नयी दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफओ) के नियमों में बदलाव से कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) से आंशिक तौर पर या पूरा पैसा निकालना काफी आसान और तेज हो गया है। अब ग्राहक अपने ईपीएफ खाते से कुछ पैसा निकालने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। दिसंबर 2018 में ईपीएफओ ने नौकरी छोड़ने के बाद एक महीने के भीतर ग्राहकों को कुल ईपीएफ राशि में से 75 प्रतिशत तक निकालने की सुविधा शुरू कर दी थी। यदि कोई कर्मचारी दो महीने से अधिक समय तक बेरोजगार रहता है तो वह अपने ईपीएफ खाते में 100 प्रतिशत पैसा निकाल सकता है। मगर कुछ ऐसी चीजें हैं जिन पर आपको ईपीएफ से पैसा निकालने से पहले ध्यान देना चाहिए।
लग सकता है टैक्स
यदि कोई कर्मचारी सर्विस के पांच साल पूरे नहीं करता तो ईपीएफ से निकाली गयी राशि पर टैक्स लगता है। यदि आपने अपने ईपीएफ खाते को पिछले नियोक्ता से ट्रांसफर कर दिया है तो टैक्स के लिए कुल सर्विस अवधि की गणना करते समय आपकी पिछली और नयी दोनों जगह की नौकरी के समय को जोड़ा जाएगा।
चार हिस्सों में होता है पैसा
जिस साल में आप पैसा निकाल रहे हैं अगर उस साल में भी आपकी कुल सर्विस अवधि 5 साल से कम है तो भी निकाली गई राशि पर टैक्स लगता है। यहां ध्यान दें कि ईपीएफ खाते में मौजूद राशि में चार हिस्से शामिल होते हैं। इनमें कर्मचारी का योगदान, नियोक्ता का योगदान और दोनों योगदानों पर प्राप्त ब्याज शामिल है।
इस तरह होगा नुकसान
यदि निरंतर सर्विस की अवधि पांच साल से कम है तो नियोक्ता के ईपीएफ में किए गए योगदान और इस पर मिले ब्याज को इनकम कैटेगरी में रख कर टैक्स लगेगा। पांच साल से पहले पैसा निकालने की स्थिति में ईपीएफ में ग्राहक के खुद के योगदान पर प्राप्त ब्याज को 'अन्य स्रोतों से आय' के तौर पर टैक्स लगाया जाएगा।
कितना लगेगा टीडीएस
पांच साल के निरंतर रोजगार से पहले पैसा निकालने पर 10 फीसदी की दर से टीडीएस लगाया जाएगा। हालांकि अगर निकासी राशि 50,000 रुपये से कम है या कंपनी अपना कारोबार बंद करती है तो टीडीएस नहीं काटा जाएगा।
पीएफ पर नया रूल
सरकार ने बजट में पीएफ योगदान पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि इससे सभी पीएफ खाताधारक प्रभावित नहीं होंगे। सरकार के नये प्रस्ताव के तहत किसी वित्त वर्ष में अधिकतम 2.5 लाख रुपये तक पीएफ योगदान पर होने वाली ब्याज आय ही कर मुक्त रहेगी। यानी यदि कोई पीएफ में किसी
वित्त वर्ष में 2.50 लाख रुपये से अधिक का योगदान करता है तो उस पर मिलने वाले ब्याज को कर योग्य आय में शामिल कर टैक्स लगाया जाएगा।


Click it and Unblock the Notifications