नई दिल्ली, जुलाई 25। पिछले कुछ समय से वैश्विक स्टॉक मार्केट में अस्थिरता बनी हुई है। इस स्थिति में शेयर बाजार में निवेश करने से नुकसान होने का खतरा ज्यादा है। फिलहाल, जो निवेशक रिस्क लेने के लिए तैयार नहीं हैं उन लोगों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) निश्चित और अच्छा रिटर्न पाने का शानदार रास्ता है। फिक्स डिपॉजिट में पैसे डूबने का कोई चांस नहीं होता है। इस लिहाज से एफडी निवेशकों के लिए मानसिक तौर पर सुकून वाला निवेश माध्यम है। देश में आज भी निवेश के लिए एफडी एक बेहतरीन विकल्प है। मौजूदा समय को देखते हुए अगर आप भी एफडी में निवेश करना चाहते हैं तो 5 बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
ब्याज दर की कर ले जांच
अलग- अलग बैंकों में एफडी के लिए ब्याज दर अलग-अलग हो सकता है। दरअसल सभी बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट की अवधि, निवेश की राशि और निवेशक की उम्र के आधार पर ब्याज दर तय करते हैं। फिक्स डिपॉजिट पर ब्याज दर निवेश की पूरी अवधि के लिए एक समान रहती है। बैंकों में वार्षिक ब्याज दर सामान्य तौर पर 4 प्रतिशत से 8 प्रतिशत तक होती है, लेकिन एफडी पर यह अधिक हो सकती है। वहीं वरिष्ठ नागरिकों को बैंक नियमित दर की तुलना में 0.5% अधिक ब्याज देते है।
एफडी के रिटर्न पर देना होगा टैक्स
आयकर रिटर्न भरते वक्त आपको एफडी से होने वाली आय की जानकारी देनी होगी, क्योंकि फिक्स डिपॉजिट की कमाई पूरी तरह टैक्सेबल होती है। रिटर्न फॉर्म में आपको अपनी कुल आय में एफडी से जो ब्याज मिलता है उसे जोड़ना होगा। ब्याज दर के साथ-साथ बैंक की विश्वसनीयता पर ध्यान देना भी जरूरी है। आम तौर पर एफडी सुरक्षित होती है, क्योंकि कोई भी राष्ट्रीय बैंक कभी एफडी राशि का पेमेंट करने में चूका नहीं है।
समय से पहले न तोड़े एफडी
यदि आप अपनी फिक्स डिपॉजिट को तय अवधि से पहले तोड़ते हैं तो उस स्थिति में आपको जुर्माना भरना होगा। आम तौर पर बैंक जुर्माने के रूप में ब्याज दर को 0.5% से 1% तक कम कर देत हैं। जुर्माना वसूलने के लिए हर बैंक के पास अपने नियम होते हैं। इसलिए एफडी के समय आप उन बैंकों की तलाश करें जमा तय समय से पहले निवेश पूंजी निकालने पर कम जुर्माना लगे।
मिल सकता है लोन
एफडी में निवेश करने का एक फायदा यह भी है कि आप जरूरत पड़ने पर एफडी के अगेंस्ट लोन भी ले सकते हैं।


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