नई दिल्ली। रिलाइंस इंडस्ट्रीज की 43वीं वार्षिक आम सभा (एजीएम) मुकेश अंबानी ने अपनी कंपनी की वित्तीय स्थिति से अपने निवेशकों सहित दुनिया को अवगत कराया। इसी के साथ कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने रिलायंस की भविष्य की योजनाओं का खुलासा किया। यह एक साधारण सी बात है। हर सूचीबद्ध कंपनी हर साल ऐसा ही करती है। लेकिन मुकेश अंबानी की घोषाणाओं के बाद चीन की भारत में काम कर रही कंपनियों की धड़कनें बढ़ गई हैं। जानकारों का मानना है कि मुकेश अंबानी की घोषणाओं में ऐसा बहुत कुछ छिपा है, जिसे चीन की कंपनियां सबसे पहले समझ पा रही हैं। यही कारण है कि उनकी परेशानी बढ़ी है।
आइये जानते हैं कि आखिर इसका कारण क्या है।
जानिए रिलायंस की सफलता का फार्मूला
दुनिया में माना जाता है कि चीन का सामान सबसे सस्ता होताा है। लेकिन किसी का ध्यान भारत की कंपनी रिलायंस पर नहीं गया है। यह कंपनी सस्ते का मायने जानती है। आज से करीब 20 साल पहले जब देश में मोबाइल सेवाएं लांच हुईं थी, तब धीरूभाई अंबानी ने इस सस्ते का फार्म्यूला मुकेश अंबानी को बताया था। यही कारण था कि उस समय देश में रिलायंस इनफोकाम सबसे तेज उभरती हुई कंपनी बनी थी। लेकिन परिवार में दिक्कतों की वजह से बाद में यह कंपनी अनिल अंबानी के हवाले हो गई, और आगे क्या हुआ यह सभी को पता है। लेकिन उस वक्त जब मुकेश अंबानी ने धीरूभाई अंबानी को मोबाइल फोन कंपनी का प्लान समझाया तो उन्होंने उसकी तारीफ तो की थी, लेकिन समझाया था कि देश में वहीं मोबाइल कंपनी चल सकती है, जो पोस्ट कार्ड की कीमत पर कॉल की सुविधा दे। उस वक्त देश के पोस्ट ऑफिस में 15 पैसे का एक पोस्ट कॉर्ड मिलता था। मुकेश अंबानी ने यही गांठ बांधी और रिलायंस इनफोकॉम का ढांचा तैयार किया। उस वक्त रिलायंस न सिर्फ सस्ती कॉल दी बल्कि 500 रुपये में हैंडसेट भी दिया था।
यही कहानी फिर से दुहराई जाने वाली है
मुकेश अंबानी ने अपने निवेशकों को इस मीटिंग में बताया है रिलायंस और गूगल मिलकर सस्ते मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार करेंगे। यानी सीधे सीधे नहीं कहा कि यह दोनों मिलकर देश में सस्ते हैंडसेट बनाएंगे। अभी तक देश में सस्ते हैंडसेट बाजार में चीन की कंपनियों की दखल है। इन चीन की कंपनियों को अच्छी तरह से पता कि जब एक दशक से ज्यादा जमी कंपनियां रिलांयस जियो को नहीं रोक पाईं तो उनकी क्या हैसियत है। यानी अगर रिलायंस सस्ते हैंडसेट बनाएगी तो उसके सामने टिकना कठिन है। यही चीन की मोबइल कंपनियों की चिंता का कारण है। यह चीन की कंपनियां जानती हैं कि रिलायंस जियो ने जैसे शुरुआत में फ्री में अनलिमिटेड डेटा दिया था, वैसे ही बाजार में छाने के लिए कुछ भी हो सकता है।
अभी चीन की कंपनियों का दबदबा है देश में
चीन का भारतीय मोबाइल उद्योग और बाजार में दबदबा रहा है, लेकिन जियो को बाजार का समीकरण बदलने के लिए जाना जाता है। जियो जब से बाजार में आया तब से भारत में इंटरनेट, डेटा और कॉलिंग की दरों में जोरदार क्रांति दिखाई दी है। अब रिलायंस जियो के स्मार्टफोन बाजार में उतरने की तैयारी दिखा रहा है और इसके लिए जियो ने गूगल और क्वालकॉम के साथ भागादारी की है जिससे भारतीय बाजारों में अपना पैर जमा चुकी चीनी मोबाइल कंपनियां सदमे आ गई हैं।
ये हैं देश में चीन की कंपनियां
इस समय भारतीय बाजारों में शाओमी, रियलमी, ओप्पो, विवो जैसे चीनी ब्रांड का कब्जा है। इसका कारण ये है कि एंट्री लेवल के फोन के कारण ये कंपनियां बहुत लोकप्रिय हुई हैं। बाजार की हिस्सेदारी में भी चीनी कंपनियों का दबदबा है। महाराष्ट्र टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक मिड रेंज और प्रीमिय रेंज फोन में चीनी कंपनियां अपना वर्चस्व बना रही हैं फिर भी फिलहाल किफायती फोन के संबंध में चीन के फोन के लिए अलावा ग्राहकों के पास काफी कम विकल्प मौजूद हैं।


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