दुनिया में अलग-अलग देशों ने करेंसी की सुरक्षा को देखते हुए कई कायदे-कानून बनाए है. भारत में भी करेंसी को लेकर कुछ कानून तय है. जैसे कोई भी आम व्यक्ति नोट नहीं छाप सकता है. इसके खिलाफ सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं. आज हम जानेंगे जिन कागजों का इस्तेमाल नोट बनाने के लिए किया जाता है. क्या उसे खरीदा जा सकता है?

हमार देश में आज 10 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक के नोट छापें जा रहे हैं. इन नोट को बनाने के लिए खास कागज का इस्तेमाल किया जाता है. इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक भारत में पहले करेंसी बाहर से छपकर आती थी. लेकिन अब हम करेंसी अपने ही देश में छापते हैं. इसके बावजूद भी नोट बनाने के लिए कागज विदेशों से मगाएं जाते थे. लेकिन अब धीरे-धीरे छपाई और कागज की मेकिंग इंडिया में ही शुरू हो चुकी है.
क्या नोट के कागज को खरीदा जा सकता है ?
क्रेंद सरकार द्वारा नोटों की छपाई और कागज बनाने के लिए आदेश जारी किया जाता है. देश में ये नियम है कि कोई भी व्यक्ति सरकार के बिना आदेश के नोट की छपाई नहीं कर सकता. इसके अलावा जिन कागजों से नोट बनता है, उसे बेचने पर सख्त रुकावट है. सरल भाषा में कहें तो नोट के कागज बनाने वाली कंपनी इसे किसी ओर को नहीं बेच सकती है.
देश में कहां होते है नोट प्रिंट?
इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक देश में कुल चार जगह प्रिंटिंग प्रेस हैं. इनमें देवास, नासिक, सलबोनी और मैसूर शामिल हैं. इनमें से दो प्रिंटिंग प्रेस क्रेंद सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाता है. वहीं अन्य दो प्रिंटिंग प्रेस को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया नियंत्रित करता है.
इसके अलावा भारतीय नोट को छापने को छपाने के लिए जिस स्याही का इस्तेमाल होता है, उसे मध्यप्रदेश के देवास से मंगाया जाता है. वहीं नोट में जो गहरी छाप होती है, उसे स्विट्जरलैंड की कंपनी एसआईसीपीए द्वारा किया जाता है, जिसका एक ब्रांच सिक्कम में मौजूद है.


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