Gold को बेचने से पहले जान लें कितना लगेगा Tax, नहीं होगा नुकसान

सोने में निवेश काफी तेजी से बढ़ा है। सोना खरीदने हमेशा से भारतीयों की पसंद रहा है। पिछले कुछ दिनों से सोना-चांदी के भावों से काफी उतार चढ़ाव देखा गया है।

नई दिल्‍ली: सोने में निवेश काफी तेजी से बढ़ा है। सोना खरीदने हमेशा से भारतीयों की पसंद रहा है। पिछले कुछ दिनों से सोना-चांदी के भावों से काफी उतार चढ़ाव देखा गया है। सोना लंबे समय से आकर्षण का केंद्र रहा है। सोना को गहनों के तौर पर खरीदने के अलावा न‍िवेश का एक मजबूत माध्यम समझा जाता है। सोने के गहने भी एक तरह से निवेश हैं क्योंकि इन्हें यह समझकर खरीदा जाता है कि बुरे वक्त के लिए पैसे सुरक्षित हो रहे हैं। सस्‍ता हुआ GOLD, ऐसे खरीदें ये 5 शानदार ज्‍वेलरी

If You Want To Sell Gold Know How Much Tax Is Charged

बता दें कि सालभर में कई बार ऐसे मौके आते हैं जब सोनी खरीदा जाता है. कुछ लोग इसमें निवेश के लिहाज से भी पैसा इन्वेस्ट करते हैं। सोने की कीमतें भी इस वक्त लगातार बढ़ रही हैं। लेकिन, सोना खरीदने से पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि सोने पर कब, कहां और कितना टैक्स लगता है।

 4 तरह से खरीद सकते है सोना

4 तरह से खरीद सकते है सोना

सबसे पहले आपको बता दें कि भारत में सोने को चार तरीके से खरीदते हैं। पहला, आभूषण और सिक्कों के रूप में भोतिक सोने की खरीद। दूसरा, गोल्ड म्युचुअल फंड्स और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ), तीसरा, डिजिटल गोल्ड और चौथा, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) के रूप में। जब ग्राहक यह सोना बेचते हैं, तो उस पर टैक्स लगाया जाता है, यह टैक्स सोने के रूप पर निर्भर करता है। अगर आप सोना खरीद रहे हैं या बेच रहे हैं, तो आपको इस टैक्स के बारे में जरूर पता होना चाहिए। तो चल‍िए अपनी इस खबर के जरि‍ए हम आपको विस्तार से बताते है।

 जान‍िए आभूषण व सिक्कों पर लगने वाले टैक्स

जान‍िए आभूषण व सिक्कों पर लगने वाले टैक्स

आभूषण व सिक्कों की बिक्री पर टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कितने समय के लिए यह सोना अपने पास रखा है। जानकारी दें कि सोना खरीदने के तीन साल के अंदर अगर आप इसे बेच देते हैं, तो उस लाभ को अल्पकालिक माना जाता है। इसे डेट फंड्स में कैपिटल गेन्स के समान ही ट्रीट किया जाता है। यह अल्पकालिक पूंजीगत लाभ खरीदार की कुल आय में जुड़ जाता है और इस पर उसके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार ही टैक्स लगता है। अगर खरीदने के तीन साल के बाद इस सोने को बेचा जाता है, तो उस लाभ को लॉन्ग टर्म लाभ माना जाता है और इस पर 20 फीसद लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है।

 गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड म्युचुअल फंड्स पर लगने वाले टैक्स

गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड म्युचुअल फंड्स पर लगने वाले टैक्स

इसके साथ ही अगर गोल्ड ईटीएफ की बात करें, तो ये सोने की भौतिक कीमत को ट्रैक करने के लिए भौतिक सोने में निवेश करते हैं और गोल्ड म्युचुअल फंड्स गोल्ड ईटीएफ में निवेश करते हैं। गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड म्युचुअल फंड्स दोनों से प्राप्त पूंजीगत लाभ भौतिक सोने की तरह ही कर योग्य होता है।

एसजीबी और डिजिटल गोल्ड पर टैक्स

एसजीबी और डिजिटल गोल्ड पर टैक्स

आपको बता दें कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स में मैच्योरिटी पर पूंजीगत लाभ पूरी तरह कर मुक्त है। हालांकि, अगर आप सेकेंडरी मार्केट में बाहर निकलते हैं, तो भौतिक सोने की तरह ही टैक्स लगता है। आपकी जानकारी के ल‍िए बता दें कि कई बैंक्स, मोबाइल वॉलेट्स और ब्रोकरेज कंपनियां एप्स के जरिए सोना बेचने के लिए एमएमटीसी-पीएएमपी या सेफगोल्ड से साझेदारी करती हैं। इनसे प्राप्त पूंजीगत लाभ पर भी भौतिक सोने या गोल्‍ड ईटीएफ की तरह ही टैक्स लगता है।

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