नई दिल्ली। नौकरी चाहे प्राइवेट हो या सरकारी, सभी का प्रोविडेंट फंड (पीएफ) कटता है। यह आपकी नौकरी शुरू होने से लेकर रिटायरमेंट की तय डेट तक कटता है। लेकिन अगर आप बीच में नौकरी छोड़ देते हैं, तो यह कटना बंद हो जाता है। वहीं अगर आप बीच में नौकरी बदल लेते हैं, तो भी आपके पास विकल्प होता है कि आप चाहें अपना पीएफ का पैसा निकाल लें। लेकिन आपका यह फैसला काफी नुकसानदायक होता है। इसलिए अगर नौकरी बदलने के बाद पीएफ का पैसा निकालने की सोच रहे हैं तो एक बार नियमों की जानकारी जरूर कर लें। ऐसा करने के दो बड़े नुकसान हो सकते हैं। एक में आप पर टैक्स लगाया जा सकता है। जबकि दूसरे में आप जीवन भर पेंशन से वंचित हो सकत हैं। ऐसे में अगर आप नौकरी बदल रहे हैं तो कुछ बेसिक नियम जान लें, जिससे अपना भारी भरकम नुकसान बचा सकें।
जानिए टैक्स लगने का नियम
अगर आप नौकरी शुरू करने के 5 साल के पहले ही अपना पीएफ या ईपीएफ निकाल लेते हैं, तो इस मिले पैसे पर इनकम टैक्स लगता है। इनकम टैक्स में छूट का यह फायदा सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलता है, जिनका पैसा लगातार 5 साल जमा होता रहे। पीएफ के पैसों पर यह इनकम टैक्स की छूट सेक्शन 80सी के तहत मिलती है। इसीलिए जैसे ही नौकरी बदलने या अन्य किसी कारण से पैसा 5 साल से पहले निकालते हैं, तो मिले पैसे पर आपको इनकम टैक्स देना होता है। इनकम टैक्स कितना लगेगा, यह आपकी आमदनी से तय होता है। पीएफ से मिला यह पैसा आपकी इनकम में जोड़ा जाता है, और फिर इनकम टैक्स की गणना होती है। और आपका उस वित्तीय वर्ष में जितना भी टैक्स बनेगा, आपको भरना पड़ेगा।
दूसरा बड़ा नुकसान होता है पेंशन का
जिन नौकरीपेशा लोगों का पीएफ या ईपीएफ कटता है, उन लोगों को कुछ शर्तें पूरी करने पर पेंशन मिलने का प्रवधान है। हालांकि ज्यादातर लोगों को यह तो पता है कि पेंशन मिलती है, लेकिन शर्तें नहीं पता हैं। ईपीएस में अगर लगातार 10 साल तक सदस्य का योगदान जमा होता रहता है, तो वह पेंशन का हकदार हो जाता है। यहां पर समझने की जरूरत है कि 10 साल तक लगातार फंड कटे। इन 10 साल के दौरान अगर आप नौकरी बदलते हैं, तो कोई बात नहीं। बस आप अपना पीएफ नई कंपनी में ट्रांसफर करा लें। यह एक बार हो या कई बार, इससे फर्क नहीं पड़ता है। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि पेंशन के हकदार हो जाएं तो नौकरी बदलने पर पीएफ को नई कंपनी में जरूर ट्रांसफर करा लें। ऐसा करने पर जैसे ही आपकी उम्र 58 साल की हो जाएगी, आपकी पेंशन शुरू हो जाएगी।
कैसे होती है पेंशन की गणना
पीएफ लगातर कटाने के बाद पेंशन कितनी मिलेगी, इसकी गणना के लिए फॉर्म्यूला है। यह है
- मंथली पेंशन = (सैलरी में पेंशन का हिस्सा X नौकरी के साल) / 70
जानें यह राइडर
अगर अपने 16 नवंबर 1995 के बाद नौकरी ज्वाइन की है, तो आपके लिए पेंशनेबल सैलरी ईपीएस कॉन्ट्रिब्यूशन बंद करने से पहले के 60 महीनों का औसत होगा। फिलहाल अधिकतम पेंशनेबल सैलरी 15,000 रुपये प्रति माह तय है। हालांकि इसे बढ़ाने की चर्चा चल रही है।
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