आज 7 मई, 2026 है और अगर आप Bagmane Prime Office REIT IPO में पैसा लगाना चाहते हैं, तो आज आखिरी मौका है। यह इस साल के सबसे बड़े मार्केट इवेंट्स में से एक है। Bagmane REIT IPO 2026 भारत में इस साल की सबसे बड़ी रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट लिस्टिंग है। इसके साथ ही Bagmane Prime Office REIT भारत का छठा लिस्टेड REIT बन जाएगा, जो एम्बेसी ऑफिस पार्क्स, माइंडस्पेस और ब्रुकफील्ड जैसे बड़े नामों की फेहरिस्त में शामिल होगा। अगर आप पहली बार निवेश कर रहे हैं, तो ध्यान रखें कि आज शाम 5 बजे यह विंडो बंद हो जाएगी।
Bagmane REIT IPO: निवेश से पहले जान लें ये जरूरी बातें
यह IPO 5 मई, 2026 को खुला था और आज 7 मई को बंद हो रहा है। इसके लिए 95 रुपये से 100 रुपये प्रति यूनिट का प्राइस बैंड तय किया गया है। कम से कम 150 यूनिट्स का एक लॉट लेना होगा, जिसकी कीमत 15,000 रुपये है। इस इश्यू में 2,390 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू और 1,015 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। शेयरों का अलॉटमेंट 12 मई को हो सकता है, जबकि रिफंड 13 मई को और लिस्टिंग 15 मई को होने की उम्मीद है।

UPI के जरिए Bagmane REIT IPO में कैसे करें अप्लाई?
आप Bagmane REIT के लिए UPI या ASBA के जरिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। ASBA की सुविधा आपके बैंक के नेट बैंकिंग पोर्टल पर उपलब्ध है, जबकि UPI का विकल्प उन ब्रोकर्स के पास मिलता है जो बैंकिंग सेवाएं नहीं देते। निवेशक Zerodha, Groww, Upstox, Angel One या ICICI Direct जैसे प्लेटफॉर्म्स पर जाकर IPO सर्च कर सकते हैं, प्राइस बैंड चुन सकते हैं और UPI या ASBA के जरिए बिड लगा सकते हैं।
निवेशकों को लॉट की संख्या, बिडिंग प्राइस और अपना UPI ID डालना होगा। इसके बाद बिड कन्फर्म करें और अपने UPI ऐप पर आए पेमेंट मैंडेट को एक्सेप्ट करें ताकि फंड ब्लॉक हो सके। ध्यान रहे कि UPI मैंडेट कन्फर्म करने की समय सीमा आज, 7 मई 2026 को शाम 5:00 बजे तक ही है। अगर आप यह डेडलाइन चूक गए, तो आप इस इश्यू में हिस्सा नहीं ले पाएंगे, इसलिए देरी न करें।
Bagmane REIT IPO के पीछे पोर्टफोलियो की ताकत
दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस पोर्टफोलियो की ऑक्यूपेंसी 98.8 प्रतिशत रही है, जो भारत के लिस्टेड ऑफिस REITs में सबसे ज्यादा है। इसके किरायेदारों में गूगल, अमेजन, एनवीडिया और सैमसंग जैसे ग्लोबल टेक दिग्गज शामिल हैं। Bagmane Prime Office REIT के पास छह बिजनेस पार्क्स में कुल 19.6 मिलियन वर्ग फुट का लीजेबल एरिया है। कमर्शियल रियल एस्टेट में इतनी ज्यादा ऑक्यूपेंसी मिलना वाकई बड़ी बात है।
रेगुलर इनकम चाहने वाले निवेशकों के लिए, वित्त वर्ष 2027 में 6.2 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2030 तक 7.5 प्रतिशत तक का पेआउट यील्ड मिलने का अनुमान है (अपर प्राइस बैंड के आधार पर)। निवेशक अक्सर ऐसे IPO में स्थिर कमाई के लिए पैसा लगाते हैं, क्योंकि REITs के लिए अपनी कमाई का कम से कम 90 प्रतिशत हिस्सा बांटना अनिवार्य होता है। यही नियम REITs को आम शेयरों से अलग बनाता है, जहां डिविडेंड देना कंपनी की मर्जी पर निर्भर करता है।
2026 में REIT पेआउट पर टैक्स: निवेशकों के लिए गाइड
