सोने-चांदी के दाम में हर रोज एक नया रिकॉर्ड बन रहा है। कोरोना संकट के इस समय में सोने में निवेश का चलन बढ़ा है। आर्थिक अनिश्चितता के समय सोने में लोग बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं।
नई दिल्ली: सोने-चांदी के दाम में हर रोज एक नया रिकॉर्ड बन रहा है। कोरोना संकट के इस समय में सोने में निवेश का चलन बढ़ा है। आर्थिक अनिश्चितता के समय सोने में लोग बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं। इसके साथ ही देखा गया हैं कि भारत में सोने को निवेश का सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है। पिछले कुछ सालों में सोने की कीमतों में हुए तेज इजाफे के कारण इसे शानदार मुनाफा देने वाले विकल्प के तौर पर देखा जाता है। वहीं, काफी लोग इसे शौक के तौर पर आभूषणों के तौर पर घर में भी रखते हैं।

सोने को लेकर भारतीयों के लगाव के कारण ही हर साल देश में बहुत बड़ी मात्रा में सोने का आयात किया जाता है। वहीं लॉकडाउन के कारण सोने की खरीद में काफी कमी दर्ज की गई है। इससे देश के चालू खाता घाटे (सीएडी) में भी कमी आई है। देश में लोग आभूषण, बिस्कुट या दूसरे फॉर्म में सोने की खरीदारी करते हैं। इसलिए आपको बता दें कि आप कितनी मात्रा में सोना घर में रख सकते हैं। मालूम हो कि घर में रखा सोना पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजर रहती है। अगर आप तय मात्रा से ज्यादा सोना रखते है तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट जब्त कर सकता है।
जानिए क्या है इनकम टैक्स रूल
आमतौर पर देखा गया है कि देश में काफी लोग ऐसे हैं जो सोने से बने आभूषणों को घर में ही रखते हैं। लेकिन इनकम टैक्स रूल्स के मुताबिक घर पर एक तय मात्रा में ही सोना रखा जा सकता है। इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक, अगर आप गोल्ड की खरीदारी का वैलिड सोर्स और प्रूफ दिखा देता है तो कितनी मात्रा में भी सोना घर में रख सकता है। वहीं, बिना वैलिड सोर्स घर में तय मात्रा में ही सोना रखा जा सकता है। बिना अपना इनकम सोर्स बताए घर में सोना रखने की भी तय सीमा है। नियमों के मुताबिक, विवाहित महिला घर में 500 ग्राम, अविवाहित महिला 250 ग्राम और पुरुष केवल 100 ग्राम सोना बिना इनकम प्रूफ दिए भी रख सकते हैं। जानकारी दें कि तीनों कैटेगरी में बिना प्रूफ के तय सीमा से ज्यादा मात्रा सोना घर में पाए जाने पर आयकर विभाग स्वर्ण आभूषण जब्त कर सकता है। या यूं कहें कि अलग-अलग कैटेगरी के लोग तय मात्रा से ज्यादा सोना घर में रखते हैं तो उन्हें अपना इनकम प्रूफ देना होगा। इसके साथ ही सोना की खरीदारी या गिफ्ट में मिलने का सबूत देना होगा।
50,000 रुपये से कम की ज्वैलरी टैक्स के दायरे में नहीं आते
मालूम हो कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर विभाग (सीबीडीटी) के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति के पास विरासत में मिले गोल्ड समेत उसके पास उपलब्ध सोने का वैलिड सोर्स है और वह इसका प्रमाण दे सकता है तो वह कितने भी स्वर्ण आभूषण रख सकता है। वैलिड इनकम सोर्स के अलावा तय मात्रा से ज्यादा सोने को जब्त किया जा सकता है। आयकर नियमों के मुताबिक, गिफ्ट के रूप में मिली 50,000 रुपये से कम की ज्वैलरी या विरासत/वसीयत में मिला गोल्ड या गोल्ड ज्वैलरी व ऑर्नामेंट्स टैक्स के दायरे में नहीं आते हैं। हालांकि, आपको यह साबित करना होगा कि यह सोना उपहार या विरासत में मिला है।
गोल्ड गिफ्ट की रसीद भी अनिवार्य
इस बात से भी आपको अवगत करा दें कि अगर किसी को उपहार या विरासत में सोना मिला है तो उसे गोल्ड गिफ्ट करने वाले व्यक्ति के नाम की रसीद समेत अन्य विवरण देना होगा। वहीं अगर वसीयत या विरासत में सोना मिला है तो फैमिली सेटलमेंट एग्रीमेंट, वसीयत या गोल्ड तोहफे के रूप में ट्रांसफर करने का एग्रीमेंट प्रूफ के तौर पर पेश करना होगा। अगर किसी व्यक्ति की कर योग्य सालाना आय 50 लाख रुपये से ज्यादा है तो उसे आभूषणों और उनकी वैल्यू का ब्यौरा आयकर रिटर्न में देना होगा। बता दें कि इनकम टैक्स रिटर्न में आभूषणों की घोषित वैल्यू और उनकी वास्तविक वैल्यू में कोई अंतर न हो। अगर ऐसा हुआ तो व्यक्ति को इस अंतर का कारण बताना होगा।
गोल्ड पर टैक्स का गणित भी जान लें
>> शादी में मिले सोने पर कोई टैक्स नहीं लगता।
>> गोल्ड चाहे रिश्तेदारों से मिला हो या दोस्तों से टैक्सेबल नहीं।
>> शादी में मिले गोल्ड को बेचने पर टैक्स के नियम है।
>> शादी में मिले गोल्ड के बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।
>> गोल्ड तीन साल से पहले बेचा तो शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स।
>> तीन साल के बाद बेचा तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।
>> पुराने गहने को देकर नयी ज्वेलरी उसी गोल्ड से बनवाई तो टैक्स नहीं।
>> पुरानी ज्वेलरी के बदले नई ज्वेलरी पर टैक्स देना पड़ेगा।


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