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FD कराने से पहले इन बातों का रखे ध्यान, होगा ज्यादा फायदा

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नई दिल्ली, अगस्त 22। रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में लगातार तीसरी बढ़ोतरी के बाद इस बात की संभावना बढ़ी है कि बैंक आने वाले दिनों में जमा दरों को और बढाएंगे। पिछले दो महीने में लगभग सभी बैंकों ने सेविंग अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट के दरों में बढोतरी की है। एफडी पर फिर से बढ़े ब्याज ने लोगों का रुझान फिर से फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में निवेश की तरफ आकर्षित किया है। एफडी में निवेश शुरू से ही निवेश के सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक है। अगर आप भी बढ़ते ब्याज दरों के बीच एफडी कराने का मन बना रहे हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

 

Banking Charges : जानिए किन किन बातों पर बैंक लगाते हैं चार्जBanking Charges : जानिए किन किन बातों पर बैंक लगाते हैं चार्ज

सही बैंक का करें चयन

सही बैंक का करें चयन

सभी बैंकों में मिलने वाले ब्याज दरों की तुलना जरूर करें। अगर कोई विश्वसनिय बैंक समान अवधि की फिक्स्ड डिपॉजिट पर ज्यादा ब्याज दे रहा हो तो उसे वरीयता दें। बैंकों के दरों की तुलना करने में इस बात का ध्यान रखें की बड़े सरकारी व प्राइवेट बैंकों की तुलना में नए स्मॉल फाइनैंस बैंक और कुछ विदेशी बैंक ज्यादा ब्याज दर की पेशकश करते हैं। आपके लिए बेहतर होगा कि आप किसी बड़े सरकारी या निजी बैंक में ही एफडी करने का चुनाव करें। यहा निवेश ज्यादा सुरक्षित होता है।

दो तरह के होते हैं एफडी
 

दो तरह के होते हैं एफडी

बैंको में फिक्स्ड दो तरह से किया जाता है। यह दोनो विधि है क्युमुलेटिव या नॉन क्यूमुलेटिव एफडी। नॉन क्युमुलेटिव एफडी में हर ग्राहक महीने, तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर ब्याज पाने का विकल्प चुन सकते हैं। क्युमुलेटिव एफडी में यह विकल्प नहीं होता है। क्युमुलेटिव एफडी में ब्याज मैच्योरिटी के बाद प्रिंसिपल अमाउंट के साथ ही मिलता है। अगर आप हर महीने, तिमाही या छमाही ब्याज पाने का विकल्प चुनते हैं तो ब्याज की कंपाउंडिंग नहीं होगी जबकि मैच्योरिटी के बाद प्रिंसिपल अमाउंट के साथ ब्याज लेने का विकल्प चुनने पर ब्याज की कंपाउंडिंग का फायदा ग्राहकों को मिलता है।

टीडीएस पर भी दे ध्यान

टीडीएस पर भी दे ध्यान

अगर ग्राहक की सालाना आय पर टैक्स के स्लैब में नहीं आती है तो एफडी करने के तुरंत बाद ग्राहक को फार्म 15जी या 15एच भरकर बैंक को दे देना चाहिए। अगर निवेशक की उम्र 60 साल से कम है तो फॉर्म 15जी भरना है और अगर निवेशक 60 साल से ज्यादा उम्र का है तो फार्म 15एच भरना होता है। बैंक में यह फॉर्म खाता खोलने के टाइम पर ही जमा करने से बैंक एफडी पर टीडीएस नहीं काटेगा। लेकिन अगर फार्म नहीं भरा जाता है तो 40 हजार से ज्यादा ब्याज कमाई पर टीडीएस लगेगा। सिनियर सिटिजन के मामले में यह राशि 50 हजार रुपए है।

टैक्स

एफडी के ब्याज से होने वाले कमाई पर टैक्स में कोई छूट नहीं है। मतलब कि एफडी से मिलने वाला ब्याज आपकी सालाना आमदनी से जुड़ जाएगा और इसपर टैक्स इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से तय होगा। 60 साल से ज्यादा उम्र के सिनियर सिटिजन के लिए 50 हजार रुपए के ब्याज पर छूट मिलती है। फार्म 80सी के तहत यह छूट क्लेम की जा सकती है। लेकिन इस छूट के लिए कम से कम 5 साल के अवधि के लिए एफडी करवानी होगी। 5 साल के अवधि वाले एफडी पर आप को अधिकतम 1.5 लाख के निवेश पर 80 सी के तहत छूट मिलेगा।

नहीं तोड़नी चाहिए एफडी

नहीं तोड़नी चाहिए एफडी

अगर किसी निवेशक को एफडी की मैच्योरिटी से पहले ही पैसों की आवश्यकता होती है तो एफडी तोड़ने से बेहतर है आप एफडी के अगेंस्ट लोन के लिए अप्लाई कर दें। ज्यादातर बैंको से एफडी पर 90 प्रतिशत तक लोन पाया जा सकता है।

English summary

Keep these things in mind before getting FD there will be more benefit

If an investor needs money before the maturity of the FD, then it is better to apply for a loan against FD than to break the FD.
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