इनकम टैक्स एक्ट के तहत REITs और InvITs को बिजनेस ट्रस्ट माना जाता है और इन्हें 'पास-थ्रू' स्टेटस मिला हुआ है। यानी ट्रस्ट के लेवल पर कमाई पर टैक्स नहीं लगेगा, बल्कि यह यूनिट-होल्डर्स के हाथ में टैक्स योग्य होगा। रेजिडेंट यूनिट-होल्डर्स के लिए REIT से मिलने वाला डिविडेंड, ब्याज और रेंट उनके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स किया जाता है। इसका मतलब है कि ऊंचे टैक्स ब्रैकेट वाले निवेशक को कम स्लैब वाले व्यक्ति की तुलना में ज्यादा टैक्स देना होगा।
अगर आप 12 महीने के भीतर REIT यूनिट्स बेचते हैं, तो शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) पर 20 प्रतिशत प्लस सेस लगेगा। वहीं, 12 महीने से ज्यादा समय तक रखने पर, एक साल में 1.25 लाख रुपये से ज्यादा के मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स लगेगा (बिना इंडेक्सेशन के)। 1 जनवरी, 2026 से भारत में REITs को म्यूचुअल फंड और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड के लिए इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट के रूप में माना जा रहा है। यह कदम ग्लोबल प्रैक्टिस के अनुरूप है और इससे मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद है।
अप्लाई करने से पहले इन जोखिमों पर भी डालें नजर
कंपनी का पूरा पोर्टफोलियो बेंगलुरु में है, जिसका मतलब है कि इसका प्रदर्शन वहां के रियल एस्टेट मार्केट, नियमों और डिमांड पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, टॉप 10 किरायेदारों से ही कुल रेंटल इनकम का 63 प्रतिशत हिस्सा आता है। यह काफी ज्यादा है। अगर कोई एक बड़ी कंपनी भी ऑफिस कम करने या छोड़ने का फैसला करती है, तो कमाई पर सीधा असर पड़ सकता है।
कर्ज और ब्याज दरें भी एक चिंता का विषय हैं। भविष्य में कर्ज लेने से फाइनेंसिंग कॉस्ट बढ़ सकती है और ब्याज दरें बढ़ने से निवेशकों के लिए डिस्ट्रीब्यूटेबल इनकम कम हो सकती है। हालांकि, Bagmane की बैलेंस शीट फिलहाल मजबूत है और नेट डेट पोर्टफोलियो वैल्यू का सिर्फ 7 प्रतिशत है, लेकिन इनका लगभग पूरा कर्ज फ्लोटिंग रेट पर है। बढ़ती ब्याज दरें कोई काल्पनिक बात नहीं बल्कि एक वास्तविक जोखिम है जिसे हर REIT निवेशक को ध्यान में रखना चाहिए।
सब्सक्रिप्शन स्टेटस और मार्केट का मूड
6 मई की शाम तक Bagmane REIT IPO कुल 2.23 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। QIB कैटेगरी (एंकर को छोड़कर) में यह 0.90 गुना और NII कैटेगरी में 3.83 गुना भरा है। 2026 के सुस्त IPO मार्केट को देखते हुए इस IPO को मिल रहा रिस्पॉन्स काफी अच्छा है। साल के पहले चार महीनों में अब तक केवल 20 मेनबोर्ड पब्लिक इश्यू ही लिस्ट हुए हैं, ऐसे में REIT इश्यू में इतनी दिलचस्पी इस एसेट क्लास के लिए उत्साहजनक है।
चाहे आप पहली बार REIT में निवेश कर रहे हों या अनुभवी निवेशक हों, Bagmane IPO भारतीय रियल एस्टेट की दिशा को समझने के लिए अहम है। एक्सिस कैपिटल के अनुमानों के मुताबिक, Bagmane का प्रति यूनिट NAV 109.13 रुपये है। 100 रुपये के IPO प्राइस पर, प्राइस-टू-NAV लगभग 0.92 गुना बैठता है, जिसका मतलब है कि निवेशकों को फेयर वैल्यू पर 8 प्रतिशत का डिस्काउंट मिल रहा है। यही डिस्काउंट और अनिवार्य इनकम पेआउट स्ट्रक्चर इस IPO के आखिरी दिन को खास बनाता है।


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