नई दिल्ली, सितंबर 17। जब आप नियमित इनकम हासिल करते हैं तो खर्चों का एक स्ट्रक्चर्ड फ्लो भी होना महत्वपूर्ण है। खर्चों को तीन कैटेगरियों में बांटा जा सकता है। जरूरत यानी वे जरूरी खर्चे जिन्हें रोका नहीं जा सकता। वहीं ख्वाहिश यानी ऐसे खर्च जो संतुष्टि / खुशी देते हैं लेकिन जरूरी नहीं हैं। वहीं बचत, जो कि आपकी आय से एक निश्चित आवंटन है, जिसे बुरे दिनों के लिए संरक्षित करने की आवश्यकता होती है। आज के इस दौर में जरूरत की चीजें महंगी होती जा रही हैं। जब ज़रूरतें आपकी ज़्यादातर इनकम को ले लेती हैं, तो आप यह कैसे सुनिश्चित करते हैं कि आपके पास ज़रूरतों और बचतों के लिए आवंटित करने के लिए पर्याप्त बचत हो? यहां हम आपको इसी के लिए एक आसान फॉर्मूला बताएंगे।
50-30-20 फॉर्मूला
जानकार एक महत्वपूर्ण नियम के बारे में बताते हैं, जिसका खर्च करते समय पालन करना चाहिए। ये 50-30-20 का फाइनेंशियल प्लानिंग का नियम है। यह मौलिक बजट नियम तीन कैटेगरियों के खर्चों के लिए आपकी टैक्स के बाद वाली इनकम का एक अलग प्रतिशत आवंटित करता है। नियम के अनुसार किसी को अपनी आय का 50% आवश्यक या जरूरतों के लिए आवंटित करना होगा। इन आवश्यक चीजों में मासिक किराया, घरेलू खर्चे, किराने का सामान, बीमा प्रीमियम, ईएमआई भुगतान और बच्चों की स्कूल फीस जैसे खर्च शामिल हो सकते हैं।
यहां खर्च करें 30 फीसदी
आपकी आय का 30% ख्वाहिशों के लिए आरक्षित होना चाहिए। इनमें मनोरंजक गतिविधियां, परिवार के साथ आउटिंग, शौक पूरे करना, रेस्तरां में भोजन करना आदि शामिल हो सकते हैं। हालांकि ये घटनाएं अनुभव करने के लिए मजेदार हैं, मगर आवश्यक नहीं हैं और यदि आवश्यक हो तो इनके साथ समझौता किया जा सकता है।
आय का 20% बचत
अंत में, आपकी आय का 20% बचत के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। इन बचतों में आपकी जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर आपकी पसंद का कोई भी निवेश शामिल हो सकता है।
खर्चों को आवंटित करना जरूरी
जब आपके पास एक निश्चित डिस्ट्रिब्यूशन होता है, जिसे आप जानते हैं कि आप विभिन्न कैटेगिरयों के खर्चों को आवंटित करने जा रहे हैं, तो आपके लिए हर महीने एक बजट बनाना और उस पर टिके रहना आसान हो जाता है। जैसे-जैसे आय बढ़ती है, कोई भी इन दिशानिर्देशों के आधार पर फंड के आवंटन को तीन श्रेणियों में बदल सकता है।
ये भी है जरूरी
वित्तीय लक्ष्य बनाएं और 20 फीसदी निवेश से उसे पूरा करने के लिए कोशिश करें। बजट पर टिके रहें। पर अपने वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आपको अपनी मानसिकता बदलनी होगी। एक बार जब आप मानसिक रूप से तैयार हो जाएंगे, तो लक्ष्य निर्धारित करना शुरू करें। तब ये आपको आसान भी लगेगा। नई आदतों को अपने नेचर में ढालना कठिन हो सकता है, मगर यदि आप ऐसा नहीं करेंगे तो बजट पर टिके रहने में दिक्कत होगी। जीवन भर इन आदतों को बनाए रखने के बारे में सोचना बेकार है। आपको अपने लक्ष्य के हिसाब से सोचना चाहिए। अपनी आदतों को बदलने में परिवार का सपोर्ट लें। यहां उनकी मदद खर्चे कम करने में लेना जरूरी है।
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