नयी दिल्ली। सोना एक सदाबहार निवेश ऑप्शन है। परंपरागत रूप से भारतीयों को सोना बहुत पसंद है और लंबे समय से सोने को एक अहम संपत्ति और पूंजी का भंडार माना जाता है। लोग वित्तीय अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति के दौरान अपने पैसे की सुरक्षा के लिए भी सोने की खरीदारी करते हैं। मौजूदा कोरोना संकट में सोने ने निवेशकों को काफी मुनाफा कराया है। हालांकि जब लोग सोने में निवेश के तरीके के बारे में सोचते हैं तो उनमें अधिकतर ये फैसला नहीं कर पाते कि डिजिटल सोना ठीक रहेगा या फिर फिजिकल सोना। वैसे ये मानने वाली बात है कि डिजिटल गोल्ड निवेश में तेज वृद्धि हुई है और लंबे समय तक इस चलन के बरकरार रहने की संभावना है। डिजिटल फॉर्मेट में आप 1 रु का भी निवेश कर सकते हैं। मगर डिजिटल तरीके से निवेश करने पर आपके सामने 5 बड़े जोखिम आते हैं।
नहीं होता रेगुलेटर
डिजिटल गोल्ड में निवेश का सबसे बड़ा जोखिम यह है कि इसके लिए कोई नियामक यानी रेगुलेटर नहीं होता। जब आप डिजिटल सोना खरीदते हैं तो निर्माता आपके नाम के बराबर राशि का सोना खरीदता है। यह सोना किसी थर्ड पार्टी या विक्रेता के वॉल्ट में (जैसा कि MMTC-PAMP के मामले में होता है) संग्रहीत किया जाता है। सामान्य तौर पर एक ट्रस्टी को यह देखने के लिए नियुक्त किया जाता है कि निवेशक द्वारा खरीदे गए सोने की मात्रा और क्वालिटी ठीक है या नहीं। हालांकि ट्रस्टी ठीक से काम कर रहा है या नहीं ये देखने वाला कोई नियामक नहीं होता। मगर गोल्ड ईटीएफ के मामले में सेबी है और सोने के बांड के लिए आरबीआई नियामक होता है।
जीएसटी बढ़ा देता है लागत
जब आप डिजिटल सोना खरीदते हैं तो आपको फिजिकल सोने की ही तरह 3 प्रतिशत माल और सेवा कर (जीएसटी) का भुगतान करना होता है। ये आपके निवेश की लागत बढ़ा देता है।
होल्डिंग चार्ज
यदि आप फोनपे जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए सेफगोल्ड से सोना खरीद रहे हैं तो यह संभावना है कि आपको स्टोरेज चार्ज का भुगतान करना पड़ेगा। इसमें पहले दो वर्षों के लिए कोई शुल्क नहीं होता। यदि आपकी पहली खरीद की तारीख से दो साल तक सोने की वैल्यू 2 ग्राम से कम है तो प्रति माह 0.05 प्रतिशत शुल्क लिया जाता है। एमएमटीसी-पीएएमपी प्लेटफॉर्म से सोना खरीदने पर भी ऐसा कोई शुल्क नहीं होता।
डिलिवरी और मेकिंग चार्ज लागू
डिजिटल गोल्ड के फायदों में से एक यह है कि इसमें आपको सोने की फिजिकल डिलीवरी लेने का विकल्प मिलता है। मगर आपको डिलीवरी शुल्क देना पड़ सकता है। इसके अलावा अगर आप अपने डिजिटल सोने के निवेश को फिजिकल सोने में बदल रहे हैं तो इसमें भी कुछ शुल्क शामिल हो सकता है। आप डिजिटल गोल्ड को सोने की छड़ों या सिक्कों में बदल सकते हैं। यहां आपसे डिजाइन शुल्क लिया जा सकता है।
निवेश अवधि पर लिमिट
आम तौर पर डिजिटल सोने के उत्पादों पर अधिकतम होल्डिंग अवधि तय की जाती है। जिसके बाद निवेशक को या तो सोने की डिलीवरी लेनी होती है या इसे वापस बेचना पड़ता है। उदाहरण के लिए एमएमटीसी-पीएएमपी निवेशकों को खरीदे गए सोने को अनिवार्य रूप से डिलीवर कराना होगा या बेचना होगा। पांच साल के बाद निवेशक ने अगर डिलीवरी नहीं ली तो एमएमटीसी-पीएएमपी द्वारा तय अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होगा। इसी तरह यदि आप फोनपे का उपयोग करके सेफगोल्ड से सोना खरीद रहे हैं तो आप सोना अधिकतम 7 वर्षों के लिए रख सकते है। जबकि गोल्ड ईटीएफ में ऐसी कोई सीमा नहीं होती।
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