यानी बैंक के कान उल्टे हाथ से पकड़े हैं। अभी तक बैंक अपनी कुल जमा का 4.5 फीसदी सीआरआर (कैश रिजर्व रेशियो) के रूप में रखते थे। इसके बाद उनको अब इसे धीरे धीरे बढ़ाकर 10 फीसदी तक ले जाना होगा। जानकारों का अनुमान है कि इससे बैंकों की करीब 1 लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी कम हो जाएगी।
बैंक इस 1 लाख करोड़ रुपये को लोन के रूप में नहीं बांट सकेंगे। वहीं इस पर ग्राहक ब्याज के रूप में पैसा पाएंगे। ऐसे में जो अभी लग रहा है कि लोन महंगा नहीं होगा, लेकिन अगर यह 10 फीसदी की स्थिति बनी रही तो देर सवेर लोन भी महंगा हो जाएगा।
यही कारण है कि आज रियल्टी सेक्टर ने शेयर बाजार में चिंता भी जता दी है। इस सेक्टर में गिरावट दर्ज हुई है। वहीं बैंकिंग सेक्टर भी परेशानी में नजर आए हैं।
ऐसे में कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अर्थव्यवस्था तमाम दिक्कतों के बाद भी बस आगे बढ़ रही है। आम आदमी ज्यादा रहत की उम्मीद फिलहाल न रखे, और निवेशक शेयर बाजार की तेजी का फायदा प्रॉफिट बुक करने के लिए करें तो ज्यादा अच्छा होगा।


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