नई दिल्ली। फूलों का नाम सुनते ही अनेक प्रकार के सुगंध की अनुभूति होने लगती है, लेकिन उत्तर प्रदेश के वजीरगंज के फूलों को महिलाओं ने हाथ क्या लगाया, गोंडा की जमीन ही महक उठी। खेतों की क्यारियों में उगने वाली फूलों की महक से अब महिलाओं की जिंदगी भी संवारने लगी है। अच्छी आमदनी से परिवार में चटख रंग भरने लगे हैं। फूल उनकी जिंदगी में खुशहाली ला रहे हैं।
दूसरों शहरों को भेजे जा रहे यह फूल
वजीरगंज के गेंदा व गुलाब लखनऊ, कानपुर व कन्नौज को भा रहे हैं। यहां की महिला किसान अपने बलबूते अपनी जिंदगी को संवार रही हैं। पारंपरिक खेती के स्थान पर फूलों की हाईटेक खेती अपनाकर अपनी मेहनत और लगन से यहां की महिलाएं कृषि क्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल कर रही हैं। आइये जानते हैं कैसे फूलों की खेती ने इलाके की तस्वीर बदल कर रख दी है।
जानिए 3 बीघा जमीन पर कितनी कमाई
गेंदा की खेती करने वाली ताहिरुन्निसां ने के अनुसार वह 3 बीघे जमीन पर गेंदा की खेती करती हैं। एक बीघे में लगभग 10 हजार का खर्च आता है। इसमें निराई, गोड़ाई और खाद सिंचाई सबका खर्च शामिल है। इसके बीज ये लखनऊ से लाती हैं। एक बीघे में करीब 25 हजार का मुनाफा हो जाता है। फूलों की इस खेती में उनके पति भी मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि गेंदा की फसल ढाई से तीन माह में तैयार हो जाती है। इसकी फसल दो माह में प्राप्त हो जाती है।
त्योहारों और शादियों में बढ़ती है मांग
ताहिरुन्निसां ने बताया कि त्योहारों और शादी-निकाह में जब इसकी मांग बढ़ती है, तो हमें इसके अच्छे दाम मिलते हैं। इसकी मांग पूरे साल कई मौकों और जश्नों में रहती है। पहले मैं दूसरों के खेतों में काम करती थीं। उसके बाद धीरे-धीरे अपनी खेती करने लगीं। इससे आमदनी भी बढ़ी है।
सफलता की एक और कहानी
फूलों की खेती करने वाली एक और महिला शाहजहां ने बताया कि वह गेंदा और गुलाब, दोनों की खेती करती हैं। उन्होंने 22 बीघा खेत दूसरों से किराये पर ले रखे हैं। पहले वह दूसरे के खेतों में मजदूरी किया करती थीं। लेकिन अब धीरे-धीरे वह अपनी खेती करने लगी हैं। उन्होंने कहा, "मैं आधे में गुलाब और आधे में गेंदा की खेती करती हूं। उनके अनुसार गुलाब का पौधा एक बार लगाने पर दो साल तक फूल देता है। पौधा लगाने के बाद चार महीने में फूल देना शुरू कर देता है। उनके अनुसार हमारे खेतों में हर दिन करीब 30 से 40 किलो तक फूल निकलते हैं, जो लगभग तीन या चार हजार रुपये तक में बिक जाते हैं। इसमें भी खाद, पानी, निराई-गुड़ाई का करीब 10 से 12 हजार रुपये का खर्च आता है। इसके बाद भी मुनाफा ठीक हो जाता है। इसी खेती की बदौलत बच्चों की पढ़ाई अब अच्छे स्कूल में होने लगी है।
इनकी भी जिन्दगी फूलों की खेती ने बदली
वजीरगंज की कुसुम व फातिमा ने भी गेंदा फूल की खेती को अपनी आय का जरिया बना लिया है। कठिन परिश्रम से उन्होंने न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि पक्का मकान भी बनवाया। उन्होंने अपने बच्चों को जिला मुख्यालय के एक प्राइवेट स्कूल में तालीम के लिए दाखिला कराया है।
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