Gold Bond : पिछली बार से भी सस्ता सोना बेच रही सरकार, ऐसे खरीदें

सरकारी स्वर्ण बॉन्ड योजना की छठी और आखिरी सीरीज सोमवार 31 अगस्त निवेश के लिए खुल रही है। इसमें 31 अगस्त से 4 सितम्बर तक गोल्ड बॉन्ड में निवेश किया जा सकेगा।

नई द‍िल्‍ली: सरकारी स्वर्ण बॉन्ड योजना की छठी और आखिरी सीरीज सोमवार 31 अगस्त निवेश के लिए खुल रही है। इसमें 31 अगस्त से 4 सितम्बर तक गोल्ड बॉन्ड में निवेश किया जा सकेगा। अच्‍छी बात तो यह है कि इस बार सरकार पिछली बार से भी सस्ता सोना बेच रही।

From 31 August There Will Be A Chance To Buy Cheap Gold Once Again

इसके तहत प्रति ग्राम सोने की कीमत 5,117 रुपए तय की गई है। जो लोग इनके लिए ऑनलाइन आवेदन करेंगे और डिजिटल पेमेंट के जरिए भुगतान करेंगे, उन्हें प्रति ग्राम 50 रुपए का डिस्काउंट मिलेगा। याद द‍िला दें कि इससे पहले 3 से 7 अगस्त को खुली पांचवीं सीरीज में प्रति ग्राम सोने की कीमत 5,334 रुपए रखी गई थी।

 आरबीआई जारी कर रहा ये बॉन्ड

आरबीआई जारी कर रहा ये बॉन्ड

सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा सॉवरेन गोल्ड बांड जारी किए जाते हैं। आरबीआई के अनुसार बॉन्ड की कीमत 999 शुद्धता वाले सोने के लिए पिछले 3 वर्किंग डेज में साधारण औसत बंद भाव (इंडिया बुलियन एंड जूलर्स एसोसिशन द्वारा प्रकाशित) मूल्य पर आधारित है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में इश्यू प्राइस पर हर साल 2.50 फीसदी का निश्चित ब्याज मिलता है। यह पैसा हर 6 महीने में अपने आप आपने खाते में पहुंच जाता है। फिजिकल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ पर आपको इस तरह का फायदा नहीं मिलता। एनएसई के वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार सॉवरेन 8 साल के मैच्योरिटी पीरियड के बाद इससे होने वाले लाभ पर कोई टैक्स नहीं लगता। इसके साथ ही हर छह महीने पर मिलने वाले ब्याज पर कोई टीडीएस भी नहीं लगता।

 जान लें कितना खरीद सकते हैं सोना

जान लें कितना खरीद सकते हैं सोना

कोई शख्स एक वित्त वर्ष में मिनिमम 1 ग्राम और मैक्सिमम 4 किलोग्राम तक वैल्यू का बॉन्ड खरीद सकता है। हालांकि किसी ट्रस्ट के लिए खरीद की अधिकतम सीमा 20 किग्रा है। बॉन्ड का मेच्योरिटी पीरियड 8 साल का है। लेकिन निवेशकों को 5 साल के बाद बाहर निकलने का मौका मिलता है। यानी आप 5 साल के बाद इसे बेचकर अपना पैसा ले सकते हैं । एनएसई के मुताबिक लोन लेने के दौरान कॉलेटरल के रूप में भी इन सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा ये बांड एनएसई पर ट्रेड भी करते हैं।

 ऐसे करें योजना में इन्‍वेस्‍ट

ऐसे करें योजना में इन्‍वेस्‍ट

यह कमर्शियल बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन, डाकघरों और स्टॉक एक्सचेंज बीएसई और एनएसई द्वारा बेचा जाता है।

 सोने की शुद्धता और सुरक्षा की कोई चिंता नहीं

सोने की शुद्धता और सुरक्षा की कोई चिंता नहीं

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में शुद्धता की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं होती है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के मुताबिक गोल्ड बांड की कीमत इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीरेए) द्वारा प्रकाशित 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने की कीमत से लिंक होती है। इसके साथ ही इसे डीमैट रूप में रखा जा सकता है, जो काफी सुरक्षित है और उस पर कोई खर्च भी नहीं होता है।

 सोने की कीमतों में उतार चढ़ाव जारी

सोने की कीमतों में उतार चढ़ाव जारी

सोने की कीमतों में उतार चढ़ाव जारी है। 10 ग्राम सोने का भाव 54 हजार रुपए का स्‍तर क्रॉस करने के बाद फिर 51 हजार पर आ गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमत 50 हजार से नीचे नहीं आएगी। शुक्रवार को सोने का भाव 268 रुपए बढ़कर 51,170 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को सोने की कीमत 279 रुपए की गिरावट आई थी।

 सोने की खरीदी की यह है लिमिट

सोने की खरीदी की यह है लिमिट

इस योजना के तहत कोई भी व्यक्ति न्यूनतम एक ग्राम का गोल्ड बॉन्ड खरीद सकता है। कोई भी व्यक्ति एक वित्त वर्ष में अधिकतम चार किलोग्राम, अविभाजित हिन्दू परिवार भी अधिकतम चार किलोग्राम और ट्रस्ट 20 किलोग्राम तक का गोल्ड बॉन्ड खरीद सकता है।

 जानि‍ए क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड

जानि‍ए क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड एक सरकारी बांड होता है। इसे डीमैट रूप में परिवर्तित कराया जा सकता है। इसका मूल्य रुपए या डॉलर में नहीं होता है, बल्कि सोने के वजन में होता है। यदि बॉन्ड पांच ग्राम सोने का है, तो पांच ग्राम सोने की जितनी कीमत होगी, उतनी ही बॉन्ड की कीमत होगी। इसे खरीदने के लिए सेबी के अधिकृत ब्रोकर को इश्यू प्राइस का भुगतान करना होता है। बॉन्ड को भुनाते वक्त पैसा निवेशक के खाते में जमा हो जाता है। यह बॉन्ड भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सरकार की ओर से जारी करता है।

 जानकारों का कहना है एक्‍सपर्ट

जानकारों का कहना है एक्‍सपर्ट

बता दें कि एक्‍सपर्ट के मुताबिक फिजिकल गोल्ड कई लिहाज से फायदेमंद है। सबसे पहले तो आपको फिजिकल गोल्ड की तरह गोल्ड बॉन्ड की सुरक्षा और गुणवत्ता की चिंता करने की जरूरत नहीं होती है। दूसरी बात आपको गोल्ड बॉन्ड को रखने के लिए लॉकर लेने और उसपर अलग से खर्च करने की जरूरत नहीं होती है। इसके अलावा आपको 2.5 फीसद सालाना की दर से ब्याज भी मिलता है।

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