EPFO for Medical Treatment : हेल्थ से जुड़ी कोई भी परेशानी कभी भी खड़ी हो सकती है। ऐसे में आपका कितना खर्च हो जाएगा यह नहीं कहा जा सकता है। कई बार तो इंश्योरेंस के पैसे भी कम पड़ जाते हैं।
अगर आप जॉब करते हैं और यह चाहते हैं कि आपको मेडिकल ट्रिटमेंट के समय वित्तीय परेशानी का सामना न करना पड़े तो आप ईपीएफ की मदद ले सकते हैं।

जी हां, नौकरीपेशा लोगों को हर महीने ईपीएफओ में कॉन्ट्रीब्यूशन देना होता है। ऐसे में आप अपने प्रोविडेंट फंड से आंशिक निकासी करने की सुविधा की मदद से आर्थिक परेशानी को दूर कर सकते हैं।
मेडिकल ट्रिटमेंट के लिए इतने पैसे निकाल सकते हैं
ईपीएफओ से खुद के इलाज या जीवनसाथी, बच्चों और पैरेंट्स की किसी बीमारी के इलाज के लिए पैसे निकालने के लिए किसी तरह का लॉक-इन पीरियड नहीं रखा गया है और न ही न्यूनतम सेवा की कोई अवधि है।
इलाज के लिए ईपीएफओ मेंबर ब्याज के साथ योगदान की राशि का छह गुना या मासिक वेतन का छह गुना (जो भी कम हो), वो रकम निकाल सकते हैं। आप अपने लिए, जीवनसाथी, बच्चों और पैरेंट्स के लिए ही ईपीएफओ से पैसे निकाल सकते हैं।
ऐसे कर सकते हैं आंशिक निकासी
आप अपने बैंक की वेबसाइट से ऑनलाइन PPF निकासी फॉर्म ( फॉर्म C ) डाउनलोड करें या आप इसे बैंक शाखा से प्राप्त कर इसे भरें।
फॉर्म C के साथ PPF पासबुक की एक कॉपी अटैच करें और इसके बाद फॉर्म को संबंधित बैंक शाखा में जमा करें।
अगर पीपीएफ अकाउंट को प्री-मैच्योर क्लोज कराना है
पीपीएफ खाते को प्री-मैच्योर बंद कराने के लिए आपको एक लिखित आवेदन बैंक खाते की होम ब्रांच में जमा करना होता है।
इसके बाद इस आवेदन में आपको वो वजह बतानी होती है कि आप अकाउंट को किस कारण से बंद कर रहे हैं।
आपको आवेदन के साथ कुछ दस्तावेज भी अटैच करने होते हैं। इसमें पीपीएफ पासबुक की एक कॉपी होनी चाहिए।
इसके साथ ही अगर बीमारी के इलाज के लिए खाता बंद कर रहे हैं तो मेडिकल अथॉरिटी के दिए गए डॉक्यूमेंट जरूरी होते हैं। वहीं, उच्च शिक्षा के लिए अगर आप खाता बंद कर रहे हैं, तो फीस की रसीद, किताबों के बिल और एडमिशन को कन्फर्म करने वाले डॉक्युमेंट्स और निधन के मामले में डेथ सर्टिफिकेट लगाना होता जरूरी है।
डॉक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन होने के बाद खाता बंद करने का आवेदन स्वीकार किया जाता है। इसके बाद आपका अकाउंट बंद कर दिया जाता है लेकिन पेनल्टी अमाउंट काट लिया जाता है।
आपको बता दें कि पीपीएफ का मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है। लेकिन इसे इसके बाद भी प्रत्येक पांच-पांच साल (यानी पांच-पांच साल के ब्लॉक में) के लिए या तो योगदान (contribution) के साथ या बिना योगदान के जारी रखा जा सकता है।
पीपीएफ में पैसे निवेश करने के होते हैं कई फायदे
पीपीएफ (PPF) में अच्छा ब्याज मिलता है, वहीं निवेश किए जाने वाले पैसे, उस पर मिलने वाले ब्याज और मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने पर मिलने वाली रकम पर टैक्स छूट भी मिलती है।
इसी कारण से यह निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय है। आपको बता दें कि PPF का मैच्योरिटी पीरियड 15 साल का होता है।


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