अगर आप चेक और डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) का इस्तेमाल करते है तो आपके लिए ये जानना बेहद जरुरी है कि दोनों में अंतर क्या है।
नई दिल्ली: अगर आप चेक और डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) का इस्तेमाल करते है तो आपके लिए ये जानना बेहद जरुरी है कि दोनों में अंतर क्या है। कैशलेस ट्रांजेक्शन की बात होती है तो चेक और डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) का जिक्र जरूर होता है। चेक का इस्तेमाल तो बड़े पैमाने पर होता है लेकिन डीडी को लोग कुछ खास कामों के लिए ही ट्रांजेक्शन का माध्यम बनाते हैं। इस बात की जानकारी दें कि देखने में बैंक चेक व डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) भले ही कुछ हद तक समान दिखें लेकिन दोनों के इस्तेमाल और ट्रांजेक्शन के तरीके में थोड़ा अंतर है। इसके साथ ही इनमें से एक दूसरे से अधिक सिक्योर भी माना जाता है।

डीडी बनवाने के लिए बैंक में अकाउंट होना जरूरी नहीं
चेक की तरह डीडी का इस्तेमाल भी किसी बैंक अकाउंट में पैसे भेजने के लिए होता है। किसी भी बैंक में जाकर डिमांड ड्राफ्ट को बनवाया जा सकता है। इससे जुड़ी खास बात यह है कि डीडी बनवाने के लिए बैंक में अकाउंट होना जरूरी नहीं है। आप जिस व्यक्ति या कंपनी के नाम पर डीडी बनवा रहे हैं, पैसा सीधा उसी के अकाउंट में ट्रान्सफर होता है। डीडी बनवाने वाला या तो कैश देकर इसे बनवा सकता है या फिर अपने अकाउंट की मौजूदगी वाले बैंक से बनवाने पर अपने अकाउंट से पैसा कटवा सकता है।
जान लें चेक और डीडी में प्रमुख अंतर, फायदे में रहेंगे
- डीडी केवल अकाउंट में ही पे होता है। जिसके नाम पर यह बना है, वह इसे अपने अकाउंट से इनकैश करा सकता है।
- जबकि वहीं चेक को अकाउंट में पैसा जमा कराने के लिए या फिर बिना पैसा जमा कराए बीयरर द्वारा सीधे इनकैश कराए जाने के लिए जारी किया जा सकता है।
- सबसे बड़ी बात यह है कि बैंक खाते में अगर पर्याप्त धनराशि नहीं है तो चेक बाउंस हो जाता है।
- लेकिन डीडी के बाउंस होने का कोई झंझट नहीं होता क्योंकि इसके लिए डीडी बनवाने वाला व्यक्ति पहले ही पेमेंट कर चुका होता है।
- चेक केवल वही जारी कर सकता है, जिसका बैंक में खाता हो।
- जबकि लेकिन डीडी बनवाने के लिए बैंक में अकाउंट होना जरूरी नहीं है।
- कई बार स्टैंडर्ड चेक से फंड ट्रांसफर होने में कई दिन लग जाते हैं।
- लेकिन डीडी के अमाउंट को टार्गेटेड अकाउंट में पहुंचने में एक कामकाजी दिन का ही वक्त लगता है।
डिमांड ड्राफ्ट क्यों है खास ?
- जानकारी के लिए बता दें कि अगर चेक अकाउंट पेई नहीं है और यह खो जाता है तो उसका गलत इस्तेमाल होने के चांस रहते हैं। कोई भी व्यक्ति बीयरर बनकर उसे इनकैश करा सकता है। लेकिन डीडी के साथ ऐसा नहीं है। इसके द्वारा केवल बैंक अकाउंट में ही पेमेंट होता है, इसलिए इसके खो जाने पर इसे इनकैश नहीं कराया जा सकता। वहीं खो जाने की स्थिति में इसे कैंसिल कराया जा सकता है। मालूम हो कि रिजर्व बैंक के नियम के मुताबिक, डीडी पर बायर का नाम प्रिंट होना अनिवार्य है।
- यह नियम 15 सितंबर 2018 से प्रभाव में आया है ताकि मनी लॉन्ड्रिंग की कोशिशों को नाकाम किया जा सके।
- जिसके नाम पर डीडी पेएबल है, उसे डीडी का अमाउंट बैंक अकाउंट से इनकैश कराने के लिए डीडी बनवाए जाने का कारण बताना होगा। इसका मतलब किस काम के लिए अमाउंट डीडी से ट्रांसफर किया जा रहा है, उससे संबंधित डॉक्युमेंट्स बैंक में दिखाने होंगे। तभी डीडी इनकैश होगा।
- बैंक डीडी बड़े और इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन के लिए एक अच्छा जरिया हैं। ज्यादातर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स और कई जॉब्स के लिए फीस ट्रांसफर के माध्यम के तौर पर डीडी का ही इस्तेमाल होता है। डीडी को रुपये के अलावा जरूरत पड़ने पर दुनिया की किसी भी करेंसी में बनवाया जा सकता है।
चेक लेन-देन करते वक्त इन गलतियों से बचें
- अगर आप किसी को चेक देते है तो ओवर राइटिंग या कटिंग से करने से बिलकुल बचें।
- बता दें कि चेक बाउंस होने पर पेनॉल्टी लग सकती है।
- किसी को चेक देने से पहले पूरी डिटेल भरें, अन्यथा आपका ही नुकसान हो सकता है।
- जानकारी दें कि एक चेक केवल 3 महीने के लिए ही वैध होता है।
- इस बात का भी ध्यान दें कि चेक साइन बिलकुल ब्रांच रिकॉर्ड का साइन जैसा ही हो।
- ज्यादा अमाउंट का पेमेंट चेक के द्वारा ही करें।


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