Budget 2024: डायरेक्ट और इन-डायरेक्ट टैक्स में क्या अंतर? दूर करें कनफ्यूजन

Budget 2024: डायरेक्ट टैक्स प्रत्यक्ष कर वह टैक्स होता है जो इंसान अपनी इन्कम यानी अपनी कमाई के ऊपर देना होता है वहीं अगर आपका कोई भी इन्कम का सोर्स नहीं है तो आपको टैक्स नहीं देना होगा, डायरेक्ट टैक्स के अन्तर्गरत आने वाली देनदारी को इंसान या कोई भी संस्था ट्रांसफर नहीं कर सकती है। कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स इस टैक्स के दायरे में आता है ये उदाहरण हैं।

Budget 2024

डायरेक्ट टैक्स कितने तरह के होते हैं

जो इंसान नौकरी पेशा करता है उससे मिलने वाली इनकम पर इनकम टेक्स लगता है। जिस तरह आपकी इनकम होगी उसके मुताबिक इनकम टैक्स का स्लैब बदलता है, जिस व्यक्ति की इनकम ज्यादा होगी उसपर टैक्स का भर भी ज्यादा होगा। अगर आपकी इनकम कम है तो तो आप पर टैक्स कम लिया जाएगा वहीं इतना ही नहीं आपको कई छूट के दायरे भी मिलते हैं।

आपको एक चीज के बारे में पता होना चाहिए संस्था के फायदे पर लगने वाले टैक्स को कॉर्पोरेट टैक्स कहते हैं। कॉर्पोरेट टैक्स की दर इस बात निर्भर करती है कि संस्था विदेशी या फिर घरेलू है। कॉर्पोरेट टैक्स पर सरचार्ज और सेस लिया जाता है। इसके अलावा कैपिटल गेन टैक्स, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स और वेल्थ टैक्स को भी डायरेक्ट टैक्स के दायरे में आता है।

किस लिए लगाया जाता है डायरेक्ट टैक्स

डायरेक्ट टैक्स सरकारी खर्च को पूरा करने के फंड उपलब्ध करने के काम आता है और इससे आय को अर्थव्यवस्था में उचित तरीके से बांटने में मदद मिलती है। डायरेक्ट टैक्स से होने वाली आय को सरकार द्वारा सावर्जनिक वस्तुओं और सेवाओं जैसे बुनियादी ढांचे और शिक्षा के साथ आय में होने वाली असमानता को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है।

इनडायरेक्ट टैक्स (अप्रत्यक्ष कर) क्या होता है

इनडायरेक्ट टैक्स उत्पादित वस्तुओं और आयात-निर्यात वाले सामानों पर उत्पाद चार्ज सीमा चार्ज और सेवा चार्ज के माध्यम से लगता है, व्यापार टैक्स, सेवा टैक्स, सीमा चार्ज, उत्पाद चार्ज, मनोरंजन शुल्क जैसे कर इनडायरेक्ट टैक्स में आते हैं। इनडायरेक्ट टैक्स में कर का दबाव और कर बोझ अलग-अलग व्यक्तियों पर होता है, इसे ऐसे भी समझ सकते हैं,

कि इनडायरेक्ट टैक्स आम तौर पर कोई उत्पादक या रिटेलर में किसी एक एंटिटी द्वारा कलेक्ट किया जाता है और सरकार को भुगतान किया जाता है लेकिन वस्तु या सेवा की फाइनल खरीद कीमत के हिस्से के रूप में इसे उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाता है। सभी तरह के इनडायरेक्ट टैक्सेज को GST में समाहित कर दिया गया है। भारत सरकार द्वारा 1 जुलाई 2017 को वस्तु और सेवा कर (GST) पेश किया गया था, जिसमें सभी प्रकार के अप्रत्यक्ष कर शामिल थे।

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