नई दिल्ली, दिसंबर 16। पब्लिक प्रोविडेंट फंड या पीपीएफ उन निवेशकों के लिए बढ़िया निवेश ऑप्शन है, जो जोखिम से बचना चाहते हैं। ये निवेशकों द्वारा लंबी अवधि में दौलत बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक पसंदीदा ऑप्शन है। असल में यहां निश्चित ब्याज दर बतौर रिटर्न मिलती है। पीपीएफ ईईई या 'एग्जेम्प्ट एग्जेम्प्ट एग्जेम्प्ट' यानी छूट-छूट-छूट कैटेगरी में आता है। इस कैटेगरी का मतलब होता है कि आप पीपीएफ में जो पैसा निवेश करते हैं वो, सालाना ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाला पैसा सभी टैक्स से फ्री होता है। इन फायदों के बावजूद पीपीएफ को बेस्ट निवेश ऑप्शन नहीं कह सकते। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके कई नुकसान भी हैं। जानते हैं पीपीएफ में निवेश के 5 बड़े नुकसानों के बारे में।
कई ऑप्शनों के मुकाबले रिटर्न कम
सरकार ने चालू तिमाही के लिए पीपीएफ की ब्याज दर पहले की तरह 7.1 फीसदी पर बरकरार रखी है। यह आपको आकर्षक रिटर्न लग सकता है, पर जानकारों के अनुसार मौजूदा आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए इतना रिटर्न बहुत अच्छा नहीं है। जबकि इसके मुकाबले म्यूचुअल फंड में आपको सालाना 10 फीसदी, 12 फीसदी या 15 फीसदी तक रिटर्न मिल सकता है।
अकेले खोलना होगा पीपीएफ खाता
एफडी और म्यूचुअल फंड के उलट पीपीएफ खाता दो लोग मिल कर नहीं खोल सकते। इस तरह ये पारिवारिक बचत निवेश ऑप्शन नहीं बनता। उदाहरण के लिए एक पीपीएफ खाता आपके या आपके जीवनसाथी द्वारा खोला जा सकता है, लेकिन दोनों मिल कर एक खाता नहीं खोल सकते। पर किसी नाबालिग के नाम पर पीपीएफ खाता खोला जा सकता है।
ईपीएफ के साथ पीपीएफ काम का नहीं
अगर आपके पास पहले से ईपीएफ खाता है और आप उसमें योगदान दे रहे हैं तो पीपीएफ काम का नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि ईपीएफ की ब्याज दर है 8.6 फीसदी और पीपीएफ की 7.1 फीसदी। जबकि आप ईपीएफ में एक्स्ट्रा पैसा वीपीएफ के जरिए लगा सकते हैं और आपको ईपीएफ जितना ही ब्याज मिलेगा।
अधिकतम 1.5 लाख रु के निवेश की लिमिट
जो लोग लंबी अवधि में बड़ा फंड जमा करना चाहते हैं, उनके लिए पीपीएफ सही नहीं है क्योंकि यहां आप एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये का निवेश कर सकते हैं। जबकि ईएलएसएस या अन्य किसी ऐसी स्कीम में निवेश की कोई लिमिट नहीं। साथ ही आपको ईएलएसएस में सेक्शन 80 सी के तहत टैक्स बेनेफिट भी मिलेगा।
लिक्विडिटी सबसे अहम
पीपीएफ खाते की सबसे बड़ी कमी है लिक्विडिटी। ऐसा इसलिए क्योंकि ये खाता 15 वर्षों में मैच्योर होता है। कुछ साल बाद बेशक आप अपना कुछ पैसा खाते से निकाल सकते हैं, मगर सारा नहीं। पर म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में ऐसा नहीं होता। इन ऑप्शनों में जब चाहे फट से सारा पैसा निकाल सकते हैं। मगर पीपीएफ में आपको ये सुविधा नहीं मिलेगी। सरकार हर तिमाही में पीपीएफ की ब्याज दर की समीक्षा करती है। चालू तिमाही के लिए फिलहाल पीपीएफ पर 7.1 फीसदी का रिटर्न मिलेगा। अब 1 जनवरी 2022 को पीपीएफ की ब्याज दरों की समीक्षा के बाद नयी दरें घोषित की जाएंगी। बता दें कि कई तिमाहियों से पीपीएफ की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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