नयी दिल्ली। हाल ही में देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने कम से कम 1,000 प्रॉपर्टीज की ई-नीलामी की। ये प्रॉपर्टी उधारकर्ताओं की थीं। एसबीआई की इस नीलामी में जिन प्रॉपर्टीज के लिए बोली लगनी थी वे देश भर में मौजूद हैं। इनमें खुला प्लॉट, आवासीय, औद्योगिक और कमर्शियल यूनिट्स शामिल रहीं। बता दें कि ये उन लोगों की गिरवी रखी हुई प्रॉपर्टी होती हैं जो बैंक से लिया हुआ कर्ज नहीं चुका पाते। नतीजे में एसबीआई या कोई और अन्य (जिससे प्रॉपर्टी पर लोन लिया गया हो) अपना बकाया पैसा वसूलने के लिए प्रॉपर्टीज को नीलाम कर देते हैं। बैंक की तरफ से हो रही प्रॉपर्टी की नीलामी में आम तौर पर बड़ी संख्या में लोग आकर्षित होते हैं, क्योंकि ऐसी यूनिट्स अक्सर मौजूदा बाजार रेट की तुलना में सस्ती होती हैं। लेकिन कम कीमत के चक्कर में पूरी तरह न आएं वरना आपको पछताना पड़ सकता है। ऐसी कोई प्रॉपर्टी खरीदने से पहले 3 चीजों पर ध्यान दें, वरना लेने के देने पड़ सकते हैं। आइए जानते हैं जरूरी बातें।
क्या हैं जोखिम
अक्सर लोग मान लेते हैं कि बैंकों की नीलामी एक दम स्पष्ट होते। लेकिन नीलामी नोटिस में आम तौर पर एक क्लोज होता है। इसमें बताया जाता है कि बैंक की जानकारी के अनुसार संपत्ति पर किसी तरह का अतिक्रमण मौजूद नहीं है और बैंक किसी भी अज्ञात मौजूदा और भविष्य के अतिक्रमण या किसी तीसरे पक्ष के दावे, अधिकारों या बकाया के लिए जिम्मेदार नहीं है। संपत्तियों की नीलामी करते समय बैंक "जैसा है वैसा है" और "जो कुछ भी है" जैसे शब्दों का उपयोग करते हैं। इन शर्तों का मतलब है कि बैंक अपनी वर्तमान फिजिकल और कानूनी स्थितियों के आधार पर संपत्ति बेच रहा है, जिसमें कोई भी समस्या (अतिक्रमण आदि) नहीं शामिल है। दूसरे शब्दों में बाद में सामने आने वाली किसी भी समस्या से निपटने की जिम्मेदारी खरीदार की होगी।
क्या ऐसी प्रॉपर्टी वाकई सस्ती होती है
ऐसी संपत्तियों में कई तरह अनजाने खर्चे भी आपकी जेब पर पड़ जाते हैं। उदाहरण के लिए एसबीआई की नीलामी में बैंक ने कहा कि सभी वैधानिक और गैर-वैधानिक बकाया, टैक्स, शुल्क, फीस आदि के भुगतान की जिम्मेदारी बोली लगाने वाले की ही होगी। इसलिए यदि पिछले मालिक ने संपत्ति पर बकाया भुगतान नहीं किया है तो उस बोली लगाने वाले के गले पड़ जाएगा जो नीलामी में घर खरीदे। इस तरह के बकाया से नीलामी की कम कीमतों का फायदा खत्म हो सकता है। और तो और इन चार्जेस में से कुछ पर आपको ब्याज भी देना पड़ सकता है, यदि उनका समय पर भुगतान न किया जाए। इसके अलावा आपको संपत्ति की मरम्मत और रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च करने की भी आवश्यकता पड़ सकती है।
क्या आप समय पर पेमेंट कर सकते हैं
इस सवाल का जवाब आपके पास स्पष्ट होना चाहिए। नीलामी में भाग लेने से पहले बैंक आम तौर पर बयाने या डिपॉजिट मनी के रूप में रिजर्व मूल्य का 10 फीसदी मांगते हैं। यदि आप बोली में सफल नहीं हुए तो ये पैसा आपका गया। इसकी कोई वापस पेमेंट नहीं होगी। वहीं बोली में विजेता के लिए,भुगतान की समय सीमा बहुत टाइट होती है। होम लोन लेने में आपको थोड़ा समय लग सकता है, ऐसे मामलों में आपको मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए आपको बैंक की डेडलाइन में ही पर्याप्त पैसों की व्यवस्था करनी होगी। इसलिए ऐसी नीलामी में तब ही हाथ आजमाएं जब आपके पास बैलेंस हो।
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