नई दिल्ली, जुलाई 12। कंपनी को प्रॉडक्ट को वापस लेने पर ज्यादा नुकसान होता है। इसलिए कंपनियां अपने प्रॉडक्ट पर गारंटी के बजाय वारंटी देना ज्यादा पसंद करती हैं। यदि ग्राहक के नजर से देखें तो वारंटी में भी ज्यादा नुकसान नहीं है। वैसे आपको वारंटी का फायदा लेने का तरीका जरूर पता होना चाहिए। आइए जानते हैं, गारंटी और वारंटी में क्या अन्तर हैं।
गारंटी क्या होती है
गारंटी का मतलब होता है कि कंपनी अपने प्रॉडक्ट की क्वालिटी की पूरी जिम्मेदारी लेती है। अगर उसमें कोई छोटा-मोटा फॉल्ट निकलता है, तो वह अपना मैकेनिक भेजकर ठीक करवा देती है और बड़ा फॉल्ट निकलने पर वह अपने प्रॉडक्ट को वापस ले लेती है।
वारंटी क्या होती है
वारंटी का मतलब होता कि फॉल्ट चाहे छोटा हो या बड़ा लेकिन कंपनी अपने प्रॉडक्ट को किसी भी कन्डीशन में वापस नहीं लेती। इसके जगह वह अपने मैकेनिक को आपके घर भेजकर उसे ठीक करवा सकती है।
बिल अवश्य लें
जब भी आप कोई महंगा सामान खरीदें तब उस सामान का पक्का बिल जरूर लें। साथ ही उस सामान को खोलकर उसमें रखे गारंटी/वारंटी कार्ड पर दुकानदार के साइन और मुहर लगवाएं। ये दोनों काम होने पर ही माना जाता है कि आपने वह सामान वेलिड तरीके से खरीदा है। इन दोनों दस्तावेज के बिना आप सामान के खराब निकलने पर गारंटी-वारंटी के लिए कंपनी पर क्लेम नहीं किया जा सकता है।
प्रॉडक्ट को खरीदते समय क्या देखें
आप जब भी बाजार से अपनी जरूरत का सामान खरीदने जाएं, तब उस पर लिखी गारंटी या वारंटी पर ध्यान जरूर दें कि किस प्रॉडक्ट पर गारंटी-वारंटी ज्यादा समय तक के लिए लिखी है। जिस प्रॉडक्ट पर अधिक समय की गारंटी-वारंटी लिखी हो तो उसकी क्वालिटी अच्छी हो सकती है और अगर वह बीच में खराब हो भी जाता है तो आपको उस पर कुछ भी रुपये खर्च नहीं करना होगा।
आप शिकायत कंस्यूमर फोरम में कर सकते हैं
अगर आपकी गारंटी-वारंटी की समय सीमा होने के बावजूद कोई प्रॉडक्ट खराब हो जाता है और वह सामान वापस या सुधरवाते नही हैं तो आप कंस्यूमर फोरम में शिकायत कर सकते हैं। वहां पर केस दर्ज करवाने के लिए किसी वकील की आवश्यकता नहीं होती। आप खुद एक सादे कागज पर पूरी घटना लिखकर फोरम में जमा करवा सकते हैं।


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