Budget 2025-26 Capital Expenditure: वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 1 फरवरी 2025 को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। केंद्र या राज्य सरकारें हर साल बजट लाती हैं। अक्सर बजट पेश करते समय ऐसे कई कठिन शब्दों का इस्तेमाल होता था जो आम जनता नहीं समझ पाती है। 'कैपिटल एक्सपेंडिचर' भी एक ऐसा ही शब्द है जिसे समझना आपके लिए बहुत जरूरी है। तो चलिए सिर्फ 3 प्वाइंट्स में आपको बताते हैं कि आखिर 'कैपिटल एक्सपेंडिचर' Capital Expenditure क्या होता है।

1. कैपिटल एक्सपेंडिचर दो शब्दों से मिलकर बिना है। इसमें कैपिटल का मतलब है पूंजी और एक्सपेंडिचर का मतलब है खर्च यानी पूंजीगत व्यय होता है। इसे कैप एक्स (CAPEX) भी कहते हैं।
2.ये एक ऐसा सरकारी खर्च है जो कि एसेट यानी संपत्ति बनाता है। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि लॉन्ग टर्म के डेवलोपमेंट पर होने वाला खर्च कैपिटल एक्सपेंडिचर है। आपको बता दें कि ऐसा कोई भी कॉस्ट जो इंफ्रा, मशीनरी, टेक्नोलॉजी इक्विपमेंट को बनाने, मेंटेन करने या अपग्रेड करने में जाता है वो कैपिटल एक्सपेंडिचर माना जाता है। साथ ही सरकार अगर कोई लाइसेंस या पेटेंट पर खर्च करती है तो वो भी कैपिटल एक्सपेंडिचर में ही आता है।
3.कैपिटल हमारे देश के आर्थिक विकास में एक अहम किरदार निभाता है, क्योंकि एक तरफ तो ये फिक्स एसेट बनाता है और दूसरी तरफ इससे रोजगार भी मिलता है। कैपिटल एक्सपेंडिचर का इस्तेमाल कई कामों के लिए किया जाता है इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर के नए प्रोजेक्ट से लेकर मौजूदा प्रोजेक्ट को अपग्रेड करने और प्रोजेक्ट के मेंटेनेंस के लिए होता है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर लोन के पेमेंट के लिए भी कैपिटल एक्सपेंडिचर का इस्तेमाल होता है।
उदाहरण से भी समझिए कैपिटल एक्सपेंडिचर का मतलब
मान लीजिए जब सरकार किसी भी जमीन को खरीदती है तो ये कैपिटल एक्सपेंडिचर अब वहां बिल्डिंग को बनाती है तो इसमें मशीनें लगती है। इस तरह एसेट बनाने पर खर्च सरकार करती है जोकि इस्तेमाल आम जनता करती है। इसका फायदा आपको लॉन्ग टर्म के लिए होता है।
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