UPI लेन-देन में फ्रॉड से बचने के 4 तरीके, जानिये यहां

नयी दिल्ली। यूपीआई या यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस ने भारत में बहुत तेजी से लोकप्रियता हासिल की है। यह काफी सुविधाजनक और तेज़ सर्विस वाला पेमेंट सिस्टम है। इस सिस्टम किसी की खाता संख्या जाने बिना ही दो बैंक खातों के बीच भुगतान की सुविधा मिलती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आकड़ों के मुताबिक इसी साल जनवरी में भारत में 2.16 लाख करोड़ रुपये की कुल 1.3 अरब लेन-देन यूपीआई के जरिये हुईं। इस समय भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की BHIM ऐप के अलावा Google Pay, Paytm और PhonePe जैसे प्राइवेट कंपनियों के ऐप सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले UPI प्लेटफॉर्म हैं। इनके अलावा खबरों के मुताबिक रिलायंस जियो और व्हाट्सएप भी अपना यूपीआई मोड शुरू करने की तैयारी में हैं। मगर जिस तरह यूपीआई का इस्तेमाल बढ़ रहा उसी तरह इनसे जुड़े फ्रॉड का जोखिम भी बढ़ रहा है। आपको यूपीआई का इस्तेमाल करते हुए इससे जुड़े फ्रॉड से सावधान रहने की जरूरत है। हम आपको बताने जा रहे हैं 4 ऐसे उपाय, जिनसे आप यूपीआई फ्रॉड से सुरक्षित रह सकते हैं।

ट्रांसफर रिक्वेस्ट से रहें सावधान

ट्रांसफर रिक्वेस्ट से रहें सावधान

यूपीआई-आधारित ऐप जैसे BHIM या Google Pay पर किसी दूसरे व्यक्ति से फंड के लिए रिक्वेस्ट करने का ऑप्शन होता है। ऑनलाइन या ऑफलाइन खरीदार बन कर धोखाधड़ी करने वाले आपको अपना पिन नंबर दर्ज करके भुगतान के रूप में इसे स्वीकार करने के लिए कह सकते हैं। यहां ध्यान रखना जरूरी है कि फंड प्राप्त करने के लिए पिन दर्ज करने की जरूरत नहीं होती। आपको फंड लेने के लिए पिन दर्ज करने को कहा जायेगा। आपके पास किसी अज्ञात नंबर से फंड प्राप्त करने के अनुरोध को अस्वीकार करने या नंबर को ब्लॉक करने और स्पैम के रूप में रिपोर्ट करने का ऑप्शन होगा। आप रिक्वेस्ट को अस्वीकार, ब्लॉक या स्पैम रिपोर्ट कर दें। किसी भी हाल में अपना पिन न दर्ज करें।

सोशल मीडिया एक्सपोज़र और फर्जी कॉल से बचें

सोशल मीडिया एक्सपोज़र और फर्जी कॉल से बचें

किसी यूपीआई ऐप पर यदि किसी की लेनदेन किसी वजह से हो पाये तो लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंपनी के पेज पर इसकी शिकायत करते हैं। ऐसे में होता यह है कि धोखाधड़ी करने वाले आपकी शिकायत को देख कर कंपनी का अधिकारी बन कर आपको कॉल कर सकते हैं। ध्यान रहे कि सोशल मीडिया पर अपने मोबाइल नंबर जैसी जानकारी दर्ज न करें। साथ ही अगर कोई कॉल आये तो उसे अपने पिन आदि की डिटेल न दें। लेनदेन न होने पर आपके लिए बेहतर सीधे कंपनी की हेल्पलाइन पर कॉल करना। सभी पेमेंट ऐप और बैंकों के पास 24/7 हेल्पलाइन नंबर हैं, जिन्हें आप सीधे कॉल कर सकते हैं। ये भी याद रखें कि इनमें से कोई भी आपके कार्ड की डिटेल, सीवीवी या ओटीपी के लिए नहीं पूछेगा।

असुरक्षित ऐप डाउनलोड न करें

असुरक्षित ऐप डाउनलोड न करें

कभी भी किसी भी अनवेरिफाइड ऐप को डाउनलोड न करें। जालसाज आपको Anydesk, Teamviewer और स्क्रीनशॉट जैसी वेरिफाइड स्क्रीन-शेयरिंग फ्री ऐप डाउनलोड करने के लिए कह सकते हैं, जो इंजीनियरों को आपके डिवाइस के रिमोट एक्सेस के माध्यम से तकनीकी समस्याओं को ठीक करने में मदद करती है। आरबीआई को ऐसे मामलों की रिपोर्ट मिली है जहाँ इन स्क्रीन-शेयररिंग ऐप्स का उपयोग फोन को नियंत्रित करने और फोन नंबर से जुड़े किसी व्यक्ति के बैंक खाते से पैसे चोरी करने के लिए किया गया। इसलिए आप सावधान रहें और किसी भी अनजाने नंबर से ऐसे ऐप को डाउनलोड कभी न करें। इन ऐप के लिंक आपको मैसेज या व्हास्टएप मैसेज या ईमेल के जरिये भी भेजा जा सकता है।

अपने फोन को कई तरह से सुरक्षित करें

अपने फोन को कई तरह से सुरक्षित करें

अपने फोन में एक मजबूत पैटर्न या बायोमेट्रिक पासवर्ड डालें। दूसरे विभिन्न UPI या भुगतान एप्लिकेशन खोलने के लिए एक दूसरा पिन सेट करें। लेन-देन शुरू करने के लिए दर्ज किए गए पिन को आप अलग भी कर सकते हैं। ये भी सुनिश्चित करें कि आपके ऐप्स और फ़ोन सॉफ़्टवेयर बग्स को ठीक करने के लिए अपडेट किए गए हों। अवांछित डाउनलोड से बचाने के लिए आप अच्छे एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर भी इन्स्टॉल कर सकते हैं। अगर आपका फोन खो जाये तो अपने बैंक के ग्राहक सेवा से संपर्क करें और अपने UPI ऐप से लिंक खाते को ब्लॉक करवायें।

यह भी पढ़ें - Virtual Credit Card : फ्रॉड से बचने के लिए शानदार ऑप्शन, और भी हैं फायदे

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