सिर्फ पैन और आधार ही नहीं, ITR भरने के लिए भी आपके पास होने चाहिए ये डॉक्यूमेंट्स, तुरंत हो जाएगा काम

Income Tax Return 2024-25 Required Documents: इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर भरना बेहद अहम काम है। इसमें कई तरह के डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है।

इसमें सबसे अहम होता है इनकम प्रूफ जो आपकी कमाई के बारे में बताता है।

आईटीआर फाइलिंग असेसमेंट ईयर (ए.वाई.) 2024-25 के लिए, सीबीडीटी ने सभी आईटीआर फॉर्म 1 से 6 को संशोधित किया है जो 1 अप्रैल, 2024 से लागू हो गया है।

Income Tax Return 2024-25

इन बदलावों से आईटीआर दाखिल करने में आसानी होगी। आपको बता दें कि निर्धारण वर्ष 2024-25 के लिए आईटीआर दाखिल करने की नियत तारीख 31 जुलाई, 2024 निर्धारित है। चलिए अब आपको बताते हैं कि आईटीआर फाइल करने के लिए आपको किन-किन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है।

पैन और आधार

पैन सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट है जिसे टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय संभाल कर रखना चाहिए।

आपको बता दें कि भारतीय आयकर अधिनियम की धारा 139AA के अनुसार, किसी व्यक्ति को अपने आयकर रिटर्न को सफलतापूर्वक दाखिल करने के लिए अपना आधार प्रदान करना होगा। आपको अपने आधार और पैन को नियामक द्वारा अनिवार्य रूप से लिंक करना होगा।

फॉर्म-16

यदि आपकी अर्जित आय नियोक्ता द्वारा प्रदान किए गए वेतन के रूप में है, तो फॉर्म-16 टैक्स रिटर्न के लिए आवश्यक प्रमुख दस्तावेजों में से एक है।

फॉर्म-16 आपके नियोक्ता द्वारा जारी किया गया एक अनिवार्य प्रमाणपत्र है जो किसी दिए गए वित्तीय वर्ष के दौरान अर्जित आपके वेतन और उस पर लागू स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

सैलरी स्लिप

सैलरी स्लिप आपके आईटीआर दाखिल करने के लिए आवश्यक दस्तावेज हैं। इसमें एचआरए, लीव ट्रैवल अलाउंस (एलटीए), मेडिकल अलाउंस, व्यक्तिगत भत्ता, इत्यादि भी शामिल होता है।

टीडीएस प्रमाणपत्र

अगर सैलरी के अलावा अन्य किसी सोर्स से कमाई कर रहे हैं तो उस पर टीडीएस कटता है जिसका सर्टिफिकेट आपको रखना होगा।

इसमें फॉर्म-16ए टीडीएस सर्टिफिकेट होता है जो बैंक जारी करता है। आपको बता दें कि यह टीडीएस नॉन सैलरी इनकम पर काटा जाता है।

वहीं, बिना सैलरी के अलावा कमाई पर जो ब्याज मिलता है, उस पर टीडीएस कटता है और उसका सर्टिफिकेट फॉर्म-16ए के रूप में मिलता है। आपको बता दें कि फॉर्म-16बी होता है जो किसी प्रॉपर्टी को बेचने के बाद टैक्स कटौती पर जारी किया जाता है।

फॉर्म-16सी होता है जो किरायेदार से अपने मकान मालिका को दिया जाता है। यह रेंट पर कटे टीडीएस को लेकर सर्टिफिकेट होता है और यह तब दिया जाता है जब महीने में किराये की रकम 50,000 रुपये से ज्यादा हो।

फॉर्म 26 AS

फॉर्म 26 AS का मतलब है साल में आप जितना टैक्स जमा करते हैं, उसका 26 AS एक स्टेटमेंट होता है। इसमें आपके पैन पर कटने वाले टैक्स का जिक्र इस स्टेटमेंट में होता है।

किसी सैलरीड कर्मचारी का टीडीएस कटता हो, ब्याज पर बैंक टीडीएस काटता है, किसी संस्थान से पेमेंट लिया हो तो उस पर टीडीएस कटता हो और सेल्फ एसेसमेंट टैक्स, एडवांस टैक्स का जिक्र इसमें दिया जाता है।

इसके अलावा होम लोन का स्टेटमेंट और इंवेस्टमेंट प्रूफ भी आपके पास होना चाहिए। आपको बता दें कि इनकम टैक्स की धारा 24 के तहत लेनदार होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये की छूट पा सकता है।

वहीं, इनकम टैक्स की धारा 80सी, 80सीसीडी (1) और 80सीसीसी के तहत आपको टैक्स छूट का लाभ मिलता है तो उसकी जानकारी भी देना होती है।

इसके लिए आपको इनवेस्टमेंट प्रूफ देना होगा। अगर आप किसी इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम, ईएलएसएस में निवेश, ईपीएफ में निवेश, पीपीएफ और एनपीएस में निवेश करते हैं तो आपको इसपर भी टैक्स छूट का लाभ मिलता है।

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