Home Loan : रिटायरमेंट के बाद भी इन तरीकों से मिलेगा लोन

आज के समय में हर कोई खुद का घर लेना चाहता है पर महंगाई के इस दौर में घर लेना या खुद का आशियाना लेना आसान नहीं है। ऐसे में आपके घर लेने के सपने को पूरा करता है होम लोन।

नई दिल्‍ली: आज के समय में हर कोई खुद का घर लेना चाहता है पर महंगाई के इस दौर में घर लेना या खुद का आशियाना लेना आसान नहीं है। ऐसे में आपके घर लेने के सपने को पूरा करता है होम लोन। बहुत से लोग घर खरीदने के लिए होम लोन की मदद लेते हैं।

Home Loan Even After Retirement You Will Get Through These Methods

सीनियर सिटीजंस की बात करें तो आमतौर पर देखा जाता है कि रिटायर हो चुके लोगों को बैंक होम लोन देने में परहेज करते हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि सीनियर सिटीजन को लोन नहीं मिलता, लेकिन ये थोड़ा मुश्किल हो सकता है। अपनी खबर के जर‍िए हम आपको कुछ ऐसी बातें बताएंगे ज‍िससे आपको लोन लेने में मदद मि‍लेगी। ताकि इस त्योहारी सीजन पर घर खरीदने का मन बना रहे तो आप खरीद सके।

 अच्‍छी कमाई वाले को-एप्‍लीकेंट को साथ में जोड़ें

अच्‍छी कमाई वाले को-एप्‍लीकेंट को साथ में जोड़ें

को-एप्‍लीकेंट जोड़ने से कर्ज देने वाली संस्‍थान का जोखिम कम हो जाता है। यह कोई ऐसा व्‍यक्ति हो सकता है जिनकी स्‍थायी इनकम हो, कम उम्र हो और अच्‍छा क्रेडिट स्‍कोर हो। रिटायरमेंट के बाद होम लोन लेने की कोशिश करने वाले व्‍यक्ति कम रकम की लोन के पात्र हो सकते हैं। लोन की रकम तब त‍क नहीं बढ़ेगी जब तक वे अच्‍छी कमाई वाले को-एप्‍लीकेंट को नहीं जोड़ते हैं। इसलिए ज्‍यादातर बैंक रिटायरमेंट के बाद होम लोन देने के लिए अच्‍छी कमाई वाले को-एप्‍लीकेंट को साथ में जोड़ने के लिए जोर देते हैं। को-एप्‍लीकेंट को जोड़ने से लोन अप्रूव होने की संभावना बढ़ जाती है।

 सिक्‍योर्ड लोन में होगा ज्‍यादा फायदा

सिक्‍योर्ड लोन में होगा ज्‍यादा फायदा

अगर आप र‍िटायर हो चुके है और होम लोन लेना चाहते है तो बता दें कि जो लोन किसी एसेट की गारंटी पर लिया जाता है, उसे सिक्योर्ड लोन कहते हैं। कोई व्‍यक्ति प्रॉपर्टी, गोल्ड, फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी), शेयर, म्यूचुअल फंड या पीपीएफ आदि जैसे एसेट्स पर लोन ले सकता है। अनसिक्‍योर्ड लोन के मुकाबले सिक्योर्ड लोन के लिए नियम थोड़े नरम होते हैं। इसके साथ ही कम लोन-टू-वैल्‍यू (एलटीवी) रेशियो आपके लिए लोन लेना आसान कर सकता है। इसका मतलब है कि घर खरीदने के लिए आपको अपना कॉन्ट्रिब्‍यूशन ज्‍यादा रखना होगा। कम एलटीवी रेशियो चुनने से प्रॉपर्टी में खरीदार का कॉन्ट्रिब्‍यूशन बढ़ जाता है। इससे बैंक का जोखिम कम होता है। वहीं, कम ईएमआई से लोन की अफोर्डेबलिटी बढ़ती है। इससे आपको लोन मिलने की चांस बढ़ जाएंगे।

 कम अवधि वाला लोन लें

कम अवधि वाला लोन लें

आपको मालूम होगा कि दूसरों की तुलना में सीनियर सिटीजंस को कुछ अतिरिक्त शर्तों को पूरा करना पड़ता है। आवेदन की तारीख से सीनियर सिटीजन की उम्र 70 साल से ज्‍यादा नहीं होनी चाहिए। इस मामले में लोन रि-पेमेंट आवेदक की उम्र 75 साल होने से पहले पूरा हो जाना चाहिए। इसका मतलब यह है कि 70 साल के पेंशन पाने वाले आवेदक को केवल 5 साल का होम लोन मिल सकता है। इसके साथ ही इस बात से भी अवगत करा दें कि लोन का आवेदन करने से पहले अपने क्रेडिट स्कोर की समीक्षा जरूर कर लें। देखा गया है कि ज्‍यादातर बैंक और वित्‍तीय संस्‍थान 750 और इससे अधिक के स्‍कोर को अच्‍छा मानते हैं। क्रेडिट अच्छा स्कोर अच्छा होने से आपको लोन मिलने में आसानी रहेगी।

 पेंशन अकाउंट वाले बैंक से ही लें लोन

पेंशन अकाउंट वाले बैंक से ही लें लोन

सीनियर सिटीजंस को इस बात का खास तौर पर ध्‍यान देना होगा कि ज‍िस बैंक से आपकी पेंशन इनकम आती है आपको इसी बैंक में लोन के लिए आवेदन करना चाहिए। अगर आप उसी बैंक से लोन ले लिए अप्लाई करते हैं तो लोन आसान हो सकता है। वहीं यदि आपकी उम्र 60 साल से ज्यादा है और आपको बैंक से लोन मिलने में परेशानी हो रही है तो एनबीएफसी में लोन के लिए आवेदन करना ठीक रहेगा। क्योंकि वे कम क्रेडिट स्कोर और ज्यादा उम्र वाले ग्राहकों को भी लोन देती हैं। हालांकि एनबीएफसी द्वारा ली जाने वाली ब्याज दर बैंकों द्वारा दी जाने वाली पेशकश की तुलना में अधिक होती हैं।

 लोन लेते वक्‍त इन बातों का भी रखें ध्यान

लोन लेते वक्‍त इन बातों का भी रखें ध्यान

अगर आप भी होम लोन लेने का तो सोच रहे तो इन बातों का ध्‍यान दें। होम लोन लेते समय सिर्फ कम ब्याज दर पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए। ब्याज दर के अलावा आपको लेंडर्स की विश्वसनीयता और अन्य चार्जेज की भी जांच करनी होगी, जो कि हर बैंक में अलग-अलग हो सकते हैं। इसके साथ ही क्रेडिट स्कोर में बदलाव के साथ रिस्क प्रीमियम में भी बदलाव आता है। तो अगर आपने होम लोन लिया है, तो क्रेडिट कार्ड के भुगतान में देरी जैसी लापरवाहियों से आप पर होम लोन ईएमआई का बोझ बढ़ सकता है। इसलिए आप तिमाही के मुताबिक अपना क्रेडिट स्कोर चेक करते रहें।

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