नई दिल्ली, अगस्त 12। पिछले 6 दिनों में करीब 1,800 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट के साथ भारतीय बाजारों में सोने की कीमत में भारी कमजोरी आई है। मगर इससे हुआ यह है कि सोने का रेट सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) योजना 2021-22 सीरीज 5 के इश्यू प्राइस 4,790 रुपये प्रति 10 ग्राम या 47,900 रुपये प्रति ग्राम से भी नीचे आ गया है। इस समय राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमत 47,770 रुपये प्रति 10 ग्राम या 4,777 रुपये प्रति ग्राम पर है। यानी गोल्ड बॉन्ड से प्रति 10 ग्राम 130 रु कम। अब ऐसे में निवेशकों को क्या करना चाहिए आइए जानते हैं।
ऑनलाइन करें निवेश
सबसे पहले तरीका है ऑनलाइन निवेश का। ऑनलाइन निवेशकों के लिए एसजीबी पर 50 रुपये प्रति ग्राम की छूट है, जो ऑनलाइन एसजीबी इश्यू मूल्य को 4,740 रुपये प्रति ग्राम या 47,400 रुपये प्रति 10 ग्राम तक लाता है। मगर यदि पीली धातु की कीमत में गिरावट जारी रहती है, तो यह 13 अगस्त, 2021 को सीरीज 5 के बंद होने तक एसजीबी के ऑनलाइन मूल्य से भी नीचे आ जाएगी। तब आप क्या करें इसका जवाब आगे जानिए।
सामने आ गया बड़ा सवाल
फिजिकल सोने की कीमत एसजीबी इश्यू मूल्य से नीचे गिरने के साथ, सोने के निवेशकों के लिए कौन सा बेहतर निवेश विकल्प होगा? ये एक बड़ा सवाल है। निवेश के तरीके पर फैसला लेने के लिए, फिजिकल सोने के बाजार मूल्य और एसजीबी के इश्यू मूल्य के अलावा, निवेशकों को शामिल जोखिमों और निवेश पर आने वाली लागत पर भी विचार करना चाहिए।
फिजिकल गोल्ड
फिजिकल गोल्ड में नुकसान, चोरी, सेंधमारी आदि के जोखिम होते हैं, इसलिए किसी निवेशक को फिजिकल सोने को सुरक्षित रखने के लिए किराए पर बैंक लॉकर लेने की आवश्यकता होती है। लॉकर किराए का भुगतान करने के अलावा, बैंक लॉकर से बाहर निकाले जाने पर सोने के गहनों के उपयोग के दौरान किसी भी नुकसान के मामले में उसकी रिकवरी सुनिश्चित करने के लिए निवेशक को बीमा भी लेना पड़ सकता है। तो अंदाजा लगाइए कि आखिर लागत कितनी होगी। फिजिकल सोने की सेफ्टी सुनिश्चित करने के लिए इन खर्चों के अलावा, आपको रीसेल के दौरान सोने के आभूषणों का मेकिंग चार्ज का भी नुकसान होगा, जो आपने गहने बनवाने पर खर्च किया होगा।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
गोल्ड एसजीबी आरबीआई जारी करता है। इस पर सरकारी गारंटी होती है। निवेशक को अपने निवेश की सुरक्षा के बारे में जरा भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती। भारत सरकार के बॉन्ड के रूप में सोने में किए गए निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुछ भी खर्च नहीं करने के अलावा, निवेशक को नियमित रिटर्न मिलता है क्योंकि भारत सरकार निवेश की गई राशि पर अर्ध-वार्षिक आधार पर 2.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करती है।
लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन टैक्स
इसके अलावा, व्यक्तिगत निवेशकों को एसजीबी की मैच्योरिटी पर कोई लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन टैक्स नहीं देना पड़ता है, जबकि तीन साल के बाद फिजिकल सोने की बिक्री पर निवेशकों को इंडेक्सेशन के बाद 20 प्रतिशत टैक्स और टैक्स पर 4 प्रतिशत सेस का भुगतान करना पड़ता है।


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