नई दिल्ली, मई 25। एक निवेशक के रूप में हम पॉजिटिव रिटर्न प्राप्त करने के उद्देश्य से अपने पैसे का निवेश करते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि निवेश पर निगेटिव रिटर्न प्राप्त करने का जोखिम भी मौजूद होता है। बाजार से जुड़े निवेश जैसे म्यूचुअल फंड या डायरेक्ट शेयर में निगेटिव रिटर्न की संभावना कम होती है, मगर उनमें नुकसान का डर रहता है। वहीं बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे फिक्स्ड-इनकम निवेश में पैसे डूबने का जोखिम नहीं होता, मगर निगेटिव रिटर्न का चांस रहता है। आप सोच रहे होंगे कि भला ये निगेटिव रिटर्न क्या है। इसे जानने और इससे बचने के लिए लेख को अंत तक पढ़ें।
जोखिम होता है
बाजार से जुड़े निवेश (इक्विटी) में सिक्योरिटीज की वैल्यू में गिरावट आने पर निवेश किए गए पैसे को खोने का जोखिम होता है। फिक्स्ड इनकम निवेश में, पूंजी खोने का जोखिम नहीं होता (कुछ में मौजूद हो सकता है), पर निगेटिव रिटर्न मिलने के जोखिम से इंकार नहीं किया जा सकता है। यह जोखिम विभिन्न निवेशों से मिलने वाले रिटर्न पर मुद्रास्फीति (महंगाई) के प्रभाव से जनरेट होता है।
महंगाई और निगेटिव रिटर्न
इस समय महंगाई दर काफी अधिक हो गयी है और यही ऊंची महंगाई दर आपको पैसे का नुकसान कराती है। दरअसल होता यह है कि अगर कोई बैंक एफडी पर सालाना 6 फीसदी का रिटर्न देता है और महंगाई भी 6 फीसदी है, तो नेट रिटर्न शून्य होगा। कई बार जब एफडी की दरें इससे कम होती हैं या मुद्रास्फीति अधिक होती है, तो निवेश पर निगेटिव रिटर्न मिलता है। निवेश की गई पूंजी सुरक्षित है लेकिन मुद्रास्फीति को एडजस्ट करने के बाद मिलने वाला रिटर्न निगेटिव हो सकता है।
ब्याज दरों में गिरावट
ब्याज दरों में गिरावट होने के साथ बढ़ती मुद्रास्फीति के दौरान निगेटिव रिटर्न अधिक स्पष्ट होता है। मुद्रास्फीति और ब्याज दर के अलावा एक अन्य महत्वपूर्ण कारक, जो रिटर्न को प्रभावित करता है, जिसके परिणामस्वरूप निवेशक को निगेटिव रिटर्न मिलता है और वह है टैक्स। टैक्स आपका रिटर्न कम कर देता है।
इन लोगों पर पड़ता है ज्यादा असर
एफडी रिटर्न पर टैक्स का असर उन लोगों पर ज्यादा पड़ता है, जो कम टैक्स रेट देने वालों की तुलना में सबसे ऊंचे टैक्स स्लैब में आते हैं। लेकिन, आपके रिटर्न को प्रभावित करने में मुद्रास्फीति की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है, चाहे टैक्स रेट कुछ भी हों।
कैसे बचें इससे
आपको यह चेक करने की आवश्यकता है कि क्या आपका निवेश निगेटिव रिटर्न अर्जित कर रहा है। आपको सुनिश्चित करना चाहिए कि मिलने वाला रिटर्न मुद्रास्फीति से कम से कम कुछ प्रतिशत अधिक है। एक एसेट क्लास के रूप में इक्विटी में हाई रिटर्न जनरेट करने की क्षमता होती है और इसलिए निवेशकों के लिए अपने लंबी अवधि के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ये एक बेहतर विकल्प है। रिटेल निवेशकों के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में पैसा बनाने के लिए एक अच्छा ऑप्शन है। लेकिन, क्या इसका मतलब यह है कि बैंक एफडी में निवेश करने से बचना चाहिए? ये वास्तव में उन निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं जो पैसा बढ़ाने के बजाय पैसा सेफ करने की तलाश में रहते हैं।
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