साल 2020 हर तरह से लोगों को याद रहने वाला है। एक तो वैश्विक महामारी के कारण साल 2020 हमेशा जहन में आने वाला है।
नई दिल्ली: साल 2020 हर तरह से लोगों को याद रहने वाला है। एक तो वैश्विक महामारी के कारण साल 2020 हमेशा जहन में आने वाला है। वहीं अगर दूसरी ओर गोल्ड की बात करें तो इस साल रिकार्ड तोड़ तेजी रही है। जी हां सोना के लिए यह साल 2020 एक बंपर ईयर साबित हुआ है।

सोने में तेजी के अनेक वजह
इस साल सोने को तेजी करने वाली परिस्थितियों की भरमार रही। जब भी भू-राजनीतिक अस्थिरता आती है या वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता होती है, तो सोना सेफ हैवन एसेट के रूप में निवेशकों का प्रिय निवेश विकल्प बन जाता है और इसके परिणामस्वरूप कीमतों में उछाल देखने को मिलता है। तो चलिए अपनी खबर के जरिए आपको बताते है कि इस साल 2020 में सोने का क्या हाल रहा और तो अगले साल इसमें क्या बदलाव हो सकता है।
सोना ने दिया 27 फीसद का रिटर्न
सोना इस साल निवेशकों के लिए सबसे बेहतर परफॉर्म करने वाला एसेट रहा है। साल 2020 में अब तक कॉमेक्स पर सोने ने 23 फीसद का रिटर्न दिया है। वहीं, एमसीएक्स पर 27 फीसद का रिटर्न दिया है। इससे पहले साल 2019 में यूएस-चीन ट्रेड वॉर और अमेरिकी फेड के आक्रामक रुख के चलते सोने की कीमतों में करीब 10 फीसद का उछाल दर्ज किया गया था। महामारी के प्रकोप और लॉकडाउन के चलते मंदी की आशंका के कारण साल 2020 में सोने की खरीद जारी रही और भाव बढ़ते गए।
अगस्त में सोना 56000 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर
बता दें कि कॉमेक्स पर इस समय सोने की कीमतें 1860 डॉलर प्रति औंस के करीब कारोबार कर रही हैं। वैक्सीन के विकास के चलते और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की समाप्ति ने बाजार की अनिश्चितता को कम कर दिया है। यही कारण है कि सोने की कीमतें अगस्त, 2020 के 2075 डॉलर प्रति औंस के अपने उच्चतम स्तर से नीचे आ गई हैं। जबकि एमसीएक्स पर सोने की कीमतें भी अगस्त महीने में 56000 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर को छूने के बाद इस समय 49700 रुपये प्रति 10 ग्राम के आस-पास कारोबार कर रही हैं। एचडीएफसी सिक्युरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (कमोडिटीज) तपन पटेल ने बताया कि इस साल डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट के चलते भारत में सोने की कीमतों को अतिरिक्त सपोर्ट मिला है। उन्होंने बताया कि इस साल में अब तक भारतीय रुपये में डॉलर के मुकाबले करीब तीन फीसद की गिरावट आई है।
अगले साल भी सोने की कीमतों में रहेगी तेजी
अगर आप सोच रहे कि आने वाले दिनों में सोना सस्ता होगा तो ऐसा नहीं है। बता दें कि प्रमुख केंद्रीय बैंकों की आसान मौद्रिक नीतियों और अधिक प्रोत्साहन पैकेजों की घोषणाओं के साथ बैलेंस शीट के विस्तार ने सोने की कीमतों को मध्यम से लंबी अवधि में उच्च स्तर पर कारोबार करने के लिए निरंतर सपोर्ट किया है। यूएस फेड की बैलेंस शीट मार्च के 4.3 ट्रिलियन डॉलर की तुलना में दिसंबर में 7.22 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई, जबकि आगे कई प्रोत्साहन पैकेज आने हैं, जो सोने की कीमतों में अगले दो सालों के लिए मजबूत उछाल का कारण बनेंगे। साल 2008-09 में जब फेड की बैलेंस शीट का तेजी से विस्तार हुआ था, तब भी यह स्थिति देखने को मिली थी। इस तरह जानकारों की मानें तो अगले साल भी सोने की कीमतों में तेजी देखेंगे। ग्लोबल इकोनॉमिक रिकवरी को लेकर चिंताओं के चलते अगले साल कॉमेक्स पर सोना 2150 से 2390 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है। वहीं, एमसीएक्स पर सोने का भाव 57,000 से 63,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है। आर्थिक गतिविधियों और श्रम बाजार के विकास को पुनर्जीवित करने की धीमी गति व अधिक राशि के राहत उपाय सोने की कीमतों में उछाल को जारी रखने के प्रमुख कारण बनें रहेंगे।
सोने में जारी रखें निवेश
वहीं अगर आप निवेश के ख्याल से देखें तो आपके लिए बढ़िया मौका है। एचडीएफसी सिक्युरिटीज के तपन पटेल ने सोने में निवेश करना जारी रखने की सलाह दी है। एक्सपर्ट के मुताबिक हमें गिरावट आने पर निवेश करना जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि निवेशक 1520 डॉलर प्रति औस और 41,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर निवेश के लिए सबसे अधिक जा सकते हैं। निवेशकों को यह समझना चाहिए कि सोना साल दर साल नियमित रिटर्न नहीं देता है, लेकिन हर 3 से 5 साल में एकमुश्त रिटर्न देता है। निवेशक फिजिकल गोल्ड की बजाय गोल्ड ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड आदि के रूप में सोने में निवेश कर सकते हैं।
इन वजहों से जारी रहेगी सोने की कीमतों में तेजी
इस बात की भी जानकारी दें कि ऐसे कई वजह हैं, जिनके चलते सोने में आगे भी तेजी जारी रहेगी। केडिया एडवाइजरी के मैनेजिंग डायरेक्टर व रिसर्च हेड ने बताया कि साल 2008 में आई मंदी के समय भी साल 2007 से 2011 के बीच पांच साल तक सोने में तेजी का दौर देखने को मिला था। उन्होंने कहा कि इस बार भी ऐसा होना चाहिए। इस बात की भी जानकारी दी ब्याज दरों में कमी, विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में राहत पैकेज आने, महंगाई के बढ़ने, बेरोजगारी में वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों में धीमी रिकवरी के चलते आने वाले वर्षों में सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिलेगी।
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