सोने-चांदी में शानदार बढ़त देखने को मिली। साल के शुरुआत में ही सोने में तेजी देखी गई थी, लेकिन महामारी में तेजी का नया रिकॉर्ड बनाया।
नई दिल्ली: सोने-चांदी में शानदार बढ़त देखने को मिली। साल के शुरुआत में ही सोने में तेजी देखी गई थी, लेकिन महामारी में तेजी का नया रिकॉर्ड बनाया सोना नें। महामारी के कारण आर्थिक अनिश्चितता ने इसके चढ़ते भाव को सहारा दिया। इस अनिश्चितता के कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने लिक्विडिटी मानकों में ढील दी और सरकारों ने राहत पैकेज दिया ताकि किसी भी आर्थिक क्षति से निपटा जा सके। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में गोल्ड के भाव में तेजी पिछले साल से ही चली आ रही है, क्योंकि इकोनॉमिक स्लोडाउन के संकेत दिख रहे थे और डॉलर की तुलना में रुपये में गिरावट आ रही थी। रुपये में गिरावट के कारण गोल्ड के भाव में और तेजी रही क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकतम सोना आयात करता है। आज हम अपनी खबर के जरिए बताएगें कि सोने-चांदी में खरीदारी के लिए आपको क्या स्ट्रैटेजी रखनी चाहिए। Gold Silver Rate : सस्ते में सोना खरीदने का बढ़िया मौका, चांदी भी लुढ़की ये भी पढ़ें

गोल्ड में उतार-चढ़ाव होना लाजमी
वहीं सैद्धांतिक तौर पर गोल्ड के भाव और इक्विटीज में विपरीत संबंध है। इसका मतलब यह हुआ कि सामान्यतया जब इक्विटी मार्केट वोलेटाइल रहता है या अनिश्चितता का माहौल बना रहता है तो निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की तरफ आकर्षित होते हैं। गोल्ड एक सुरक्षित निवेश माना जाता है जिसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है लेकिन कभी शून्य नहीं हो सकता है।
गोल्ड में 30 फीसदी तक की बढ़त
2007 से 2012 के बीच गोल्ड के भाव 22 फीसदी सीएजीआर से बढ़े जबकि अगले पांच साल में इसकी चमक काफी कम हो गई और निवेशकों के लिए यह आकर्षक नहीं रह गया। 2020 की बात करें तो वैश्विक स्तर पर गोल्ड के भाव में 1900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गए जो भाव इसके पहले 2011 में था। भारत की बात करें तो अगस्त महीने में सोने ने 56254 रुपये प्रति दस ग्राम का शिखर छुआ था। हालांकि इस समय गोल्ड के भाव 50 हजार रुपये प्रति दस ग्राम के भाव पर चल रहे हैं लेकिन इस साल इसके भाव में 30 फीसदी तक बढ़त आई। इस प्रकार यह बेहतरीन परफॉर्मिंग एसेट क्लास में बना हुआ है।
गोल्ड के भाव में आगे और तेजी देखने को मिल सकती
फिलहाल देखे तो महामारी के कारण अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, गोल्ड की चमक बनी रहेगी। हालांकि यह अनुमान लगाना कठिन है कि गोल्ड के भाव में वैसी तेजी देखने को मिल सकती है जैसी इस साल अब तक रही है। इसके बावजूद ब्याज दरों के साथ विपरीत संबंध और महंगाई व अनिश्चितता के अगेन्स्ट हेज के तौर पर इसकी बड़ी भूमिका के कारण आगे भी इसके भाव में तेजी देखने को मिल सकती है। मिली जानकारी के मुताबिक केंद्रीय बैंक अपनी वर्तमान मौद्रिक नीतियों को बरकरार रखेंगे और सरकार जरूरत पड़ने पर राहत पैकेज जारी रखेगी, इस वजह से भी गोल्ड के भाव को सहारा मिलेगा। निवेशकों की निगाह से देखें तो गोल्ड को पोर्टफोलियो में फाइनेंसियल एसेट के अगेंस्ट हेज के तौर पर एसेट एलोकेशन के प्वाइंट ऑफ व्यू से देखा जाना चाहिए। पोर्टफोलियो में 10-15 गोल्ड में निवेश होना चाहिए।
गोल्ड ईटीएफ निवेश के लिए बेहतर
देखा जाए तो भारत में फिजिकल गोल्ड के प्रति लोगों का आकर्षण अधिक है लेकिन पोर्टफोलियो के उद्देश्य से गोल्ड ईटीएफ, गोल्ड फंड या सोवरेन गोल्ड बांड्स अधिक बेहतर विकल्प है। इन तीनों में से सबसे अधिक फ्लेक्सिबल (लचीला) गोल्ड ईटीएफ है। फिजिकल गोल्ड से तुलना करें तो गोल्ड ईटीएफ से कई फायदे हैं, जैसे कि इसे रखने या चोरी की चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि इसे डीमैट फॉर्म में रखा जाता है। अगर आप भविष्य में गोल्ड की किसी जरूरत के लिए निवेश करना चाह रहा है तो वह महज 1 हजार रुपये के एसआईपी के जरिए भी भविष्य में गोल्ड की यूनिट्स जुटा सकता है।


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