
Kisan Vikas Patra : किसान विकास पत्र (केवीपी) खाते पर वर्तमान ब्याज दर सालाना 7 फीसदी है। ये दर जमा राशि पर सालाना कंपाउंड होती है। अगर 31 दिसंबर तक इस दर में कोई बदलाव नहीं होता है, तो यह नए साल 2023 की पहली तिमाही में किए गए केवीपी जमा पर भी लागू होगी। पर बढ़ती महंगाई और भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो दर में बढ़ोतरी के बीच केवीपी जमाकर्ताओं के लिए ब्याज दर बढ़ाए जाने की उम्मीद है, क्योंकि कई बैंक अब केवीपी की तुलना में एफडी पर अधिक ब्याज की पेशकश कर रहे हैं। पहले भी केवीपी पर बैंकों की एफडी की तुलना में अधिक ब्याज मिलता रहा है।
कब बदल सकती है ब्याज दर
केंद्र सरकार हर तिमाही आधार पर सभी छोटी बचत योजनाओं सहित केवीपी की ब्याज दर की समीक्षा करती है। इनमें बढ़ोतरी, कटौती या कोई बदलाव न किया जाना शामिल रहता है। केवीपी ब्याज दर की अगली समीक्षा अब दिसंबर 2022 के अंत तक होगी। इसलिए 2023 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में लागू होने वाली केवीपी ब्याज दर 31 दिसंबर, 2022 तक सामने आएगी।
कितने समय में होता है पैसा डबल
अभी 7 फीसदी की सालाना ब्याज दर के हिसाब से निवेशकों का पैसा केवीपी में 123 महीनों में डबल हो जाता है। यानी 10 साल और 3 महीने। यही इसकी मैच्योरिटी अवधि है। पर यदि केवीपी की ब्याज दर 2023 की शुरुआत से बढ़ती है तो निवेशकों का पैसा जल्दी डबल हो जाया करेगा। केवीपी डिपॉजिट पोस्ट ऑफिस की विभिन्न योजनाओं में से एक है। इस पर सॉवरेन गारंटी होती है। तो अगर पोस्ट ऑफिस विफल भी हो जाता है, तो आपकी जमा राशि सुरक्षित रहेगी।
कितना पैसा होता है जमा
न्यूनतम राशि जो आप जमा कर सकते हैं वह 1000 रुपये है और अधिकतम निवेश राशि की कोई सीमा नहीं है। 10 वर्ष से अधिक आयु के बच्चे अपने नाम से केवीपी खाता रख सकते हैं। योजना के तहत कितने भी केवीपी खाते खोले जा सकते हैं।
लोन भी मिल सकता है
गिरवीदार (प्लेजी) के एक्सेपटेंस लेटर के साथ संबंधित डाकघर में जरूरी आवेदन पत्र जमा करके आप केवीपी खाते को गिरवी रख सकते हैं या सिक्योरिटी के रूप में ट्रांसफर भी करा सकते हैं। केवीपी खाते को जमा करने की तारीख से 2 साल 6 महीने के बाद समय से पहले बंद किया जा सकता है। केवीपी की खासियत यह है कि इस स्कीम में जितना भी पैसा जमा किया जाएगा, वह सीधे दोगुना होकर वापस मिलेगा।

बिना जोखिम पाएं रिटर्न
पोस्ट ऑफिस की केवीपी जैसी छोटी बचत योजनाएं उन निवेशकों को गारंटीड रिटर्न और मन की शांति प्रदान करती हैं जो अपनी गाढ़ी कमाई को खोने का जोखिम नहीं उठा सकते। इसके अलावा पीपीएफ, एसएसवाई और एससीएसएस जैसी पोस्ट ऑफिस की कई स्कीमें हैं, जो प्रमुख पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बैंकों द्वारा दी जाने वाली सावधि जमा ब्याज दरों की तुलना में टैक्स लाभ के साथ उच्च ब्याज दरें प्रदान करती हैं। मगर जोखिम उठाने की क्षमता रखने वाले निवेशक म्युचुअल फंड और स्टॉक जैसी विकल्पों में निवेश कर सकते हैं, जो बेहतर रिटर्न दे सकते हैं और पोस्ट ऑफिस की योजनाओं की तुलना में पैसा तेजी से दोगुना कर सकते हैं।
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